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राजरंग| नया इंडिया| opposition unite in Tripura त्रिपुरा में क्या विपक्ष एकजुट होगा?

त्रिपुरा में क्या विपक्ष एकजुट होगा?

BJP CM's Controversial Statement :

अगले साल जिन राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं उनमें एक अहम राज्य पूर्वोत्तर का त्रिपुरा है। पूर्वोत्तर में असम के बाद त्रिपुरा दूसरा राज्य है, जहां भाजपा ने चुनाव जीत कर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। उसे तोड़ फोड़ करने की जरूरत नहीं पड़ी। लेकिन स्थिति ऐसी बनीं कि उसे मुख्यमंत्री बदलना पड़ा। पार्टी ने बिप्लब देब को हटा कर राज्यसभा में भेजा है और उनकी जगह कांग्रेस से आए मानिक साहा को मुख्यमंत्री बनाया है। बिप्लब देब के मुख्यमंत्री रहते ही भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टी इंडिजेनस ट्राइबल पार्टी, आईपीएफटी में टूट फूट शुरू हो गई थी। कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में गए नेताओं ने बगावत कर दी थी। पहले वे तृणमूल में गए और बाद में उनमें से कुछ कांग्रेस में वापस लौटे हैं।

अभी कहा जा रहा है कि राज्य में विपक्षी पार्टियों की एकजुटता बन सकती है क्योंकि भाजपा के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। अभी भाजपा के विधायक बरबा मोहन त्रिपुरा ने इस्तीफा दिया और प्रद्योत देब बर्मन की पार्टी तिपरा में शामिल हो गए, जो कि एक आदिवासी पार्टी है। पहले भी भाजपा के तीन विधायकों ने इस्तीफा दिया था, जिनमें से दो कांग्रेस में और एक तृणमूल कांग्रेस में गए। भाजपा की सहयोगी आईपीएफटी से भी एक विधायक ने इस्तीफा दिया था और प्रदोत देब बर्मन की पार्टी तिपरा ज्वाइन किया था। ध्यान रहे राज्य में लगातार 25 साल तक लेफ्ट का शासन रहा था और पिछली बार चुनाव हार कर पार्टी सत्ता से बाहर हुई थी। सो, अभी पार्टी के नेता सत्ता में वापसी के लिए हर संभावना तलाश रहे है। कहा जा रहा है कि लेफ्ट, कांग्रेस और तिपरा का तालमेल हो सकता है। अगर इन तीनों पार्टियों का तालमेल हुआ तो त्रिपुरा में चुनावी तस्वीर बदल सकती है।

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