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दारू बिन सब सून!

विवेक सक्सेना
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जब 1980 के दशक में दिल्ली आया था तब आम तौर पर यह देखा जाता था कि अगर आपको किसी को खाने पर बुलाना हो तो उसके लिए नॉन वैज व ड्रिक्स का प्रबंध करना जरूरी हो जाता था वरना खाने पीने वाले उसे खाना ही नहीं मानते थे। उन दिनों आम तौर पर शादियों में शराब और मांसाहार नहीं मिलता था। फिर अपने जैन व ब्राह्मण दोस्त भी शादी के कुछ दिन पहले परिवार के बुजुर्गो से छुप कर विशेष दावतें देने लगे जिनमें खुलकर शराब व मांसाहार चलता था। 

मुझे याद है कि एक बार पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कांग्रेंस कवर करने वाले पत्रकारों को खाने पर बुलाया। उन दिनों वे पार्टी में ही थे। जबरदस्त ठंड पड़ रही थी। पत्रकारों ने आग तापते हुए काफी देर तक कुछ आने का इंतजार किया। जब गिलास नहीं आए तो वे आपस में चर्चा करने लगे और फिर एक पत्रकार ने बहुत हिम्मत करके बेशर्मी के साथ उनसे पूछ ही लिया कि दादा दारू कहां है? इतनी सर्दी में हम सबकी हालत खराब हो रही है। 

गुस्से के कारण प्रणव मुखर्जी का चेहरा लाल हो गया और उन्होंने उसे लगभग डांटते हुए कहा कि यह कोई ठेका नहीं है। जिसे खाना खाना हो खाए वरना अपने घर जाए। मुझसे आज के बाद ऐसी बात नहीं करना। सब पत्रकार घबरा गए और चुपचाप खाना खाकर वहां से खिसक लिए। यह बात इसलिए याद आ गई कि आज एक अखबार में पढ़ने को मिला कि इस देश के सबसे रईस उद्योगपति रिलायंस ने अपने बेटे की शादी अपने राज्य गुजरात में महज इस लिए नहीं रखी क्योंकि वहां नशाबंदी के कारण मेहमानों को शराब नहीं परोसी जा सकती थी।

देश के एक जाने-माने अखबार में छपा था कि गुजरात के शाही परिवार के लोगों ने जो कि अब पर्यटन के धंधे में है, आरोप लगाया है कि नशाबंदी के कारण वहां पर्यटन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। उन्होंने वहां इस कानून में ढील दिए जाने की मांग की। यह बात फिक्की महिला संगठन के अहमदाबाद चैप्टर के पर्यटन पर आयोजित सम्मेलन में महारानी राधिका राजे गायकवाड़ ने कही जो कि पर्यटन के धंधे में है व वडोदरा स्थित उनके लक्ष्मी विलास महल से मुकेश अंबानी के बेटे आकाश अंबानी का विवाह होना था। 

उन्होंने कहा कि हर महोत्सव में एल्कोहल की अपनी अहमियत होती है व अंबानी ने महज इस पर प्रतिबंध के कारण यह जगह छोड़ दी वरना यहां बेहतरीन सुविधाएं व सेवाएं उपलब्ध थीं। उनकी बात का राज्य की अन्य आठ पूर्व महारानियों ने भी समर्थन करते हुए कहा कि नशाबंदी के कारण उनका व्यापार बहुत ज्यादा प्रभावित हो रहा है व राज्य के मारवाडि़यो व जैनियो के अलावा वहां कोई अन्य शादी नहीं करता है। हम उन विदेशियों को कैसे आकर्षित करे जो कि हाथ में बियर का गिलास लेकर बात करते हैं। 

कच्छ के शाही परिवार की कैटी का कहना था कि 1971 में प्रिवीपर्स समाप्त कर दिए जाने के बाद हम पूर्व राजाओं के जीवन यापन का कोई साधन नहीं रहा। उनके परिवार को 2001 के भूकंप के बाद ना चाहते हुए भी मुंबई में बसने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि यहां शराबबंदी के कारण धंधे का मौका नही हैं। भुज के सारे पारसी परिवार वहां से गायब हो चुके हैं।

शराब सेहत के लिए भले ही खराब मानी जाती हो पर इसका दुनिया में अपना ही महत्व है। कहावत है कि दुनिया का सबसे पुराना पेशा वेश्यावृति व सबसे पुराना पेय शराब है। इस्लाम, जैन, बौद्ध व सिख धर्म में भले ही इसके सेवन पर रोक लगी हो मगर सच्चाई कुछ और ही है। माना जाता है कि ईसा से हजारो साल पहले दुनिया में शराब उपलब्ध थी। 

आज से 2000 साल पहले ग्रीस से इसे शहद व पानी से बनाते थे। हमारे दो सबसे पुराने ग्रंथो रामायण व महाभारत में शराब का जिक्र मिलता है। करीब 1700 ईसा पूर्व लिखे गए ऋग्वेद में भी शराब का जिक्र मिलता है। आयुर्वेद में तो इसका इस्तेमाल त्वचा व शरीर को सुन्न करने के लिए किया जाता था। हिंदू धर्म में यह सुरा व सोमरस के नाम से मशहूर थे इसे चावल गेहूं, गन्ने, अंगूर व फलों से तैयार किया जाता था। 

इतिहास बताता है कि युद्ध करने वाले क्षत्रिय फलो से तैयार शराब पीते थे जबकि किसान अपने समारोहों में इसका सेवन करते थे। इंद्र को तो शराब विशेष रूप से पसंद थी। शिव पर तो नशे के उनके शौक के कारण धतूरा व भांग चढ़ाई जाती थी। सुश्रुत संहिता में तो सोमरस की विशेषताएं में कहा जाता है कि सोम नामक पेड़ के मीठे रस से तैयार शराब को पीकर ब्राह्मण सीधे देवताओं से जुड़ जाते थे उन्हें दैवीय शक्ति हासिल हो जाती थी। शुक्रदेव को तो सुरा विशेष रूप से पसंद थी। असुरो के इस गुरू के कारण ही हिंदुओं में सुरा व सुंदरी नामक मुहावरा प्रचलित हुआ।

कौटिल्य के अर्थशास्त्र के मुताबिक मौर्य शासनकाल में शराब पर टैक्स लगाकर राजस्व एकत्र किया जाता था। वाल्मिकी रामायण के मुताबिक जब सीता वनवास से वापस अयोध्या लौटी थी तो उन्होंने गंगा नदी पर 1000 लौटे सुरा व मीट के साथ पकाया गया चावल चढ़ाया था। भारत के मुगलों व अंग्रेंजो के शासन काल में भी शराब का सेवन काफी तेजी से बढ़ा। बाबर शराब नहीं भांग का नशा करता था। कई बार तो वह इतना नशा कर लेता कि कई दिन दरबार ही नहीं आ पाता था। 

अकबर भांग खाता पर उसने विदेशियों को शराब पीने की छूट दे रखी थी। शाहजहां शराब पीता था जबकि उसका बेटा औरंगजेब शराब को हाथ भी नहीं लगाता था। मगर उसकी बहन जहांआरा शराब पीती थी। इस देश में पुर्तगाली शासन के दौरान गोवा व महाराष्ट्र में काजू के फल से फैनी बनाना सीखा गया क्योंकि उनके यहां इसी से शराब बनाई जाती थी। 

जब ब्रिटेन ने अपना उपनिवेशवाद फैलाया तो वे बियर बनाने वाले हाप्स लेकर आए। उन्होंने शराब बनाने वाली टोडी पर कर लगाया। हमारे देश में आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात मणीपुर व नगालैंड में नशाबंदी पर रोक है मगर वहां क्या होता है सबको पता है। पाकिस्तान तो इस्लामी देश है जहां कानूनन मुसलमानों के शराब पीने व खरीदने पर रोक है। वहां एशिया की सबसे प्रसिद्ध मरी डिस्टलरी है जिसकी चार शाखाएं दबा कर हर तरह की शराब बनाती है। पहले इसके मालिक जलियावाला कांड के खलनायक डायर का पिता था। अब इसके मालिक इसफनयार भंडारा है जो कि पारसी है। 

वे दुनिया की एकमात्र 20 साल पुरानी माल्ट व्हिस्की बनाते है जिसका नाम रेयरस्ट माल्ट व्हिस्की है। वहां की 97 फीसदी जनसंख्या मुसलमान है जो कि शराब पीना तो दूर रहा खरीद भी नहीं सकता है। भंडारा के मुताबिक उनकी 97 फीसदी शराब मुसलमान ही खरीदते हैं। इस्लाम में शराबी मुसलमान को 80 कोड़े मारने की सजा है जोकि आज तक वहा किसी को नहीं मिली। इस इस्लामी देश में आतंकवादियों के हावी रहते शराब पानी की तरह पी जाती है। 

वहां कानून गैर इस्लामी ही शराब खरीद सकते हैं। वहां विदेशियों और गैर-इस्लामियो के लिए जगह-जगह दुकाने है व होटल में आरास से शराब मिल जाती है। मुझे लगता है कि शायद तमाम इतिहास को ध्यान में रखते हुए हाल में भाजपा में शामिल हुए नरेश अग्रवाल ने कहा था कि राम को रम पसंद है। जब काशी के भैरव मंदिर से लेकर दिल्ली के पुराना किला स्थित भैरव मंदिर में शराब चढ़ती हो तो उसके नाम पर नाक क्यों सिकोड़ी जाए?

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