Loading... Please wait...

शिव मंदिर और धर्माधिकारी

कुछ दिन पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कर्नाटक दौरे के दौरान वहां के प्रसिद्ध श्री मंजूनाथ स्वामी मंदिर गए तो वहां उन्होंने जिस तरह से इस मंदिर के कर्ता-धर्ता धर्माधिकारी डा डी वीरेंद्र हेगड़े के सम्मान में विचार व्यक्त किए उन्हें सुनकर इस धार्मिक स्थल व धर्माधिकारी के बारे में जानकारी हासिल करने की उत्सुकता पैदा होना स्वाभाविक था। हालांकि इसके पहले नेशनल ज्योग्राफी चैनल पर इस मंदिर द्वारा चलाए जाने वाली महा रसोई के बारे में एक कार्यक्रम देखा था जिसमें बताया गया था कि किस तरह से वहां होने वाले सालाना लक्षद्वीप उत्सव के दौरान हर दिन लाखों लोग भोजन ग्रहण करते हैं। 
इसके साथ ही यह भी बताया गया था कि किस तरह से वहां सौर्य ऊर्जा के इस्तेमाल से भोजन पकाया जाता है व खाने में इस्तेमाल होने वाली पत्तलो आदि  से खाद बनाकर उन्हें धर्मस्थल के फार्म में उपयोग में लाया जाता है। जहां पैदा होने वाली सब्जियों का इस्तेमाल भी इस रसोई में किया जाता है। तब धर्माधिकारी की एक झलक मात्र देखी जिसमें उन्हें मंदिर का हिसाब-किताब करते देखा गया था। 
तब तक मुझे नहीं पता था कि उनकी हैसियत क्या है। वह तो जब प्रधानमंत्री ने उनकी तारीफ में कसींदे कढ़े तो उनके बोलने से उत्सुकता पैदा हुई। मैं यही मान का चल रहा था कि चूंकि कर्नाटक में अगले साल विधानसभा चुनाव होने है अतः इस भाषण व प्रधानमंत्री की यात्रा का असली निहितार्थ चुनाव ही होगा। क्योंकि इस देश के मठ, मंदिर, डेरे बहुत वर्ग के मतदाताओं को प्रभावित करते आए है मगर यह धर्मस्थल सबसे अलग है।
मैंगलौर से करीब 75 किलोमीटर दूर स्थित दक्षिण कन्नड़ जिले के श्री मंजूनाथ मंदिर की कहानी बहुत अजीबो-गरीब है। इसे जैन धर्म का पालन करने वाले जमींदार ने बनवाया था और आज भी मंदिर का प्रशासन उसी के परिवार के सदस्य संभालते हैं। परिवार का सबसे बड़ा बेटा धर्माधिकारी बनाया जाता है। डी वीरेंद्र कुमार हेगड़े 21वें धर्माधिकारी है। इस परिवार के लोग अपने नाम के आगे हेगड़े लिखते हैं। इस मंदिर मे शिव की मूर्ति है जिसकी देखभाल व पूजा शिवल्ली वैष्णव ब्राह्मण पुजारी करते हैं। 
इसके निर्माण की कहानी अनोखी है। करीब 800 साल पहले यहां कूडमा नामक गांव था जहां जैन बंट जाति का प्रमुख वीरम्मा परगेड अपनी पत्नी के साथ रहता था। एक रात उसने सपना देखा कि देवता उससे कह रहे हैं कि उसे अपना घर खाली कर वहां पर चार देवताओं का मंदिर बनाना चाहिए। अगर वह ऐसा करेगा तो उसे बहुत संपन्नता व नाम हासिल होगा। उसने नींद खुलने पर वैसा ही किया और अपने घर पर कन्याकुमारी, कलारकामी, कुमार स्वामी व कलाराई देवताओं की मूर्तियां स्थापित करवा कर उनकी देख-रेख के लिए एक ब्राह्मण पुजारी नियुक्त कर दिया। 
उस पुजारी के कहने पर वे मैंगलौर के कादरी गांव से एक शिव की मूर्ति लेकर आए और फिर उसे भी मंदिर में स्थापित कर दिया। मालूम हो कर्नाटक में शिव को मंजूनाथ कहा जाता है। छोटे से इस मंदिर की ख्याति बढ़ती गई। डी वीरेंद्र हेगड़े इसके 21वें धर्माधिकारी है व उन्होंने 20 साल की उम्र में यहां के धर्माधिकारी का पद संभाला था। उन्होंने इसका काफी विस्तार किया और अपने पुर्वजों की इच्छा को पूरी करते हुए अन्न, औषधि, विद्या व अभयदान को आगे बढ़ाया। हर रोज करीब 10 हजार लोग यहां भोजन ग्रहण करते हैं जिसमें आमतौर पर चावल, सांभर, सब्जी आदि परोसी जाती है। इसके अलावा उनका संस्थान करीब दो दर्जन कॉलेज व संस्थान चलाती है जहां विद्यार्थियों के हॉस्टल की भी व्यवस्था है। 
मंदिर के पास ही करीब 20,000 लोगों के रहने व रूकने की व्यवस्था है। उन्होंने ग्रामीणों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए भी अनेक योजनाएं तैयार की है। खास बात यह है कि यह सब करने के बावजूद वे संन्यासी नही है व ग्रहस्थ जीवन व्यतीत करते हैं। उनकी पत्नी हेमवती उनकी मदद करती है व एक बेटी श्रद्धा है। उन्होंने तुलू भाषा के उत्थान के लिए काफी काम किया है। मालूम हो कि कर्नाटक का एक इलाका तुलूगडू कहलाता रहा है। इसमें दक्षिण कन्नड़, उदिमी व करेल के सरगौन इलाके आते हैं। यदा-कदा इस इलाके के लोग अपनी अनदेखी किए जाने का आरोप लगाते हुए अलग तुलूगडू बनाए जाने की मांग करते आए हैं जबकि असलियत यह है कि वे लोग गुजरात के पटेल व पंजाब के सिखों की तरह काफी मेहनती और अक्लमंद है जिन्होंने जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हासिल की है। 
जैन बंट समुदाय देश के सबसे अमीर समुदायों में गिना जाता है। दक्षिण भारतीय भोजन जेसे इडली, डोसा आदि को पूरे देश खासतौर पर उत्तरी भारत में लोकप्रिय बनाने में इस इलाके के लोगों की अहम भूमिका रही है। सबसे पहले उत्तर भारत में ही उडिपी नाम के दक्षिण भारतीय रेस्तरां खुलने का सिलसिला शुरू हुआ था।
कर्नाटक मूल के तमाम बैंकों जैसे विजया बैंक, केनरा बैंक, सिंडीकेट बैंक, कॉरपोरेशन बैंक आदि के कर्ताधर्ता इसी तुलू इलाके के लोग हैं। जब भी आप कोई कामथ, पई, शेट्टी सरीखे सरनेम वाले अधिकारी से मिले तो समझ जाएं कि वह इसी तुलू क्षेत्र का ही है। धर्माधिकारी के शौक भी गजब के हैं। उन्हें पुरानी कारें व दूसरा सामान इकट्ठा करने का शौक है। उन्होंने मंजूषा नामक एक म्यूजियम बनाया है जिसमें बड़ी तादाद में एंटीक कारे है जो कि सभी चलती हुई है। इनमें स्टीबेकर, शिष्ट से लेकर राल्सरायज तक शामिल है। उनके पास वो स्टूडीबेकर कार भी है जिसका महात्मा गांधी इस्तेमाल किया करते थे। मैंसूर के जयचामारराजा वाडियार की मर्सीडीज भी उनके संग्रहालय में हैं। उन्होंने बेशकीमती पैन, घडिया, कैमरे मुद्रा मूर्तिया, पांडुलिपिया तक संग्रह की है जिनकी कीमत अरबों रुपए हैं। 
उन्होंने 1973 में इस मंदिर के निकट 39 मीटर ऊंची व 175 टन की एक ही पत्थर से बनी बाहुबली की प्रतिमा स्थापित करवाई थी जिसका अनेक बार महा मस्तिकाभिषेक हो चुका है। कर्नाटक में अनेक स्थलों पर ऐसी विशाल मूर्तिया स्थापित की गई है। अहम बात यह है कि धर्माधिकारी के रूप में वे हर दिन अपनी अदालत लगाते हैं जिसमें लोगों के आपसी झगड़े, जिनमें कानूनी व फौजदारी मामले शामिल होते हैं सुलझाए जाते हैं क्योंकि उन्हें मंजूनाथ का प्रतिनिधि माना जाता है। उनके फैसलों का अदालतें भी सम्मान करती है व कोई उसे चुनौती नहीं देता है। हालांकि उनका संगठन भी विवादों से परे नहीं हैं। उस पर एक परिवार के काबिज होने का आरोप लगता आया है व दो साल पहले दक्षिण कन्नड़ के एसडीएम ने मंदिर प्रशासन द्वारा 114 एकड़ जमीन की खरीद को अवैध ठहराते हुए उस सौदे को रद्द कर दिया था।

Tags: , , , , , , , , , , , ,

195 Views

बताएं अपनी राय!

हिंदी-अंग्रेजी किसी में भी अपना विचार जरूर लिखे- हम हिंदी भाषियों का लिखने-विचारने का स्वभाव छूटता जा रहा है। इसलिए कोशिश करें। आग्रह है फेसबुकट, टिवट पर भी शेयर करें और LIKE करें।

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

आगे यह भी पढ़े

सर्वाधिक पढ़ी जा रही हालिया पोस्ट

मुख मैथुन से पुरुषों में यह गंभीर बीमारी

धूम्रपान करने और कई साथियों के साथ मुख और पढ़ें...

भारत ने नहीं हटाई सेना!

सिक्किम सेक्टर में भारत, चीन और भूटान और पढ़ें...

बेटी को लेकर यमुना में कूदा पिता

उत्तर प्रदेश में हमीरपुर शहर के पत्नी और पढ़ें...

पाक सेना प्रमुख करेंगे जाधव पर फैसला!

पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय और पढ़ें...

© 2016 nayaindia digital pvt.ltd.
Maintained by Netleon Technologies Pvt Ltd