winter session of Parliament इस सत्र में विपक्ष बिखरा रहेगा
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इस सत्र में विपक्ष बिखरा रहेगा

Parliament building completed

संसद के शीतकालीन सत्र से पहले कांग्रेस पार्टी विपक्षी एकता बनाने की कोशिश कर रही है लेकिन यह काम अब मुश्किल हो गया है। वैसे संविधान दिवस के बहिष्कार में सभी पार्टियां साथ रहीं लेकिन विपक्ष की पार्टियों के बीच अविश्वास इतना बढ़ गया है कि संसद के अगले सत्र में विपक्ष बिखरा ही रहेगा। पांच राज्यों के चुनाव की वजह से भी विपक्षी पार्टियों में एकता नहीं बन पाएगी क्योंकि कई राज्यों में पार्टियां एक-दूसरे को चुनौती दे रहे हैं इसलिए संसद में वे साथ काम करते नहीं दिख सकती हैं। winter session of Parliament

तृणमूल कांग्रेस ने ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षा और उनके चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर के आहत अहं के चलते कांग्रेस को कई जगह तोड़ दिया है। असम में सुष्मिता देब, मेघालय में मुकुल संगमा, गोवा में लुइजिन्हो फ्लेरियो, बिहार के कीर्ति आजाद आदि नेताओं को कांग्रेस से तोड़ कर तृणमूल ने अपने यहां भर्ती किया है। हरियाणा के अशोक तंवर भी तृणमूल में गए हैं लेकिन वे पहले ही कांग्रेस से अलग हो गए थे। तृणमूल की इस राजनीति के बाद कांग्रेस के लिए उसके साथ मिल कर चलना मुश्किल होगा।

कांग्रेस की मुश्किल इतनी ही नहीं है। उसकी कई सहयोगी पार्टियां तृणमूल के साथ जाने को इच्छुक दिख रही हैं। जैसे गोवा में एनसीपी ने तृणमूल के साथ जाने का मन बनाया है क्योंकि कांग्रेस एनसीपी को ज्यादा सीट देने को राजी नहीं है। ममता बनर्जी अगले हफ्ते मुंबई के दौरे पर जा रही हैं तो वे शिव सेना नेता उद्धव ठाकरे और एनसीपी के शरद पवार से मिलेंगी। इस पवार से मुलाकात में गोवा की राजनीति पर चर्चा हो सकती है। इससे कांग्रेस और उसका साथ छोड़ कर गए पुराने नेताओं के बीच अविश्वास हो गया है। सब कांग्रेस की कमजोरी पर अपनी राजनीतिक फलते-फूलते देख रहे हैं।

इस बीच अगले साल फरवरी-मार्च में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं, जिसमें कई विपक्षी पार्टियां अलग अलग ताकत आजमा रही हैं। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का मुख्य मुकाबला भाजपा से है लेकिन कांग्रेस पार्टी अकेले लड़ती दिख रही है, जिससे सपा को भी नुकसान हो सकता है। सो, संसद में दोनों पार्टियों का साथ नहीं दिखेगा। बसपा वैसे भी विपक्षी पार्टियों के साथ नहीं रहती है। बिहार में कांग्रेस का अपनी सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल से तालमेल खत्म हो गया है। आम आदमी पार्टी में यूपी में सपा के साथ लड़ना है और पंजाब में भी कांग्रेस के खिलाफ लड़ना है। इसलिए उसके सांसद भी कांग्रेस के साथ नहीं दिखना चाहेंगे।

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