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ब्राजील के लूला, अपने लालू जैसे!

विवेक सक्सेना
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जब ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति व इस साल अक्तूबर माह में वहां होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार लुइज इनेसियो डासिल्वा उर्फ लूला के जेल जाने की खबर पढ़ी तो लगा दुनिया वास्तव में कितनी छोटी है। जो हमें भारत में देखने को मिलता है वहीं सबकुछ हमें दक्षिण अमेरिका के सबसे बड़े देश में भी देखने को मिल जाता है। 

संयोग से लूला 72 साल के हैं और लालू यादव कुछ साल ही बड़े हैं। वे दो बार ब्राजील के राष्ट्रपति रह चुके हैं। उनकी गिनती वहां के सबसे लोकप्रिय नेताओं में की जाती है। इस देश की राजनीति भी हमारे देश से कुछ सीमा तक मिलती जुलती है। जैसे कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में सरकार किसी की भी बने देश के जाने-माने उद्योगपतियों की उस पर पूरी पकड़ रहती है। 

हमारी तरह वहां के चुनावों में भी भ्रष्टाचार पनपता है। यहां चुनाव में पैसा व शराब बाटने की खबर आती है तो वहां के चुनावों में सीधे पैसा बांटा जाता है। इस देश में 36 राजनैतिक दल है व इनमें से अधिकांश अपने उम्मीदवार सिर्फ वोट काटने या ब्लैकमेल करने के लिए खड़ा करते है। प्रतिस्पर्धी से पैसे लेकर फिर उन्हें बैठा देते है। वैसे मौजूदा सरकार में चार प्रमुख पर्टियों की हिस्सेदारी है। वहां दशकों से गठबंधन सरकार सत्ता में चली आ रही है व अक्सर सरकार बचाने के लिए सांसदों (कांग्रेंसमैन) को पैसे देने पड़ते हैं। उनको मंत्री बनाना पड़ता है व उनके हितो को देखना पड़ता है।

वहां के सांसद आए दिन दलबदल करते हैं।  अक्सर कोई विधेयक तो बिना चर्चा के ही पारित कर दिया जाता है क्योंकि सांसद पिछली रात संतुष्ट किए जा चुके होते हैं। नवीनतम मामला 7 अप्रैल का है। देश के सबसे लोकप्रिय नेता लूला को भ्रष्टाचार के आरोप में वहां की सुप्रीम कोर्ट द्वारा 22 साल की सजा देकर जेल भेजे जाने की घटना है। 

लूला ने सजा सुनते ही भारतीय नेताओं की तरह बयान दिया कि यह सब तो मुझे चुनाव लड़ने से रोकने की चाल है। अगर मेरे बिना चुनाव होते हैं तो वे बेमानी साबित होंगे। ध्यान रहे कि वे दो बार देश के राष्ट्रपति रह चुके हैं। इस देश के पहले राष्ट्रपति जिन्होंने जीत का रिकार्ड बनाया था भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजे गए। जिस भ्रष्टाचार के मामले में लूला को जेल भेजा गया है वह काफी पुराना है। इसे काटा वाश कांड के नाम से जाना जाता है। 

हुआ यह कि इस देश के बहुत बड़े उद्योगपति की कंपनी ने देश की सरकारी तेल कंपनी पेट्रोडास (हमारी इंडियन ऑयल) से देश भर में उसके पेट्रोल पंप बनाने के लिए ठेके लिए। इसके बदले में तमाम दलो के नेताओं को मोटी रिश्वत दी गई। यह रिश्वत 8 अरब डालर की थी। इतनी बड़ी राशि को बांटने के लिए उस कंपनी को अपना एक विभाग अलग से खोलना पड़ा। 

ज्यादा पैसा विदेश में खातों में जमा करवाया गया। लूला के पैसे के अलावा देश में समुद्र तट पर बहुत महंगा फ्लैट भी खरीद कर दिया गया। कंपनी के मालिक ने कहा कि वह देश के 30 फीसदी सांसदों को पैसा देता है। उनकी कंपनी पर ब्राजील, स्विट्जरलैंड व अमेरिका समेत 12 देशों की सरकारों को ठेके के बदले रिश्वत देने के आरोप है। इस कंपनी के तमाम बड़े अधिकारियों ने प्लीडील के तहत रिश्वत देने का खुलासा किया। 

करीब 100 लोगों को दोषी पाया गया है इनमें से प्लीडील करने वालो को चंद माह से लेकर चंद साल तक की सजा दी जाएगी। ब्राजील के मौजूदा राष्ट्रपति के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के मामले चल रहे हैं। इसके चार राष्ट्रपतियों पर महाभियोग के मामले चल चुके हैं। अगर संसद अनुमति दे देती है तो  लूला पर भी भविष्य में चुनाव न लड़ने की रोक लगाई जा सकती हैं। 

पिछले साल ही वहां भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारण छह मंत्री हटाए गए थे। आधे सांसदों पर किसी-न-किसी मामले में मुकदमें दर्ज हैं। यह खुलासा इतना बड़ा था कि शेयर बाजार में 30 से 60 फीसदी गिरावट हुई व कंपनी को अपने 1 लाख कर्मचारियों की छुट्टी करनी पड़ी। इसी पेट्रोल स्टेशन निर्माता कंपनी को पिछले साल यूरोपियन यूनियन ने ब्लैक लिस्ट कर दिया था क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी मीट व पोल्ट्री निर्यातक कंपनी होने के बावजूद उसने अपने देश के फूड इंस्पेक्टरों को रिश्वत खिला कर पुराना मीट यूरोपियन यूनियन को सप्लाई कर दिया था। 

असल में इस देश में 1988 से चुनाव हो रहे हैं। पहले वहां इंडियन आदिवासी रहते थे। सन 1300 में एक पुर्तगाली ने ब्राजिल की खोज की व फिर उस पर पुर्तगाल का राज हो गया। इन लोगों ने वहां सोने की खोज की व जमीन उपजाऊ होने के कारण गन्ने समेत तमाम फसलों की खेती की। वे अफ्रीका से गुलाम मजदूर लाए। वहां गुलामी प्रथा 1988 में समाप्त हुई। वहां के लोगों ने खुद को पुर्तगाल से अलग कर दिया। आज वहां पुर्तगाली राष्ट्रीय भाषा है व इसके बोलने वाले ज्यादातर गोरो का राज है। उनके पास संसद की 70 फीसदी सीटे है व 30 फीसदी सीटे मूल ब्राजीलवासियों व अफ्रीकी व ब्राजीलो के मिलने से बनी जनसंख्या के पास है। इन्हें भूरे या काले कहा जाता है। इनमें से 51 फीसदी लोग गरीब है व 41 फीसदी राजनीति की रूचि नहीं रखते हैं। वहां के 70 फीसदी गोरे अमीर है। 

वहां के लोग अंग्रेजी पढ़ते तो है पर न बोल पाने के कारण देश के बाहर नहीं जा पाते। वहां के लूला ने 10 साल के होते-होते पढ़ाई छोड़ दी थी व जूते पालिश करने लगे। मजदूरी करते हुए मशीन में हाथ आने से उनकी एक उंगली कट गई। एब बार तो लोगों ने एक जोकर को महज इसलिए सांसद बना दिया क्योंकि उसका कहना था कि मैं मौजूदा सांसदों से ज्यादा बुरा नहीं हो सकता हूं। वहां की संसद कांग्रेंस को कैंसर मानने वाले देश में लोगों की आम राय है कि हमारे नेता पहले जीतने की सोचते हैं और फिर एजेंडा तय करते हैं। वहां हर सरकारी काम में 30 फीसदी कमीशन खोरी होती है।

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