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Sunday, April 18, 2021
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आजाद को क्या दे सकती है कांग्रेस?

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कांग्रेस के नेता हैरान-परेशान हैं कि आखिर इस समय गुलाम नबी आजाद ने अपने साथ पार्टी के पांच-छह नेताओं को जोड़ कर जो राजनीति की है उसका क्या मकसद है? आजाद को पता है कि इस समय कांग्रेस उन्हें कुछ भी देने की स्थिति में नहीं है। अभी एक साल तक कहीं भी राज्यसभा के चुनाव नहीं हैं। केरल में जरूर एक सीट का चुनाव होगा पर वह वायलार रवि की सीट है। ऐसे में कांग्रेस उन्हें कहीं से भी राज्यसभा नहीं भेज सकती है। फिर कपिल सिब्बल के यह कहने का क्या मतलब है कि कांग्रेस आजाद को राज्यसभा से दूर रखना चाहती है? यह सवाल तो तब उठता, जब राज्यसभा के चुनाव हो रहे हों और पार्टी आजाद की अनदेखी करके किसी और को उच्च सदन में भेजे। उससे पहले ही कांग्रेस नेताओं ने दबाव बनाना शुरू किया है तो उसके पीछे कोई खास मकसद देखा जा रहा है।

कांग्रेस के एक जानकार नेता का कहना है कि तमिलनाडु में सीटों की बातचीत के लिए गुलाम नबी आजाद को अधिकृत किया जाना चाहिए था। आखिर आजाद पहले प्रभारी रहे हैं और उन्होंने डीएमके नेताओं के soniaसाथ सीटों के तालमेल की बातचीत की हुई है। लेकिन उनकी बजाय कांग्रेस नेतृत्व ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी को बातचीत के लिए अधिकृत किया और उनके साथ दिनेश गुंडूराव और रणदीप सुरजेवाला को भी टीम में शामिल किया। कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं में से एक का कहना है कि पार्टी ने आजाद को संगठन में भी कोई जिम्मेदारी देने का वादा नहीं किया। एक नेता ने महाराष्ट्र की रजनी पाटिल का हवाला देते हुए कहा कि वे रिटायर हुई थीं तो सोनिया गांधी उनसे मिली थीं और उनको संगठन की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसा कुछ आजाद के साथ नहीं हुआ। मुश्किल यह है कि उनके रिटायर होने के समय ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी ऐसी केमिस्ट्री दिखी कि कांग्रेस आलाकमान के कान खड़े हो गए। मोदी की तारीफ आजाद को भारी पड़ रही है। उन्हें भाजपा से तो पता नहीं क्या मिल पाएगा लेकिन कांग्रेस के मिलने का रास्ता बंद हो रहा है।

ऊपर से उनके कंधे पर बंदूक रख कर गोली चला रहे बाकी पांचों नेता किसी न किसी पद पर हैं। आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा राज्यसभा में हैं तो मनीष तिवारी लोकसभा  सांसद हैं। भूपेंदर सिंह हुड्डा हरियाणा विधानसभा में नेता विपक्ष हैं और पिछले साल उन्होंने पार्टी आलाकमान पर दबाव बना कर अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा के लिए राज्यसभा भी ले ली थी। अकेले आजाद ही हैं जिनके पास कोई जिम्मेदारी नहीं है। इसलिए भी उनको ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।

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