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कैंब्रिज से क्या सधेगी विपक्षी राजनीति?

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने लंदन में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। पहले दिन यानी पिछले हफ्ते शुक्रवार को हुए कार्यक्रम में उनके साथ उनकी पार्टी के नेता सलमान खुर्शीद भी शामिल हुए थे। उनके अलावा सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव व मनोज झा भी शामिल थे। इन सब नेताओं की ग्रुप फोटो भी जारी हुई। उसके बाद सोशल मीडिया में इसे लेकर खूब मजाक बना। लोगों ने कांग्रेस, राजद और लेफ्ट नेताओं की समूह फोटो देखने के बाद तंज किया कि कन्हैया कुमार को भी ले गए होते तो उनका भी भाषण हो जाता। भाजपा समर्थकों ने यह सवाल भी उठाया कि क्या कैंब्रिज जैसे महत्व के संस्थान को क्यों भारत की विपक्षी पार्टियों को इकट्ठा करना चाहिए?

इन टिप्पणियों से इतर यह भी सवाल है कि क्या कैंब्रिज में तीन विपक्षी पार्टियों के नेताओं के मिलने और एक साथ कार्यक्रम में शामिल होने और लंबा समय साथ बिताने से भारत की विपक्षी राजनीति में कुछ बदलेगा? ध्यान रहे सीताराम येचुरी के साथ राहुल के अच्छे संबंध थे लेकिन अब सीपीएम की राजनीति अलग हो गई है। सीपीएम केरल में कांग्रेस को हराने के लिए प्रतिबद्ध है तो देश में भी उसके नेता कांग्रेस से अलग मोर्चा बना रहे हैं। इसी तरह बिहार में राजद से भी कांग्रेस का तालमेल टूट गया है। विधानसभा की दो सीटों के उपचुनाव और 24 विधान परिषद सीटों पर दोनों अलग अलग लड़े। राज्यसभा सीट को लेकर भी राजद ने साफ कर दिया है कि दोनों सीटें उसकी हैं। वह कांग्रेस को कोई सीट नहीं देगी। पता नहीं दिल्ली की गर्मी से दूर लंदन के खुशनुमा माहौल में राहुल ने इस बारे में तेजस्वी से बात की या नहीं!

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