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इस हमाम में सभी नंगे

इस धर्म प्रधान देश के इतिहास में शायद पहली बार हिंदुओं के साधू संतों के किसी संगठन ने फर्जी बाबाओं की सूची जारी की है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने इलाहाबाद में अपनी कार्यकारणी की बैठक के बाद जो सूची जारी की है उसमें 14 फर्जी बाबाओं के नाम है। सुखविंदर कौर उर्फ राधे मां, सच्चिदानंद गिरी उर्फ सचिन दत्ता, गुरमीत राम रहीम, ओम बाबा उर्फ विवेकानंद झा, निर्मल बाबा उर्फ निर्मलजीत सिंह इच्छाधारी भीमानंद उर्फ शिव मूर्ति द्विवेदी, स्वामी असीमानंद उर्फ ऊं नमः शिवाय बाबा, नारायण सांई, रामपाल, खुशी मुनि, ब्रह्मपति गिरी, मलकान गिरी आदि शामिल है। 

यह सूची देखकर ऐसा लगता है कि मानो मुंबई पुलिस ने मफियाओं के नाम जारी किए हो। जेसे मुन्ना पैंटल, पप्पू छुरीबाज, पप्पू तड़ीपार आदि। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी ने यह सूची जारी करते हुए कहा कि काफी दिनों से फर्जी बाबाओं द्वारा बलात्कार, शोषण और देश की भोली भाली जनता को ठगने की खबरें आती रही है। कई बाबाओं के खिलाफ तो देश की अदालते भी फैसला दे चुकी है। ऐसे में हिंदू धर्म व संत समाज की बदनामी होती है। इसलिए परिषद ने फैसला किया है कि वह स्वयं फर्जी बाबाओं की सूची जारी कर दें। ताकि जनता सचेत रहे। 

अखाड़ा परिषद में 13 अखाड़े शामिल है जिनके 26 सदस्य उनका प्रतिनिधित्व करते हैं। परिषद ने संत की उपाधि देने के लिए एक प्रक्रिया भी तय कर दी है। विश्व हिंदू परिषद के महासचिव सुरेंद्र जैन के मुताबिक अब जांच पड़ताल के बाद ही किसी को संत की उपाधि दी जाएगी। अखाड़ा परिषद के बारे में बात करने के पहले जरा इन बाबाओं और उनका प्रचार करने वाले मीडिया पर भी चर्चा करनी जरूरी हो जाती है। 

सबसे बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि आखिर इन फर्जी बाबाओं को समाज में स्थापित कौन कर रहा है? मेरा मानना है कि अगर बाबा फ्राड कर रहा है तो मीडिया उसकी पूरी मदद कर रहा है। सबको पता है कि निर्मल बाबा तो बेवकूफ बनाने के लिए भी फीस लेता है और बड़े गर्व के साथ कहता है कि मैं किसी के पास नहीं जाता। लोग खुद महीनो पहले मेरे समागम की टिकट खरीद कर हजारो किलोमीटर दूर से मेरे दर्शन करने आते है। 

जलेबी खिलाने और काला, पीला पर्स रखकर सभी समस्याओं से निजात दिलवाने की बात करने वाले इस बाबा के बारे में इतना कुछ छापा गया मगर आज भी लगभग हर बड़े, छोटे खबरिया चैनल पर उसका प्रायोजित कार्यक्रम दिखाया जाता है। एक तरफ से चैनल आसाराम बापू या राम रहीम के फर्जीवाडे व अपराधारों के किस्से दिखाने का श्रेय लेने के लिए अपनी पीठ खुद थपथपाते है और दूसरी और निर्मल बाबा से लेकर दर्जनों तथा कथित वैद्यो, फॉर्मेसियो के स्वयंभू डाक्टरों का कार्यक्रम दिखाते हैं जिससे हर रोग से मुक्ति दिलाने की बात कही गई होती है। 

आज सारे चैनल व अखबार बाबा रामदेव के मुरीद बने हुए हैं। वह कैंसर का उपचार करने का दावा करते है मगर उसकी नई दुकान (प्रयोगशाला) का उद्घाटन होता है तो हर चैनल का प्रमुख कर्ताधर्ता बाबा का इंटरव्यू लेने पहुंच जाता है। उसके माल का उद्घाटन करने खुद प्रधानमंत्री जाते हैं। ऐसे में आम जनता के बीच क्या संदेश जाता है? भोली-भाली  या मूर्ख व लालची जनता तो यही मानकर चलेगी कि जब उसके कार्यक्रम में इतने खबरिया चैनलों के वरिष्ठतम पत्रकार जा रहे है। प्रधानमंत्री तक मौजूद हो तो कुछ तो उस बाबा में दम होगा ही। 

एक चैनल ने तो बाबाओं को ही बेचकर अपना साम्राज्य खड़ा किया। इतना शक्तिशाली बन गया कि एक समन जाते ही प्रधानमंत्री तक उसकी अदालत में पहुंच जाते हैं। सांप, छछूंदर, तंत्र- मंत्र, जंतर मंतर व बाबाओं को स्थापित करके उसने देश में सबसे ज्यादा टीआरपी जुटाने का गौरव हासिल किया था। जब पहली बार निर्मल बाबा विवाद में फंसा तो देश के सबसे तेज चैनल ने उसका इंटरव्यू किया और ऐसे सवाल पूछे जिससे बाबा अपने को पाक साफ साबित कर सके। 

कुछ समय पहले तक तो सभी खबरिया चैनल राम रहीम के मुरीद थे। आज भी वे बड़ी बेशर्मी के साथ पहले लिए गए उसके इंटरव्यू दिखा रहे हैं। आज उसके जिन जवाबों के लिए उसका मखौल उडा रहे हैं। कुछ समय पहले उन्हीं जवाबों को बड़े सम्मान के साथ दिखाया गया था। 

चैनल तो चैनल है मगर अखबार भी कहां पीछे है। देश के सर्वाधिक सर्कुलेशन का दावा करने वाले दो अखबारों ने तो हद कर रखी है। राम रहीम का खुलासा होने के बाद इनमें से एक ने विशेष परिशिष्ट निकाल कर अपने पाठको को जागरूक करते हुए बताया कि किस तरह से यह बाबा लोग अपनी झूठी शक्तियों का बढ़-चढ़कर प्रचार करते हैं। जनता को यह बताते है कि उनके पास तंत्र मंत्र की शक्ति है। इसके साथ ही उसी अखबार में अंदर के पृष्ठों पर पूरे एक पेज में ग्रेट बाबा गुलशनजी सम्राट  बाबा मूसा खान बंगाली बाबा आमिल सूफी सरीखे बाबाओं के विज्ञापन छपे हुए थे जिनमें सौतन से छुटकारा पाने से लेकर, वशीकरण, मुठकरनी, मनचाहा प्यार पाने, गड़ा धन हासिल करने के लिए विज्ञापन छापे गए थे। 

उनमें कहा गया था कि ए टू जैड तक हर समस्या का समाधान। आखिर मीडिया पहले पृष्ठ पर बाबाओं से सावधान रहने और अंदर के पृष्ठ पर उनका विज्ञापन छाप कर किसे बेवकूफ बनाना चाहती है? जब देश के जाने माने अभिनेता सलमान खान द्वारा प्रस्तुत बिग बॉस में चोर भाईसाहब बंटी चोर, बाबा ओमजी को आमंत्रित कर उन्हें लाखों रुपए की थैली थमा कर उन्हें जनता में स्थापित करने की कोशिश की जाएगी तो समाज तो उनका शिकार बनेगा ही। मुझे तो लगता है कि बिग बॉस के अगले सीरीज में हनीप्रीत को आमंत्रित करने के लिए सलमान खान ने तैयारी शुरू कर दी होगी। हालांकि उनकी पहली पसंद बाबा राम रहीम होगा मगर कभी वह पैरोल पर छूटा तो बिग बॉस के पे रोल पर चला जाएगा।

यहां यह सवाल भी पैदा होता है कि सीबीआई या इंटरपोल की तरह बाबाओं की काली सूची जारी करने वाली अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की अपनी वैधता क्या है? अखाड़ा परिषद खुद गुटबाजी का शिकार है। राम जन्म भूति का मुकदमा लड़ने वाला व इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा एक तिहाई भूमि का मालिक घोषित किया जाने वाला निर्मोही इसमें शामिल नहीं है। अखाड़ा परिषद का विश्व हिंदू परिषद से कुछ लेना देना नहीं है। उसके द्वारा जारी सूची में उस सच्चिनानंद गिरी उर्फ सचिन दत्ता का नाम भी शामिल है जिसे उसके अध्यक्ष महेंद्र गिरी की देखरेख में इलाहाबाद में महामंडलेश्वर बनाया गया था। 

बाद में गिरी ने पूरे मामले से यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया था कि उन्हें उसके बारे में सही जानकारी नहीं दी गई थी। सचिन पर एनसीआर में जमीनों खरीद फरोख्त करने के अवैध हथकंडे अपनाने का आरोप है। बाद में अखाड़ा परिषद ने उसकी यह उपाधि वापस ले ली थी। सवाल तो यह है कि आखिर अखाड़ा परिषद की अपनी विश्वसनीयता क्या है? उसे कौन मान्यता देता है। सूची में शामिल बाबा अगर यह पूछे कि अखाड़ा परिषद उन्हें फर्जी करार देने वाली कौन होती है तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

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