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बंगाल में भाजपा का अलग राज्य!

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाने का भाजपा को ऐसा मलाल हुआ है कि वह राज्य के अंदर एक अलग अपना राज्य बना रही है। हार को सीधे सीधे स्वीकार करने की बजाय भाजपा पहले दिन से ममता बनर्जी सरकार और तृणमूल कांग्रेस पार्टी के साथ ऐसा टकराव बना रही है, जिससे अगले पांच साल तक राज्य पूरी तरह से बंटा हुआ रहेगा। चुनाव नही जीत पाने की पीड़ा के साथ साथ यह 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारी का भी हिस्सा है। आखिर भाजपा को राज्य में अपनी 18 लोकसभा सीटें बचानी हैं।

बहरहाल, भाजपा और उसकी केंद्र सरकार ने तय किया है कि उसके जीते सभी 77 विधायकों को केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा दी जाएगी। सोचें, पश्चिम बंगाल में पिछले छह महीने से केंद्रीय अर्धसैनिक बल भी एक चुनावी मुद्दा रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस छोड़ कर आने वाले तमाम नेताओं को भाजपा की केंद्र सरकार ने अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा दी हुई है। चुनाव के बीच ममता ने कई बार आरोप लगाया कि अर्धसैनिक बल सीधे अमित शाह से आदेश ले रहे हैं। कूचबिहार के सीतलकूची में चार लोग अर्धसैनिक बलों की गोली से मारे गए थे और 24 घंटे से भी कम समय में सुरक्षा बलों को क्लीन चिट दी गई थी।

अब भाजपा अपने जीते हुए 77 विधायकों को अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा दिला कर एक  राजनीतिक मुद्दे को जिंदा रखेगी। उसका एक मकसद सीतलकूची में चार लोगों को मार गिराने की घटना की याद बनाए रखना भी है। यह राज्य की पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर अविश्वास की पराकाष्ठा है और वह भी सिर्फ इसलिए है क्योंकि भाजपा को तृणमूल कांग्रेस के साथ टकराव बनाए रखना है और ममता सरकार की ऑथोरिटी को कम करके दिखाना है। अब बड़ा सवाल यह है कि ममता भी अपने जीते हुए 214 विधायकों को बंगाल पुलिस की भारी सुरक्षा दें तो क्या होगा? क्या राजनीतिक टकराव होगा तो बंगाल पुलिस बनाम अर्धसैनिक बलों की जंग होगी? फिर वीआईपी कल्चर खत्म करने के सिद्धांत का क्या हुआ? क्या पुलिस और अर्धसैनिक बल सिर्फ नेताओं की सुरक्षा के लिए हैं? फिर नक्सलियों से कौन लड़ेगा?

ममता की ऑथोरिटी कम करने और उनसे टकराव बनाने की रणनीति के तहत ही पहले दिन से चुनाव बाद की हिंसा का अखिल भारतीय स्तर पर प्रायोजित प्रचार हुआ। उसी तरह की हिंसा पंचायत चुनावों के बाद उत्तर प्रदेश में भी हो रही है लेकिन उसकी चिंता न केंद्र सरकार को है और न माननीय राज्यपाल को है। दूसरी ओर बंगाल में महामहिम राज्यपाल हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा करने जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री पहले दौरा कर चुके हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम भी दौरा कर चुकी है। सोचें, इन सबसे क्या भाजपा राज्य के अंदर अपना एक अलग राज्य नहीं बना रही है?

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