पवार क्यों नाराज हैं राहुल से?

शरद पवार भारतीय राजनीति के सबसे घाघ नेता हैं। पिछले साल जिस समय उनके भतीजे अजित पवार ने कथित तौर पर बगावत की थी और भाजपा के साथ मिल कर सरकार बना ली थी तब पवार को जानने वाले दक्षिण भारतीय एक पत्रकार ने कहा था कि पवार को समझना इस देश के किसी नेता के बस में नहीं। उन्होंने एक मिसाल देते हुए कहा कि अगर आप दिल्ली हवाईअड्डे पर पवार को मुंबई की टिकट लेते देखें तो तय मानें कि उनके पास चेन्नई का बोर्डिंग पास तैयार होगा और वे इन दोनों जगहों को छोड़ कर किसी तीसरी जगह पर लैंड कर सकते हैं। अपनी राजनीति से उन्होंने ऐसी ख्याति अर्जित की है। तभी जब उन्होंने चीन के मसले पर सरकार का साथ देने के लिए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को निशाना बनाया तब उसके कई मायने निकल रहे हैं।

सबसे पहले तो यह कहा जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र में कांग्रेस के नेताओं ने जैसी राजनीति की है उससे पवार परेशान हुए हैं। पृथ्वीराज चव्हाण जैसे कई नेताओं ने सरकार के खिलाफ बयान दिए। फिर कांग्रेस नेताओं ने जाकर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात की और अपनी शिकायतें सुनाईं। इसी बीच कांग्रेस ने विधान परिषद के चुनाव में अपने दो उम्मीदवार उतार दिए थे। हालांकि बाद में कांग्रेस ने एक उम्मीदवार वापस लिया। पर इस पूरे घटनाक्रम से एनसीपी नेता नाराज थे। इधर दिल्ली में राहुल गांधी ने एक दिन कह दिया कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र सरकार नहीं चला रही है इसलिए उसके बारे में वे कुछ नहीं कहेंगे। वे यहां तक कह गए कि उनकी पार्टी सरकार का समर्थन कर रही है। अगले दिन उन्होंने इस पर सफाई भी दी और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बात भी की। इस पूरे समय में पवार से कांग्रेस की दूरी रही। इस दौरान पवार ने राज्यपाल से मुलाकात की और मुख्यमंत्री से मिले पर कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की सूचना नहीं है। कहा जा रहा है कि पवार चाहते थे कि कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व महाराष्ट्र की ओर न देखे और वहां की कांग्रेस भी उनके हवाले कर दे। पर ऐसा नहीं हुआ है। तभी उन्होंने नाराजगी दिखाई है।

दूसरे, पवार को पता है कि इस आलोचना के बाद भी कांग्रेस की मजबूरी है कि उनके साथ रहने की। पर इस बहाने उन्होंने सत्तारूढ़ खेमे में अपना सद्भाव बढ़ा लिया है। वैसे भी नरेंद्र मोदी, अमित शाह आदि नेताओं से उनका सद्भाव है और वे सीधे पवार की आलोचना करने से बचते हैं। प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने शरद पवार के पारंपरिक क्षेत्र बारामती का दौरा किया था और वहां किए गए कामों के लिए पवार की तारीफ की थी। यह भी अनायास नहीं है कि पवार ने राहुल की आलोचना की उससे पहले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा था कि पवार तीन पार्टियों की सरकार नहीं बनाना चाहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि वे भाजपा के साथ सरकार बनाने को राजी थे।

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