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फिर भारत विरोधी कौन है?

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि हिंदू कभी भारत विरोधी नहीं हो सकता है, उसके संस्कार ऐसे हैं कि वह राष्ट्रभक्त होता है। यह बात उन्होंने महात्मा गांधी को हिंदू राष्ट्रवादी बताने वाली एक किताब के विमोचन में कही। अब सवाल है कि हिंदू भारत विरोधी नहीं हो सकता है तो फिर कौन भारत विरोधी हो सकता है? भारतीय जनता पार्टी के नेता और सोशल मीडिया के हिंदुवादी लंगूर जिन लोगों को टुकड़े-टुकड़े गैंग का बताते हैं, चीन, पाकिस्तान का एजेंट बताते हैं, देश विरोधी बताते हैं, सरकार का विरोध करने वाले जिन लोगों को पाकिस्तान भेजने की बात करते हैं, वे कौन लोग हैं? ध्यान रहे भाजपा के अनेक नेताओं और पार्टी की आईटी सेल की नजर में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और इस तरह के भाजपा के हर छोटे-बड़े नेता का विरोध करने वाला देशविरोधी है।

दूसरा सवाल यह है कि संघ प्रमुख ने खुद कई बार कहा है कि भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है। संघ प्रमुख सहित अनेक हिंदू विचारकों का कहना है कि कुछ लोगों की पूजा पद्धति अलग हो सकती है लेकिन वह भारत में जन्मा है तो हिंदू है। इसका मतलब है कि भारत के 138 करोड़ लोग हिंदू हैं और हिंदू कभी भारत विरोधी नहीं हो सकता है यानी 138 करोड़ लोगों में से कोई भी भारत विरोधी नहीं हो सकता है। फिर भाजपा जो हम और वे, देशभक्त और देश विरोधी का जो नैरेटिव बना रही है और प्रचार कर रही है उसका क्या? क्या यह माना जाए कि संघ प्रमुख की इस बात के बाद अब देशभक्त और देशविरोधी वाला नैरेटिव बंद हो जाएगा? मुश्किल यह है कि ये वाला नैरेटिव बंद हो गया तो भाजपा चुनाव किस बात पर लड़ेगी? सो, यह माना जाना चाहिए कि संघ प्रमुख की दूसरी अनेकानेक बातों की तरह यह बात भी मौका देख कर कही गई एक बात है, एक जुमला है, जिसका वास्तव में देश की राजनीतिक, सामाजिक या सांस्कृतिक गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं है।

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