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राजरंग| नया इंडिया| opposition common candidate विपक्ष क्या साझा उम्मीदवार दे पाएगा?

विपक्ष क्या साझा उम्मीदवार दे पाएगा?

भाजपा की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवार कौन होगा, इस चर्चा से ज्यादा दिलचस्प स्थिति विपक्ष के उम्मीदवार को लेकर है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विपक्षी पार्टियां साझा उम्मीदवार दे पाएंगी? बताया जा रहा है कि कांग्रेस की ओर से कुछ नेताओं से संपर्क किया गया है लेकिन उन्होंने दो टूक अंदाज में मना कर दिया। उन्होंने कहा कि हारने के लिए चुनाव लड़ने का उनका कोई इरादा नहीं है। पिछली बार कांग्रेस ने बिहार की दलित नेता और पूर्व स्पीकर मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाया था लेकिन वे मुकाबले को दिलचस्प नहीं बना पाई थीं। यहां तक कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी उनको समर्थन नहीं दिया था। उनकी बजाय नीतीश ने एनडीए उम्मीदवार और बिहार के तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ कोविंद को समर्थन दिया।

पिछले चुनाव में राष्ट्रपति के इलेक्टोरल कॉलेज में कांग्रेस के पास 93 हजार वोट थे और उसे एक लाख 52 हजार से ज्यादा वोट दूसरी पार्टियों के मिले थे। फिर भी मीरा कुमार 34 फीसदी वोट ले पाई थीं। इस बार कांग्रेस की स्थिति पिछली बार जैसी ही है लेकिन इस बार उसे दूसरी विपक्षी पार्टियों का वैसा साथ नहीं मिल रहा है, जैसा पिछली बार मिला था। इस बार कई विपक्षी पार्टियां मिल कर अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही हैं। खबर है कि समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और तेलंगाना राष्ट्र समिति एक तीसरा मोर्चा बना कर उम्मीदवार उतार सकते हैं। इन चार पार्टियों के पास कांग्रेस के लगभग बराबर ही वोट है। इसलिए इनकी कोशिश अपने उम्मीदवार को ही विपक्ष का साझा उम्मीदवार बनाने की होगी, जिसके लिए कांग्रेस तैयार नहीं होगी। कांग्रेस और विपक्ष के बीच खींचतान होगी। राष्ट्रपति का चुनाव आमतौर पर पक्ष और विपक्ष में आमने-सामने का होता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह परंपरा कायम रहती है या टूटती है।

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