Indo pacific quad leaders चीन का नाम लेने में क्या डर है?
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चीन का नाम लेने में क्या डर है?

Indo pacific quad leaders

यह सवाल अमेरिका के अखबारों ने पूछा है कि आखिर चार देशों के समूह क्वाड के नेताओं ने चीन का नाम क्यों नहीं लिया? संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में हिस्सा लेने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी क्वाड की पहली आमने-सामने की बैठक में शामिल हुए थे। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में हिंद-प्रशांत की शांति, सुरक्षा और स्थायित्व को लेकर चर्चा हुई। बाद में एक साझा बयान भी जारी हुआ लेकिन उसमें चीन का नाम नहीं लिया गया। सबको पता है कि क्वाड हो या ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका का नया बना ऑक्स समूह हो, इनका मकसद चीन पर अंकुश लगाना ही है फिर चीन का नाम लेने में क्या चिंता है? Indo pacific quad leaders

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असल में अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक या भारत की दोपक्षीय वार्ताओं से ज्यादा नजर क्वाड की बैठक पर थी। अमेरिकी अखबारों ने दूसरे किसी इवेंट के मुकाबले इसे ज्यादा तरजीह दी और इसे ज्यादा कवरेज मिली। लेकिन चीन को लेकर दो टूक कुछ नहीं कहने से वहां निराशा है। यह भी कहा जा रहा है कि पिछले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को लेकर जो माहौल बनाया था वह माहौल धीरे धीरे खत्म हो रहा है। अब चीन से दूरी है लेकिन उस तरह से आमने सामने का टकराव नहीं है, जैसे ट्रंप के समय था। कुछ लोग जानकारों का कहना है कि चीन का नाम इसलिए नहीं लिया गया ताकि उसे यह कहने का मौका न मिले कि यह समूह उसके विरोध में बना है। क्या यह आंख में धूल झोंकना नहीं है? सबको पता है और खुद चीन कई बार यह बात कह चुका है तो अब यह परदा डालने का क्या मतलब? इसी रणनीति के तहत राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के अपने भाषण में भी चीन का नाम नहीं लिया।

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