बिहार में चुनाव टला तो क्या होगा?

क्या बिहार में विधानसभा का चुनाव टल सकता है? वैसे तो भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे यह मैसेज गया है कि चुनाव तय समय पर यानी साल के अंत में होंगे। पर दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्य के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने ऑनलाइन चुनाव की बात कही, जिससे यह सवाल पैदा होता है कि क्या समय पर चुनाव नहीं भी हो सकता है? असल में किसी को अंदाजा नहीं है कि कोरोना वायरस का संकट कब तक चलता रहेगा। दुनिया के विकसित देशों ने तो अपना प्रोजेक्शन बनवा कर पहले ही पता कर लिया था कि उनके यहां कब पीक आएगा और कब केसेज खत्म होंगे। पर भारत की सरकार के मन में इस किस्म की वैज्ञानिक सोच के प्रति हिकारत का भाव है। इसलिए कोई प्रोजेक्शन किसी के पास नहीं है।

संभव है कि कोरोना वायरस का संकट साल के अंत तक चलता रहे। ऐसे में चुनाव समय पर नहीं हो सकता है क्योंकि चुनाव की अधिसूचना सितंबर में जारी करनी होती है। राज्य में कई इलाके नक्सल प्रभावित हैं। इसलिए कई चरणों में चुनाव होता है। तभी एक अंदेशा चुनाव टलने का है। चुनाव टला तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना होगा और उसके बाद चुनाव सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय यानी अमित शाह की देखरेख में राज्यपाल का प्रशासन करवाएगा। फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। उनकी पार्टी बैकफुट पर आएगी। सीटों के बंटवारे और तालमेल में भाजपा की मोलभाव की क्षमता बढ़ेगी। एडवांटेज भाजपा हो जाएगा और इसका बड़ा असर चुनाव के बाद दिखाई देगा। चुनाव के बाद भाजपा महाराष्ट्र के शिव सेना की तरह अड़ सकती है कि उसका मुख्यमंत्री बनेगा।

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