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यह देश मानों कबीलों का!

बचपन में बड़े शौक से इंद्रजाल कामिक्स पढ़ा करते थे जिनमें जादूगर मैंड्रेक व बेताल होता था। बेताल अक्सर किसी कबीले में जाता था। वहां दिखाया जाता था कि कबीले की अजीबो-गरीब प्रथा होती थी। कुछ लोग अर्धनग्न होते थे और वे आदमी को उबाल कर जिंदा खाते थे।

पिछले कुछ समय से इस देश में कुछ दुर्घटनाओं पर जिस तरह से निर्लजज्ता दिखाई जा रही है उसे देख कर तो नहीं लगता है कि हम लोग आज भी जिस देश में रह रहे हैं वह वास्तव में अफगानिस्तान की तरह कबीलो वाला देश है। जहां हलाला युसूफ के साथ जो कुछ किया गया उससे भी बदतर हमारे देश में हो रहा है।

इन दिनों दो प्रमुख घटनाएं चर्चा में है। पहली घटना उत्तर प्रदेश के उन्नाव शहर की है जहां कि बलात्कार पीडिता ने अपने और अपने परिवार के साथ हुई ज्यादती में विधायक और उसके दबंग परिवार को कटघरे में ला खडा किया है।

उसने एक दबंग विधायक, उसके भाई व गुर्गो द्वारा सामूहिक बलात्कार के आरोप लगाए है। आरोप उस वक्त है जब भाजपा का राज है। वह भाजपा जो रामराज्य लाने व शुचिता की बात करती आई है। लेकिन हुआ गया क्या? सरकार बदल गई मगर हालात नहीं बदले। अपनी सुनवाई न होने पर उस लड़की ने अपने पिता व परिवार के लोगों सहित मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह करने की कोशिश की।

उन्हें बचा लिया गया मगर पिता को कट्टा (बिना लाइसेंस का देसी तमंचा) रखने के आरोप में गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। वह बुरी तरह से घायल था क्योंकि विधायक के भाई व उसके समर्थको ने उसे बुरी तरह से पेड़ से बांध कर पानी डाल-डाल कर मारा था ताकि उसे ज्यादा चोट लगे।

वह पुलिस की मौजूदगी में अस्पताल जाया जाता है जहां तमाम लोग जिनमें डाक्टर भी होते है उस पर हंसते हैं। बाद में वह अपने घावों के कारण मर जाता है। यह देश के मीडिया में चली। बतौर बड़ी खबर या टीआरपी के लिए मुझे नहीं पता। इसमें उसे न्याय दिलाना कितना शामिल था या अपनी टीआरपी बढ़ाना लक्ष्य था इसकी बहस में जाने के बजाय इस हकीकत पर ही रहा जाए कि इससे जबरदस्त हंगामा शुरू हो गया।

हालात इतने खराब हो गए कि भाजपा की एक महिला प्रवक्ता ने तो प्रधानमंत्री व पार्टी अध्यक्ष को हालात से आगाह करते हुए ट्वीट किया कि क्या इन हालात में आप 2019 के लोकसभा चुनाव में जाएंगे?  इस घटना के बाद चैनलो की सोच में गजब का बदलाव आया है। जो चैनल चंद दिनों पहले तक उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बताते हुए मुख्यमंत्री योगी का गुणगान कर रहे थे और हफ्तो तक इस प्रदेश व योगी की बढाई वाले विशेष कार्यक्रम दिखा रहे थे वे उसे अब शर्म प्रदेश बताने लगे।

बहुत हंगामे के बाद मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच विशेष जांच दल को सौंपी। जब पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में जब दल उस गांव में पहुंचा तो विधायक के समर्थको ने उनका घेराव किया। पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया। इसके बाद पीडि़त लड़की ने कहा कि आप लोग इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि गांव में विधायक का कितना आतंक है। विधायक के भाई के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है मगर विधायक मजे से मुस्कुराते हुए घूम रहा है।

संयोग से विधायक और मुख्यमंत्री एक ही राजपूत जाति के है। योगी आदित्यनाथ पर अपनी जाति के लोगों को अंहम पदों पर बैठाने व उन्हें संरक्षण देने के आरोप लगते आए हैं। यह कोई नई बात नहीं है। जब अखिलेश यादव, मायावती व मुलायम सिंह यादव सत्ता में थे तो उन पर भी अपनी जाति के लोगों का खास ध्यान रखने के आरोप लगते आए थे। वैसे भी इस देश में मुख्यमंत्री हो या प्रधानमंत्री और मंत्री सभी अपनी जाति के लोगों को ही सरकार में अंहम पदो पर रखना चाहते हैं कयोंकि वे जातिवाद व उन पर ही विश्वास करते हैं तभी मुझे यह देश एक कबीलाई देश नजर आता है।

राज्य सरकार तो कबीला है जिसमें आरोपी विधायक को वह अपना मानती है जबकि विपक्ष और पत्रकार उसके विरोधी कबीले के हैं। ऐसे में लगता है कि सत्ता में रहते हुए यादव परिवार बेकार में ही इटावा में एक अभ्यारण खोल कर शेर पालने का प्रयास कर रहा था। जब मैं छोटा था व कानपुर के प्राकृतिक जंगल ऐलन फारेस्ट में चिडि़याघर बनाने का फैसला किया गया तो किसी ने कहा था कि इस शहर में चिडि़याघर बनाने की क्या जरूरत है पूरा प्रदेश ही बहुत बड़ा चिडि़याघर है।

वैसे भाजपा की सरकार चला चुके निर्दलीय विधायक राजा भैया को मगरमच्छ पालने का शौक था। उस तालाब में उनके विरोधियों को डालने का आरोप था। संयोग तो देखिए कि वे आज भी विधायक है। मुख्यमंत्री की जाति के हैं और ज्यादातर आरोपो से बरी हो चुके हैं। उनके बारे में मौजूदा गृहमंत्री ने कहा था कि वे कुछ भी हो सकते हैं मगर देशद्रोही नहीं हो सकते। उनका यह बयान तब आया था जबकि तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने उनके खिलाफ टाडा कानून में मुकदमा दर्ज किया था। यह भी संयोग है कि उनकी व गृहमंत्री की जाति एक ही हैं।

दूसरा मामला जम्मू में एक चरवाहा बालिका का बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या का है। यह आठ वर्षीय बालिका मुसलमान थी व जम्मू क्षेत्र में एक हिंदू के घर के पीछे अपने जानवर चराती थी। इस परिवार के युवको व पुरुषों ने उसका अपहरण किया व कई दिनों तक उसे अपनी गिरफ्त में रख कर उसका सामूहिक बलात्कार करते रहे। एक व्यक्ति को तो इस कांड के लिए खासतौर से बाहर से बुलाया गया।

जब राज्य पुलिस ने मामला दर्ज किया तो पूरे जम्मू-कश्मीर में इस मामले ने सांप्रदायिक रूप ले लिया। देश के सबसे ज्यादा विद्वान माने जाने वकील सड़को पर आ गए है। प्रदेश सरकार अब अपराध के हिंदू आरोपी के खिलाफ अदालत में कार्रवाई के लिए इस मामले में दो सिख पुलिस अभियोजकों को जिम्मा दे रही है। संयोग से प्रधानमंत्री कार्यालय के मंत्री जीतेंद्र सिंह जम्मू के ही है। वहां इतिहास में पहली बार भाजपा सत्ता में आई है।

जो हो, दोनों मामलें अब मीडिया में नंबर एक पर चर्चा में है। यह योगी और मोदी सरकार दोनों के लिए हैरानी वाली बात होनी चाहिए।

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