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Wednesday, May 12, 2021
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कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव का क्या होगा?

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अगले महीने कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव हो जाएगा या चुनाव अभी टला रहेगा? यह लाख टके का सवाल है, जिसका जवाब कांग्रेस का कोई नेता नहीं दे रहा है। सब बड़ी बेसब्री से चुनाव नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। कई किस्म का कांटा-जोड़ चल रहा है। अगर कांग्रेस केरल में सरकार बना लेती है और तमिलनाडु में सहयोगी पार्टी डीएमके की सरकार बन जाती है और असम में विधानसभा त्रिशंकु हो जाती है तो इसका श्रेय राहुल गांधी को जाएगा। फिर वे जब चाहें तब अध्यक्ष बन सकते हैं। तब चुनाव को लेकर कोई आवाज नहीं उठेगी। लेकिन अगर केरल और असम के नतीजे अनुकूल नहीं आए तो कांग्रेस नेताओं के एक समूह तत्काल अध्यक्ष के चुनाव की मांग करेगा।

हालांकि यह जरूरी नहीं है कि उनकी मांग पर का चुनाव हो जाए। अब भी कोरोना का ब्रह्मास्त्र बाकी है, जिसके बहाने चुनाव थोड़े दिन और टाला जा सकता है। लेकिन उसके नाम पर चुनाव ज्यादा नहीं टलेगा। महीने-दो महीने में जब केसेज कम होंगे तब चुनाव कराना होगा। मई-जून में संभावित चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनावों के नतीजे भी बहुत मायने वाले हैं। प्रियंका गांधी की टीम कांग्रेस को चुनाव लड़ा रही है। अगर कांग्रेस का प्रदर्शन ठीक-ठाक नहीं रहता है तो पार्टी के अंदर प्रियंका गांधी की बातों का वजन भी कम होगा। अब तक वे परिवार के प्रति समर्पित और बागी नेताओं के बीच संतुलन का काम देखती रही हैं। लेकिन दो मई को उनकी भी परीक्षा है।

इस बीच राहुल गांधी की ब्रांडिंग का काम उनकी टीम ने शुरू कर दिया है। कुछ तो हालात भी ऐसे बने, जिसमें राहुल गांधी की कही बातें सही साबित होने लगीं। भारतीय जमीन पर चीन के कब्जे और कोरोना वायरस की दूसरी लहर की भविष्यवाणी से लेकर, 45 साल से ऊपर के सभी लोगों के लिए वैक्सीन की मंजूरी की मांग, दुनिया की हर वैक्सीन के भारत में इस्तेमाल की इजाजत की मांग, बोर्ड की परीक्षाएं टालने की मांग जैसी कई बातें हैं, जिनमें राहुल सही साबित हुए। सो, अपने आप भी सोशल मीडिया में उनको लेकर माहौल बना कि वे एक गंभीर और समझदार नेता हैं। इसके बरक्स सोशल मीडिया में यह ट्रेंड चला की ‘पप्पू कौन’!

कोरोना वायरस से लड़ाई और अर्थव्यवस्था की बुरी हालत ने केंद्र सरकार और खास कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशासकीय क्षमता पर गंभीर सवाल खड़ा किया है और उनके मुकाबले पिछले सात साल के अपने आक्रामक अभियान की वजह से उनके बरक्स राहुल का कद ऊंचा हुआ है। राहुल गांधी की टीम के नेता इस स्थिति का फायदा उठा सकते हैं। उन्होंने अपनी तरफ से भी राहुल की ब्रांडिंग को हवा दी है। इस बीच कांग्रेस के बागी नेता हाशिए में गए हैं। उनके ऊपर से फोकस हटा है। सो, अगर नतीजे अनुकूल नहीं आते हैं तब भी राहुल की नई ब्रांडिंग उनको फायदा पहुंचा सकती है।

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