suprme court farmers protest किसानों के मामले में अदालत क्यों चुप
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किसानों के मामले में अदालत क्यों चुप?

Court's strange remarks On rape :

suprme court farmers protest सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के बनाए तीन विवादित कृषि कानूनों और उनके विरोध में चल रहे किसानों के आंदोलन पर विचार के लिए तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी। सर्वोच्च अदालत ने 11 जनवरी को इन तीनों कानूनों के अमल पर रोक लगा दी थी और तीन सदस्यों की कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने 31 मार्च को अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी। हालांकि आंदोलन कर रहे किसानों ने इस कमेटी के सदस्यों से मुलाकात नहीं की लेकिन बताया गया कि देश के दूसरे कई किसान संगठनों ने मुलाकात की और केंद्रीय कानूनों के बारे में अपनी राय दी। ऐसा लग रहा था कि अदालत तीनों कानूनों की संवैधानिकता पर विचार करेगी और किसान आंदोलन खत्म कराने का रास्ता भी निकालेगी। लेकिन 31 मार्च से करीब चार महीने बीत जाने के बाद अब तक अदालती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।

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ध्यान रहे अदालत ने तीनों कानूनों के अमल पर रोक लगा रखी है, जिसका मतलब है कि कानून अभी स्थगित हैं। तभी सवाल है कि अगर सरकार को लग रहा है कि देश में कृषि सेक्टर को बेहतर करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए ये कानून जरूरी हैं तो वह क्यों नहीं अदालत से इस पर लगाई गई रोक हटाने को कह रही है? उसने कोरोना महामारी के बीच आपदा को अवसर बनाते हुए अध्यादेश के जरिए इन कानूनों को लागू किया था और बाद में संसद के उच्च सदन में लगभग जोर-जबरदस्ती इस कानून को पास कराया था। वही कानून चार महीने से स्थगित है और सरकार को इसे लागू करने की कोई जल्दी नहीं है। किसान आठ महीने से आंदोलन कर रहे हैं, केंद्र सरकार किसानों से छह महीने से बात नहीं कर रही है, साढ़े चार चार महीने से कानूनों पर रोक है और चार महीने से सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी की रिपोर्ट बंद लिफाफे में अदालत के पास पड़ी है।

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