अब शाहीन बाग का क्या होगा?

संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग की सड़कों पर बैठे लोगों को वहां से हटने के लिए तैयार करने के वास्ते सुप्रीम कोर्ट ने दो वार्ताकार नियुक्त किए थे। इन दोनों वार्ताकारों को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट देनी है। इन पांच दिन के प्रयास का कुल लब्बोलुआब यह है कि शाहीन बाग से होकर कालिंदी कुंज से होते हुए नोएडा जाने वाली एक सड़क खोली गई है। बाकी प्रदर्शनकारी अपनी जगह पर डटे हैं। यह सड़क भी खोलने में खतरे बहुत हैं। तभी प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से 24 घंटे की सुरक्षा मांगी है और यह भी कहा है कि सुरक्षा देने के लिए सुप्रीम कोर्ट आदेश करे।

प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा के आदेश देने की शर्त रखी है और साथ ही यह भी कहा है कि शाहीन बाग और जामिया के इलाके में जिन लोगों पर भी सीएए विरोध की वजह से मुकदमा हुआ है उस वापस लिया जाए। सो, अब सुप्रीम कोर्ट को फैसला करना होगा। अदालत ने वार्ताकार नियुक्त करते हुए कहा था कि अगर बातचीत से सड़क खाली नहीं होती है तो अदालत यह मामला प्रशासन पर छोड़ेगी। कायदे से अदालत को प्रशासन को आदेश देना चाहिए कि वह सड़क खाली कराए ताकि हर दिन परेशान हो रहे लाखों लोगों को राहत मिले। या तो अदालत आदेश देगी या खुद सरकार पहल करके प्रदर्शनकारियों को हटाएगी।

यह तय माना जा रहा है कि सरकार किसी को बातचीत के लिए नहीं भेजने जा रही है। अगर अदालत ऐसा आदेश करे तब अलग बात है। तभी यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि शाहीन बाग में अगले कुछ दिन में रामलीला मैदान की घटना दोहराई जा सकती है, जब पी चिदंबरम की पुलिस ने बाबा रामदेव और उनके समर्थकों को रामलीला मैदान से खदेड़ दिया था।

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