ममता का यूएन सुझाव था आत्मघाती

ममता बनर्जी ने बहुत बड़ी गलती की। उन्होंने पश्चिम बंगाल में संयुक्त राष्ट्र संघ की देख रेख में जनमत संग्रह कराने की बात कही। हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी जोड़ा कि संयुक्त राष्ट्र के अलावा न्यायालय या किसी और स्वतंत्र एजेंसी के जरिए जनमत संग्रह कराया जा सकता है कि लोग नागरिकता कानून के समर्थन में हैं या विरोध में। पर उनका यह सुझाव आत्मघाती है। भारत के आंतरिक मामलों में संयुक्त राष्ट्र संघ या किसी भी दूसरी विदेशी संस्था को शामिल करने का सुझाव सही नहीं कहा जा सकता है। तभी कहने के एक दिन बाद ही उनको सफाई देनी पड़ी।

वैसे भी भारत में एक कश्मीर का मामला संयुक्त राष्ट्र संघ में गया हुआ है, जिसे लेकर भाजपा और उससे पहले जनसंघ के नेता कांग्रेस के खिलाफ और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के खिलाफ आजतक प्रचार करते हैं। माना जाता है कि कश्मीर का मामला संयुक्त राष्ट्र संघ में ले जाना बड़ी गलती थी। उसी तरह नागरिकता कानून या राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का मामला घरेलू मामला है, जिसे संयुक्त राष्ट्र में ले जाने का सुझाव एक बड़ी गलती है। इससे बहुसंख्यक लोगों में अच्छी धारणा नहीं बनी होगी।

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