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राजरंग| नया इंडिया|

विपक्षी सरकारें कृषि कानूनों पर क्या करेंगी?

संविधान की व्यवस्था के मुताबिक कृषि राज्यों का विषय है। राज्यों को इस पर कानून बनाने और अमल करने का अधिकार होता है। लेकिन इसके साथ ही समवर्ती सूची में भी इसका जिक्र किया गया है और कहा गया है कि केंद्र व राज्य दोनों मिल कर उत्पादन, आपूर्ति, वितरण आदि का नियंत्रण करेंगे। सो, विपक्षी शासन वाली राज्य सरकारें केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध की तैयारी कर रही हैं। वे इस बात के रास्ते तलाश रही हैं कि किस तरह से उन्हें केंद्र के इस कानून पर अमल नहीं करना पड़े। कम से कम दो सरकारों- महाराष्ट्र और पंजाब ने इस बात के संकेत दिए हैं कि वे इसे लागू नहीं करेंगे।

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा है कि राज्य सरकार केंद्र के बनाए कृषि कानूनों को लागू नहीं करेगी। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने भी कहा है कि वे किसानों के हितों की रक्षा करने के रास्ते तलाश रहे हैं। उन्होंने किसान की अनाज का एक एक दाना खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। असल में राज्यों को इस बात पर आपत्ति है कि कृषि राज्य का विषय है इसके बावजूद कृषि सेक्टर में इतना बड़ा बदलाव करने से पहले केंद्र ने उनकी सलाह नहीं ली। मनमाने तरीके से कानून की रूपरेखा तैयार की गई। राज्यों का यह भी कहना है कि हर राज्य की स्थितियां अलग हैं, किसानों की हालत अलग है और अनाज खरीद का सिस्टम अलग है। ऐसे में कोई एक कानून सभी राज्यों के लिए कैसे बनाया जा सकता है?

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