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विशेष संपादकीय : कोरोना के केसेज बढ़ने का श्रेय किसको?

देश में कोरोना वायरस के केसेज का हर दिन नया रिकार्ड बन रहा है। पहली लहर जब पीक पर पहुंची थी तो पिछले साल 17 सितंबर को 97 हजार केस आए थे। दूसरी लहर में सात अप्रैल को एक लाख 26 हजार नए केस मिले। पिछले साल 17 सितंबर के बाद जब केसेज कम होने लगे तो सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया तक में यह बताया जाने लगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से कोरोना के केस कम हो गए हैं। भाजपा के नेताओं ने तो प्रचार किया कि मोदीजी ने देश के लोगों को बचा लिया, वरना सब कुछ नष्ट हो जाता। अमेरिका और दूसरे विकसित देशों में कोरोना केसेज के हवाले से मोदीजी को देश बचाने का श्रेय दिया गया। लॉकडाउन से देश की आर्थिकी के गर्त में जाने की हकीकत पर भी इस बात के पर्दा डाला गया कि मोदीजी ने लोगों की जान बचा दी।

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अब एक बार फिर कोरोना वायरस के केसेज बढ़ने लगे हैं। पहले के पीक के मुकाबले बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हो गई है तो इसका ठीकरा किसके सर फूटेगा? क्या मोदीजी को श्रेय देने वाला मीडिया इसके लिए उनको जिम्मेदार ठहराया जाएगा? या कम से कम कुछ जरूरी सवाल पूछेगा? ध्यान रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना को रोकने के लिए जो भी उपदेश और नसीहत दे रहे हों पर असल में वे इनमें से किसी का पालन नहीं कर रहे हैं। वे चुनावी रैलियों में खुद मास्क नहीं लगा रहे हैं, हजारों लोगों को जुटा कर रैली कर रहे हैं लेकिन उनकी सरकार राज्यों को और लोगों को मास्क पहनने या घरों में रहने की नसीहत दे रही है। एक साल से ज्यादा समय से कोरोना का कहर चल रहा है पर ऐसी कोई खबर नहीं है कि सरकार ने एक साल में स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास किया है, जिससे कोरोना को रोकने में मदद मिल रही है। वायरस की दूसरी लहर का समूचा दोष जनता पर डाला जा रहा है कि वह लापरवाही बरत रही है। इसका मकसद सिर्फ यह है कि सरकार पर आरोप नहीं लगे।

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