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खतरा तो अपनो से ही

विवेक सक्सेना
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अक्सर लगता है कि हमारे पूर्वज बहुत समझदार थे क्योंकि वे किस्से कहानियों के जरिए हमें राय दे जाते थे। चाहे हिंदू धर्म हो या इस्लाम सबमें मौसम बदलते समय लंबे व्रतो का प्रावधान है। हिंदू नवरात्रि मनाते है तो मुसलमान रमजान मनाते हे जिसमें लंबी अवधि तक बिना अन्न खाए रहना पड़ता है। इसकी असली वजह है कि इस दौरान बहुत कम खाकर शरीर को बदलते मौसम के अनुकूल बनाना होता है। 

अंग्रेंजी की एक कहावत है कि जिन महीनो में 'आर' अक्षर न आता हो उन दिनों मछली नहीं खानी चाहिए। ध्यान रहे कि मछलियां मई से अगस्त के दौरान अंडे देती हैं व उनके बच्चे बड़े होते हैं। इसकी वजह से उनकी संख्या बनाए रखी जाती है। इस्लाम में पीपल के पेड़ के बारे में कुछ नहीं लिखा है इसके बावजूद मुसलमान तक पीपल का पेड़ नहीं काटते हैं। ध्यान रहे कि पर्यावरण की दृष्टि से यह पेड़ बहुत अच्छा होता है क्योंकि व 24 घंटे आक्सीजन देता है। 

सफेद रंग के कपड़ों का हर धर्म में महत्व है। हिंदू पूजा के दौरान, मुसलमान हज के दौरान, ईसाई विवाह के दौरान व जैनी साधु हमेशा सफेद कपड़े पहनते हैं। कई बार मुझे लगता है कि पंचतंत्र की कहानियों की तरह हमारी दो महान गाथाएं जोकि सबसे पुरानी ही है इसी को ध्यान में रखते हुए लिखी गई थी। पंचतंत्र की तो हर कहानी के अंत में एक शिक्षा होती थी। इसमें कहानी के जरिए जीवन के विभिन्न सत्यों को आसानी से समझाया जाता था। जैसे कि लालच करना बुरी बात होती है। 

अगर ध्यान दे तो रामायण और महाभारत सरीखे ग्रंथों में हमारे पूर्वजों ने हजारों साल पहले वह सब लिख डाला था जोकि आज घटित हो रहा है। रामायण या रामचरित मानस पर अगर ध्यान दे तो पता चलता है कि वह एक अच्छी हिंदी फिल्म की तरह है। जिसमें दृष्य है। एक्शन है, रोमांस है जैसे कि सीता का फुल चुनने जाते समय वाटिका से राम से मिलना एक हीरो राम है, हीरोइन सीता है व एक बड़ा सा खलनायक रावण है जो कि बेहद शक्तिशाली व विशाल है। वह तो राम से युद्ध करता है मगर कमजोर होने के बावजूद  अततः राम की जीत होती है। 

यही सब कुछ महाभारत में भी है। वहां कौरवों व पांडवों के बीच लड़ाई होती है। दुर्योधन भरी सभा में अपनी भाभी की साड़ी खोलने की कोशिश करता है। ठीक वैसे ही जैसे कि अनुनिक मसाला फिल्मो में विलेन नायिका के साथ करता है। राम की तरह पांडवों को भी काफी कष्ट झेलने पड़ते हैं। मगर अंत में उनकी जीत होती है। एक्शन के लिए लाक्षाग्रह है युद्ध है। 

अगर और गहराई में जाएं तो पता चलता है कि इन दोनों ग्रंथों से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमेशा हीरो कितना ही विलेन के मुकाबले कमजोर क्यों ना हो अंततः सच व झूठ की लड़ाई में हीरो ही जीतता है। एक शिक्षा मैं उसमें और देखता हूं। वह यह कि कोई कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो उसकी बर्बादी का कारण उसका सबसे करीबी ही बनता है। खासतौर से उसका भाई। रामायण में कैकेई द्वारा उनके भाई व अपने बेटे भरत को राजा बन जाने के लिए अड़ जाने व वर मांगने के कारण राम को लक्ष्मण व सीता सहित बनवास झेलना पड़ा। 

उस जमाने में भी सीता सरीखी महिलाएं जिद्द करती थी। सीता के अपहरण की वजह भी सोने के हिरण को मारने की जिद किया जाना रहा। इसी तरह महाभारत में द्रौपदी भी अपने परिचितो के बारे में कटु वचन बोलने से बच नहीं पाई। जब दुर्योधन नकली पानी में गिरते हुए बचा तो द्रौपदी ने यह कह कर उसका उपहास उड़ाया कि अंधे को बेटा अंधा। ध्यान रहे कि दुर्योधन के पिता धृतराष्ट्र नेत्रहीन थे। इस तरह के बर्ताव की तो किसी सभ्य समाज में कल्पना तक नहीं की जा सकती है। 

यही वजह थी कि इस अपमान व पीड़ा के चलते हुए दुर्योधन ने भाईयों से जुएं में जीत जाने के बाद द्रौपदी का भरी सभा में चीरहरण किया। वह तो कृष्ण थे जिन्होंने उसकी इज्जत बचा ली। दोनों ही कहानियो की सबसे अहम शिक्षा यह है कि वहां भाईयों की मौत की वजह भाई ही बने। रावण तो जबरदस्त पूजा-पाठ करता था। उसकी नाभि में अमृत था। अंत में सत्ता पाने के लालच में उसके दुखी भाई विभीषण ने पाला बदल कर राम को सलाह दी कि जब तक वे उसकी नाभि में तीर नहीं मारेंगे वह नहीं मरेगा। 

रावण मरा और फिर विभीषण राजा बना। महाभारत में पांड़वों ने कौरवों को मारा जो कि उनके भाई थे। कृष्ण ने तो दोनों और ही आग में घी डालने का काम किया। इसलिए जब अखबारों में भाई द्वारा भाई को मारने वाली घटनाओं के बारे में पड़ता हूं तो मुझे अपना धर्म व इतिहास नजर आ जाता है। नवीनतम  मामला मॉडल टाउन इलाके में पार्किंग में विवाद को लेकर आपसी गोलीबारी में दो सगे भाईयों व एक की पत्नी के मारे का है। वे दोनों ही करोड़पति थे मगर चंद गज की पार्किंग को लेकर एक दूसरे की जान ले ली। 

इससे पहले राजग सरकार में सर्वशक्तिमान माने जाने वाले प्रमोद महाजन को उनके ही सगे छोटे भाई ने गोली मार दी। पोंटी चड्डा तो इस देश का निर्विवाद शराब का ठेकेदार था। उत्तर प्रदेश सरीखे देश के सबसे बड़े राज्य में सरकारें बदलती मगर उसकी शर्तो पर ठेके चलते रहते। दिल्ली समेत देश में उसके पास हजारों एकड़ जमीन व मॉल थे। मगर दिल्ली के महज 10 एकड़ के एक फार्म हाउस को लेकर उसकी अपने सगे भाई से अनबन हो गई व आपसी गोलीबारी में दोनों मारे गए। पता नहीं यह बात हमारे सरीखे आम आदमी की समझ में क्यों नहीं आती है।

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