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वाह जंग! वाह हामिद मीर!

विवेक सक्सेना
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यह भी क्या संयोग है कि इधर भारत में सरकार द्वारा लगातार मीडिया पर शिंकजा कसने की खबरें आ रही है वही दूसरी ओर पड़ौसी देश पाकिस्तान में सरकार ने वहां के सबसे चर्चित जियो टेलीविजन पर अपना शिंकजा कस दिया है। जंग समूह द्वारा संचालित जियो टीवी को पाकिस्तान का सबसे चर्चित व देखा जाने वाला टीवी माना जाता है। 

देश के तमाम हिस्सों में वहां के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले इस टीवी का प्रसारण नहीं हो पा रहा है। मजेदार बात यह है कि इस तरह से उसे ब्लैक आउट करने के बावजदू वहां के गृहमंत्री अहसान इकबाल कह रहे हैं कि पाकिस्तान इलेक्ट्रानिक मीडिया रेगुलेटरी अथारटी ने उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। इसके बावजदू इस देश के 80 फीसदी हिस्से में वह नहीं दिखायी दे रहा है। 

इस चैनल के साथ मार्च में ही सरकार द्वारा इस तरह का बरताव किया जाना शुरु कर दिया गया था। पहले मार्च महीने से यह टीवी देश के सैनिकों के रहने वाले कैंट इलाके से गायब हुआ। फिर अप्रैल शुरु होते ही तमाम जियो चैनल, जैसे खबर, खेल, मनोरंजन सब गायब कर दिए गए। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस भी सेना के करीबी है। वह उसके अनुसार ही काम करते है। 

ध्यान रहे इस टेलीविजन व सेना में टकराव अक्सर होता आया है। कुछ समय पहले उसने आतंकवादियों की वित्तीय मदद किए जाने के बारे में खबर दिखायी थी। यह समूह सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बजवा की घरेलू व विदेशी नीतियों की आलोचना करता रहा है। उन्होंने उसे बाजवा डाक्टरीन का नाम दिया जिससे सेना के जनरल चिढ़ गए।

मालूम हो कि कुछ दिन पहले ही इस समूह ने सेना से माफी मांगी थी। विज्ञापन छापकर मांगी गई माफी में उस समूह की ओर से कहा गया था कि आईएसआई प्रमुख ले. जनरल जहीर खान के खिलाफ जो आरेाप लगाए गए थे वे सही नहीं थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने इस अखबार के पत्रकार व पाकिस्तान के सबसे चर्चित पत्रकार हामिद मीर की हत्या करवाने की कोशिश की थी। विज्ञापन में कहा गया था कि यह आरेाप अखबार ने नहीं बल्कि हामिद मीर व उनके भाई ने लगाए थे। 

पाकिस्तान में हामिद मीर व जियो का वही संबंध है जो कभी अरुण शौरी व इंडियन एक्सप्रेस में हुआ करता था। इस पत्रकार पर दो बार जानलेवा हमले हुए। पहला हमला तब हुआ जब कि वह मलाला युसुफजई के हमले की रिपोर्टिंग करके वापस लौट रहा था। तब उसकी कार में बम लगा दिया गया जिसे बाद में बेकार कर दिया गया। 

दोबारा सितंबर 2014 में उस पर कराची स्थित अपने अखबार के दफ्तर जाते समय हमला हुआ। उसे दो गोलियां लगी। अस्पताल में उसकी गोलियां निकाल दी गई। तब उसने व उसके भाई ने इस हमले के लिए पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई को जिम्मेदार ठहराया था। इसी हमले पर उनकी प्रतिक्रिया के लिए इस समूह ने पिछले दिनों माफी मांगी थी। 

हामिद मीर को तमाम दर्शक अक्सर भारतीय टेलीविजनों पर विभिन्न चर्चाओं में हिस्सा लेते हुए देख सकते हैं। इस 52 वर्षीय पत्रकार को दुनिया में तमाम लोग जानते हैं। उसका उर्दू-अंग्रेजी पर पूरा अधिकार है और वह दोनों भाषाओं में देश विदेश के अखबारों व पत्रिकाओं में पाकिस्तान के हालात पर लेख लिखता रहा है। वह जियो चैनल पर देश का सबसे चर्चित कार्यक्रम ‘कैपिटल टॉक’ देता है जिसमें वह नेताओं के साथ बातचीत करता है। 

उसके चर्चा में आने की सबसे बड़ी वजह अमरीका में हुए आतंकी हमले के बाद ओसामा बिन लादेन का पहला इंटरव्यू लेना था जो कि बीबीसी से लेकर वाशिंगटन पोस्ट तक में छपा। उसने हिलेरी क्लिंटन, टोनी ब्लेयर, शिमोन पेरेज से लेकर लाल कृष्ण आडवाणी व शाहरुख खान तक के इंटरव्यू लिये। उसे पाकिस्तान हिलाल-ए-इफितयाज पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उसके तीन भाई है जिनमें से दो पत्रकार हैं। अपने देश में सबसे कम उम्र का संपादक बना। उसे देश के खोजी पत्रकार के रुप में जाना जाता है। 

जब उसने जंग में तत्कालीन राष्ट्रपति इशहाक खान द्वारा प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो को बर्खास्त किए जाने की खबर छापी तो उसका अपहरण कर सरकार ने इस खबर का स्त्रोत पूछा। उसने बेनजीर के पति आसिफ अली जरदारी के करीबियों द्वारा पनडुब्बी की खरीद में घोटाले का खुलासा किया। तब उसे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। उसने प्रधानमंत्री रहते हुए नवाज शरीफ के घोटालों का खुलासा किया। जब वह रिपोर्टिंग के लिए बेरुत गया तो हिजबुल्ल ने उसका अपहरण कर लिया और जब यह साबित हो गया कि वह हमास का एजेंट नहीं था तो उन्होंने उसे रिहा कर दिया। 

जब वकीलों ने पाकिस्तान के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश, इफ्तिखार चौधरी के खिलाफ प्रदर्शन किया तो उसकी कवरेज के लिए इस पत्रकार की पुलिस ने पिटायी की व उसी शाम उसके कार्यक्रम में प्रधानमंत्री परवेज मुशर्रफ ने उसके साथ हुए इस व्यवहार के लिए माफी मांगी व अगले ही दिन पांच माह के लिए उसके कार्यक्रम पर रोक लगा दी जिसके विरोध में पाकिस्तान में प्रदर्शन हुए। 

वाशिंगटन पोस्ट ने उसके बारे में लिखा था कि वह ऐसा पत्रकार है जो कि पाकिस्तान में भगोड़ो की तरह रहता है। उसके साथ अजीबो गरीब बरताव होते आए हैं। कभी उन्हें परवेज मुशर्रफ तालिबान समर्थक बताते थे तो कभी तालिबान उन पर हुए हमलों की जिम्मेदारी लेती थी। जब उन्होंने 1995 में कोलंबिया में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव का इंटरव्यू किया तो उन्हें भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ का एजेंट कहा जाने लगा। जब उन्होंने बिन लादेन का इंटरव्यू किया तो उन्हें आइएसआई का एजेंट करार दिया गया। 

आईएसआई ने उन पर अल कायदा का जासूस होने का आरोप लगाया। जब उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडालिजा राइस का इंटरव्यू किया तो पाकिस्तान में उन्हें सीआईए का एजेंट कहा गया। दो बच्चों के इस पिता का कहना है कि पैंगबर को कुछ लोग बहुत गलत तरीके से प्रस्तुत करते है, ज्यादातर यह काम अपराधी करते हैं। पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या वहां लोकतंत्र का अभाव है। हमारी संसद महज रबड़ स्टैंप है। सेना ने कभी आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया। तब वह अंग्रेजों के साथ थी और आज नेताओं के जरिए अपना शासन चला रही है।

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