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भाजपा से बचने की तृणमूल की रणनीति

भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बीच पश्चिम बंगाल में शह और मात का खेल चल रहा है। भाजपा के नेता लगातार प्रदेश का दौरा कर रहे हैं और राज्य सरकार पर हमले कर रहे हैं। इस तरह से भाजपा अपने को राज्य में तृणमूल का विकल्प या उसका मुख्य विपक्षी दिखाना चाहती है। भाजपा के नेता तृणमूल कांग्रेस के साथ आमने सामने का मुकाबला बनाना चाहते हैं। आमने सामने के मुकाबले में भाजपा को ध्रुवीकरण कराने में आसानी होगी और इस राजनीति में तृणमूल को नुकसान होगा।

तृणमूल कांग्रेस के चुनाव प्रबंधक प्रशांत किशार ने भाजपा की इस रणनीति को एक साल पहले  से समझा हुआ है। इसलिए उन्होंने तृणमूल के नेताओं को समझाया है कि वे भाजपा पर हमला करने से बचें। हालांकि भाजपा ऐसे मुद्दे उठा रही है या ऐसे काम कर दे रही है, जिससे तृणमूल नेताओं की मजबूरी हो जा रही है। पहले ममता बनर्जी की राजनीति लेफ्ट और कांग्रेस के नेताओं को तोड़ कर इन दोनों पार्टियों को कमजोर करने की रणनीति थी। पर प्रशांत किशोर ने उससे भी रोका। उन्होंने यह समझाया हुआ कि मुकाबला त्रिकोणात्मक होना चाहिए तभी तृणमूल के लिए मौका है।

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