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स्वतंत्र देव की जगह केशव मौर्य क्यों?

उत्तर प्रदेश में क्या हुआ वह किसी को समझ में नहीं आया। मार्च में चुनाव नतीजे आने और राज्य में दूसरी बार भाजपा की सरकार बनने के दो महीने बाद स्वतंत्र देव सिंह को विधान परिषद में पार्टी का नेता बनाया गया था। पहले खुद योगी आदित्यनाथ विधान परिषद के सदस्य थे तो वे नेता थे। लेकिन इस बार वे विधानसभा का चुनाव लड़ कर जीत हैं तो निचले सदन में नेता हैं। तभी उच्च सदन में स्वतंत्र देव सिंह को बनाया गया। लेकिन दो-तीन महीने में ही ऐसा क्या हो गया कि उनको हटा कर केशव प्रसाद मौर्य को सदन का नेता बनाया गया?

ध्यान रहे दोनों नेता एक ही कुशवाहा मौर्य समाज से आते हैं और स्वतंत्र देव सिंह प्रदेश अध्यक्ष भी थे, लेकिन उनको वहां कार्यकाल पूरा हो गया है और बताया जा रहा है कि जल्दी ही उनकी जगह नया अध्यक्ष नियुक्त होगा। राज्य के संगठन महामंत्री सुनील बंसल को उत्तर प्रदेश से हटा कर राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है। उसके बाद नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति होनी है। सो, एक साथ ही स्वतंत्र देव सिंह नेता सदन और अध्यक्ष दोनों पदों से हट जाएंगे और सिर्फ मंत्री रहेंगे। ध्यान रहे केशव प्रसाद मौर्य पिछला विधानसभा का चुनाव भी लड़े थे और हार गए थे। उस समय ऐसा लग रहा था कि उनको फिर से उप मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाएगा। लेकिन ऐसा लग रहा है कि पार्टी आलाकमान उनका राजनीतिक कद बढ़ाना चाह रहा है। तभी हारने के बाद भी उनको उप मुख्यमंत्री बनाया गया और अब उच्च सदन में पार्टी का नेता भी बनाया गया है। वे योगी के मुकाबले उत्तर प्रदेश में पार्टी का ओबीसी चेहरा हैं।

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