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खुद मोस्ट वांटेड बने सुहैब!

विवेक सक्सेना
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किसी भी इंसान की जिंदगी में उसके माहौल का बहुत बड़ा असर पड़ता है, यह बात फिर सही साबित हुई है। बचपन में एक कहानी पढ़ी थी कि एक पक्षी बेचने वाला अपने तोते बेचने निकाला। उसका एक तोता कसाई ने व दूसरा किसी पंडित ने खरीद लिया। एक साल बाद जब वह पुनः वहां से गुजर रहा था तो वह पंडितजी के घर गया। वहां उनके तोते ने उससे ‘राम राम’ कहा। फिर वह कसाई की दुकान पर पहुंचा। उसका तोता उसे देखते ही चिल्लाने लगा कि मारो साले को इसकी छोटी-छोटी बोटिंयां काट दो। 

सो तोता बेचने वाले को समझ में आ गया कि यह सब उस माहौल का असर है जिसमें तोते पले बड़े थे। जब सुहैब इलियासी को अपनी पत्नी अंजू की हत्या के जुर्म में उम्र कैद दिए जाने की खबर पढ़ी तो यह कहानी याद आ गई। सुहैब इलियासी बहुचर्चित टीवी शो ‘इंडियाज मोस्ट वांटेड’ का एंकर हुआ करता था। वह कस्तूरबा गांधी मार्ग स्थित मस्जिद के इमाम जमील इलियासी के नौ बच्चों में से एक था। उसने दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और कैमरामैन बन गया। 

वहीं उसकी मुलाकात अंजू सिंह से हुई। वे दोनों काफी करीब आए हालांकि अंजू के पिता केपी सिंह को उनकी यह निकटता पसंद नहीं थी। बाद में वे दोनों लंदन चले गए जहां उन्होंने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी कर ली व अंजू ने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया और वह अफसाग बन गई। 

वहां सुहैब एशिया टीवी में काम करने लगा। उन दिनों वहां अपराधियों पर आधारित ‘क्राइम स्टापर्स’ सीरियल बहुत चर्चित हो रहा था। कुछ समय बाद वे दोनों भारत लौट आए और उसकी तर्ज पर इंडियाज मोस्ट वाटेंड सीरियल बना डाला। सबसे पहले इसे जी टीवी ने प्रसारित किया। उसके 52 एपिसोड तैयार किए गए। शुरुआत में अंजू ने इसकी एंकरिंग की। बाद में सुहैब खुद एंकरिंग करने लगा। बाद में वह जी टीवी से अलग हो गया। उसका अपने सहयोगी प्रोड्यूसर विनोद नायर से भी झगड़ा हो गया। 

उसने दूरदर्शन पर फ्यूजीटिव मोस्ट वांटेड नाम से सीरियल शुरू किया क्योंकि इंडियाज मोस्ट वांटेड का कापीराइट जी टीवी के पास था। उसी दौरान जी ने मनोज रघुवंशी की एंकरिंग वाला इसी नाम से सीरियल बनवाया। वह सीरियल बहुत लोकप्रिय हो चुका था। उसकी टीआरपी अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी। कहा जाता है कि इस सीरियल के जरिए 30 कुख्यात अपराधियों को पकड़ने में मदद मिली। उत्तर प्रदेश के इनामी हत्यारे श्रीप्रकाश शुक्ला को मुठभेड़ में मारे जाने का श्रेय भी सुहैब इलियासी लेता था। 

उसका दावा था कि अपराधियों का खुलासा करने के कारण उसे उन लोगों से धमकियां मिलने लगी थी। अतः सरकार ने उसे पुलिस की सुरक्षा प्रदान कर दी। इस दौरान सुहैब व अंजू के संबंधों में तकरार बनती गई। उनके घर एक बेटी ने जन्म लिया। अंजू की कनाड़ा स्थित बहन रश्मि के अनुसार सुहैब उनकी बहन के साथ मारपीट करता था। उससे दहेज की मांगा करता था।

पहले सुहैब अपने परिवार के साथ मस्जिद में रहता था। कुछ समय बाद संबंध खराब होने के बाद अंजू विदेश चली गई। मगर सुहैब उसे मनाकर लौटा लाया। उन्होंने मयूर विहार में एक महंगा फ्लैट खरीद लिया। अचानक 10 जनवरी 2000 को सुहैब अपने फ्लैट से भागते हुए नीचे आया व उसने पुलिस वालो को बताया कि उसकी पत्नी ने खुद को चाकू मारकर आत्महत्या कर ली है। अंजू को अस्पताल पहुंचाया गया जहां उसकी मौत हो गई। वह सीरियल बनाने के कारण वह आला पुलिस अफसरों व नेताओं का करीबी हो गया था। पहले पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया मगर बाद में 17 साल तक चले इस मुकदमे में सुहैब को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। वह फिलहाल 51 साल का है।

इस दौरान उसने अपनी सक्रियता जारी रखी। वह इंडिया टीवी में चला गया और वहां स्टिंग ऑपरेशन कर उसकी टीआरपी बढ़ाई। शक्ति कपूर व अमन वर्मा के खिलाफ उसने ‘कास्टिंग काउच’ सरीखे कार्यक्रम में स्टिंग ऑपरेशन किए। उसने अनेक फिल्मे बनाई व उनमें काम किया। 2009 में उसने ब्यूरोक्रेसी टुडे नामक पत्रिका निकाली और अफसरशाही में अपनी पैठ बनाने की कोशिश की। इस पत्रिका के होर्डिंग खास तौर पर सीजीओ कांपलैक्स स्थित सीबीआई मुख्यालय के सामने लगाए जाते थे। 

अपराधियों पर सीरियल बनाते-बनाते वह खुद भी अपराधी बन गया। उसके पिता व आल इंडिया आर्गेनाइजेशन ऑफ इमाम्स के अध्यक्ष जमील इलियासी की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। हरियाणा के मेवात इलाके के रहने वाले जमील इलियासी ने लुटियन जोन की एक अहम मस्जिद को अपना ठिकाना बनाया हुआ था। वे इंदिरा गांधी से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक के करीब रहे। बताते है कि जब आपातकाल के बाद हुए चुनाव में इंदिरा गांधी हार गई तो एक दिन वे उनके घर गए और उन पर बुरी रूह का साया होने की बात करते हुए उनके घर में पूजा की। वहां एक काले मुर्गे की बलि दी व उसकी टांगे व गर्दन काटकर एक कमरे में लटका दी और बोला कि इन्हें मैं खुद उतारुंगा। 

जनता पार्टी के आपसी झगड़े के कारण इंदिरा गांधी पुनः सत्ता में आई। जब जमील ने उनसे संपर्क करना चाहा तो इंदिरा गांधी ने उन्हें मुंह नहीं लगाया। जब संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत हो गई तो जमील इलियासी ने किसी नेता के जरिए इंदिरा गांधी तक यह संदेश पहुंचाया कि चूंकि उन्हें उस टोने टुटके की हड्डिया नहीं हटाई थी इसलिए उन्हें यह सजा मिली है। इंदिरा गांधी ने यह कहानी सुनाने वाले को घर से निकाल बाहर किया। बाद में वे अटल बिहारी वाजपेयी के काफी करीब हो गए। उन्होंने चुनाव के पहले भाजपा प्रायोजित मुस्लिम सद्भाव यात्रा निकाली मगर पार्टी चुनाव हार गई। जब वे एक बार इजरायल गए तो उन्होंने इजरायल सरकार की जमकर तारीफ करते हुए उसे मुसलमानों का हितैषी बताया। 

उनके मरने के बाद उनके सम्मान में एक्सीलेंस अवार्ड दिया जाने लगा। इसके पहले कार्यक्रम की अध्यक्षता तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह के प्रधान सचिव टीकेए नैयर ने की थी। क्या संयोग है कि बाप व बेटा दोनों ही हमेशा सुर्खियों में बने रहे।

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