अमरिंदर अगले साल चुनाव कराएंगे क्या?

पंजाब में क्या समय से पहले चुनाव हो सकता है? राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह इस संभावना पर विचार कर रहे हैं। कांग्रेस के जानकार सूत्रों के मुताबिक अभी राज्य में हालात कांग्रेस के अनुकूल हैं। किसानों का आंदोलन चल रहा है। चारों तरफ ब्लैकआउट का अंदेशा है क्योंकि ट्रेनें बंद हैं। किसान किसी हाल में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। दूसरी ओर सरकार भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। केंद्र सरकार किसी हाल में तीनों कृषि कानूनों में कोई बदलाव नहीं करेगी। पंजाब सरकार ने अपने तीन कृषि कानून पास किए हैं लेकिन उनको राष्ट्रपति की मंजूरी मिलनी संभव नहीं है। जब राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री को मिलने का समय ही नहीं दिया तो कानून क्या मंजूर होगा? इसके विरोध में कैप्टेन ने अपने मंत्रियों के साथ दिल्ली में एक दिन का धरना भी दिया था।

तभी ऐसी चर्चा है कि कैप्टेन अमरिंद सिंह समय से पहले चुनाव करा सकते हैं। उनको लग रहा है कि उनको इसका फायदा होगा क्योंकि किसान आंदोलित हैं और किसानों की नाराजगी का प्रतिनिधित्व वे खुद कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने भी किसानों के आंदोलन को कांग्रेस का आंदोलन साबित किया हुआ है। कई बार प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री भी कह चुके हैं कि कांग्रेस किसानों को भड़का कर देश में अस्थिरता पैदा करना चाह रही है। सो, किसानों को भी लग रहा है कि मंडी की व्यवस्था खत्म किए जाने और न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था को बेकार बनाने वाले कानूनों से किसानों को होने वाले नुकसान से कांग्रेस ही बचा सकती है।

अमरिंदर सिंह इस स्थिति का फायदा उठाना चाह रहे हैं। कांग्रेस के जानकार सूत्रों का कहना है कि अगले  साल के शुरू में वे विधानसभा भंग करने का फैसला कर सकते हैं। ध्यान रहे अगले साल पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुड्डुचेरी के चुनाव होने वाले हैं। अप्रैल-मई में इन पांच राज्यों में चुनाव होंगे। कांग्रेस की सोच इन पांच राज्यों के साथ ही पंजाब का चुनाव कराने की है।

कांग्रेस को इसमें यह भी फायदा दिख रहा है कि विपक्ष बिखरा हुआ है। कृषि कानूनों के विरोध में ही अकाली दल ने केंद्र सरकार छोड़ा और एनडीए से बाहर हो गई है। अकाली दल के एनडीए से बाहर होने के बाद भाजपा ने ऐलान किया है कि वह राज्य की सभी 117 सीटों पर लड़ेगी। अकाली दल भी सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और आम आदमी पार्टी भी सभी सीटों पर लड़ेगी। पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा था पर उसके बाद से पिछले साढ़े तीन साल में पार्टी वहां कुछ खास नहीं कर पाई है। सो, चार पार्टियों के सभी सीटों पर लड़ने से चारकोणीय मुकाबला बनेगा। इससे भी अमरिंदर सिंह को अपनी संभावना बेहतर दिख रही है। पिछले चुनाव में उन्होंने कहा था कि यह उनका आखिरी चुनाव है पर लगता नहीं है कि वे अभी इतनी जल्दी राजनीति से दूर होने वाले हैं।

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