Congress UPA BJP NDA कांग्रेस नेतृत्व वाला यूपीए है कहां
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कांग्रेस नेतृत्व वाला यूपीए है कहां?

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Congress UPA BJP NDA  कह सकते हैं कि भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए भी कहां है! न कोई एनडीए का संयोजक है और न कहीं एनडीए के घटक दलों की बैठकें होती हैं और पिछले चार-पांच साल में एक एक करके पार्टियां एनडीए से अलग होती गई हैं। ऐसे ही कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूपीए भी बहुत ठोस तरीके से नजर नहीं आता है। तभी शिव सेना के सांसद संजय राउत ने कहा कि यूपीए डिफंक्ट यानी मृतप्राय हो गया है इसलिए विपक्ष का दूसरा गठबंधन बनाया जाना चाहिए। ध्यान रहे कांग्रेस के साथ शिव सेना जिस गठबंधन में है उसका नाम महाविकास अघाड़ी है। इसकी महाराष्ट्र में सरकार है। विपक्ष में होने के बावजूद शिव सेना यूपीए का हिस्सा नहीं है।

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कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए में एनसीपी जरूर घटक दल है लेकिन उसके नेता बिल्कुल अलग ही बरताव कर रहे हैं। संजय राउत से पहले शरद पवार और उनके करीबी नेता अलग विपक्षी गठबंधन बनाने के प्रयास में लगे हैं। शरद पवार की राजनीति कांग्रेस नेताओं को समझ में नहीं आती है। पिछले दिनों वे प्रधानमंत्री से मिले थे तब भी कई तरह की संभावनाओं की अटकलें लगाई जा रही थीं। अब संजय राउत ने उनको विपक्षी राजनीति का भीष्म पितामह कहा है तो सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ट्विट करके तंज किया कि तभी महाभारत के भीष्म की तरह पवार का दिल भी पांडवों के साथ है। उनका कहना था कि पवार का सद्भाव भाजपा या केंद्र सरकार के प्रति बना हुआ है।

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Congress on Corona Virus

शरद पवार ने वैसे भी राहुल गांधी के लिए कई ऐसे बयान दिए हैं, जिनसे कांग्रेस की नई पीढ़ी के नेता उनसे नाराज हैं। सो, एक तरह से एनसीपी यूपीए में होने के बावजूद इससे अलग है। उत्तर प्रदेश की दोनों प्रादेशिक पार्टियां विपक्ष में हैं और दोनों का कांग्रेस के साथ राजनीतिक साझा रहा है कि लेकिन न बहुजन समाज पार्टी यूपीए में है और न समाजवादी पार्टी यूपीए में है। इस समय विपक्ष की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा ममता बनर्जी का है और कांग्रेस के बाद विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी भी तृणमूल कांग्रेस की है लेकिन वह भी यूपीए में नहीं है।

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कांग्रेस कमान दूसरा मोर्चा

कर्नाटक में कांग्रेस ने जेडीएस की सरकार बनवाई थी लेकिन वह भी यूपीए का हिस्सा नहीं है। लेफ्ट पार्टियों के साथ कांग्रेस का सद्भाव है। उसने यूपीए-एक की सरकार को बाहर से समर्थन दिया था और दोनों पार्टियां बंगाल दो बार से विधानसभा का चुनाव मिल कर लड़ रही हैं। लेकिन वह भी यूपीए में नहीं है। विपक्ष की एक और बड़ी पार्टी आम आदमी पार्टी है लेकिन वह भी यूपीए में नहीं है। ले-देकर डीएमके, राजद और जेएमएम ये तीन ही बड़ी पार्टियां हैं, जो यूपीए में हैं और इनके नेता यूपीए की बैठकों में शामिल होते हैं। इनके अलावा कुछ अन्य छोटी छोटी पार्टियां जरूर यूपीए में हैं, लेकिन उनका कोई खास मतलब नहीं है। वैसे गिनेंगे तो यूपीए में 40 पार्टियां दिखाई देती हैं। सो, सचमुच यूपीए का ढांचा बिखर गया है। इसलिए कांग्रेस को नए सिरे से गठबंधन बनाना चाहिए और कांग्रेस का नेतृत्व मानने वाली पार्टियों को उसमें शामिल करना चाहिए।

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