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लोकसभा में अधीर चौधरी की जगह कौन?

कांग्रेस पार्टी ने अधीर रंजन चौधरी को पश्चिम बंगाल का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है। अगले साल अप्रैल-मई में चुनाव होने वाले हैं और प्रदेश अध्यक्ष के नाते अब उनका ज्यादा समय वहां लगना है। तभी दिल्ली में इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि लोकसभा में अधीर रंजन चौधरी की जगह पार्टी किसको नेता बनाएगी। पिछली लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता कैप्टेन अमरिंदर सिंह थे, जिनको पंजाब चुनाव से पहले पंजाब का अध्यक्ष बना दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। बाद में वे पंजाब के मुख्यमंत्री हो गए। पश्चिम बंगाल में ऐसी कोई स्थिति नहीं। अधीर रंजन चौधरी को सिर्फ चुनाव लड़वाना है। सबको पता है कि वहां कांग्रेस का मुख्यमंत्री नहीं बनना है। फिर भी अभी वे अध्यक्ष बने हैं तो माना जा रहा है कि अब अगले लोकसभा चुनाव तक वे बने रहेंगे। इसलिए यह लगभग तय माना जा रहा है कि लोकसभा में कांग्रेस का नेता बदलेगा। कुछ दिन पहले ही कांग्रेस ने लोकसभा में असम के सांसद गौरव गोगोई को उप नेता बनाया है। ध्यान रहे अगले साल असम में चुनाव होने वाले हैं और राज्य की राजनीति में कांग्रेस की एकमात्र उम्मीद गोगोई परिवार ही है।

अगले साल केरल में भी विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। तभी तिरूवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर को लोकसभा में कांग्रेस के नेता बनाए जाने की सबसे ज्यादा संभावना है। वे तीन बार के सांसद हैं और मनमोहन सिंह की सरकार में कई अहम विभागों के मंत्री रहे। संयुक्त राष्ट्र संघ में काम करने का उनका अनुभव है और लगातार तीन बार से एक ही सीट से चुनाव जीत रहे हैं। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व को लेकर चिट्ठी लिखने वाले 23 नेताओं में शशि थरूर भी हैं। इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व का उनको लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में बहुत नाराजगी नहीं है। उनका अलावा दूसरा नाम मनीष तिवारी का है। वे दो बार के सांसद हैं और मनमोहन सिंह की सरकार में मंत्री भी रहे हैं। शशि थरूर की तरह वे भी कांग्रेस नेतृत्व को चिट्ठी लिखने वालों में शामिल हैं। पर उनका मामला थरूर से अलग इसलिए है क्योंकि पार्टी के बाकी नेताओं में थरूर को लेकर दिक्कत नहीं लेकिन मनीष तिवारी को लेकर राहुल के करीबी नेताओं में बहुत नाराजगी है। दूसरे पंजाब में भी उनके नाम से कांग्रेस को वोट का फायदा नहीं होना है। इसलिए उनकी संभावना अपेक्षाकृत कम है। केरल के ही नेता के सुरेश का भी नाम है। वे दलित नेता हैं और कांग्रेस में यह सोच थी कि उनको लोकसभा में उपाध्यक्ष का चुनाव लड़ाया जाए।

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