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बहुत विवादास्पद रही मंडेला की पत्नी

दुनिया में कुछ व्यक्तित्व इतने विवादास्पद होते हैं कि उनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। आमतौर पर दुनिया में कुछ अच्छे लोग होते हैं व कुछ बुरे मगर अक्सर ऐसे अपवाद भी देखने को मिलते हैं जब कि कोई व्यक्तित्व इतना अजीब हो जाता है कि उसके बारे में यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि वह अच्छा था या बुरा! ऐसा ही एक नाम मादीविजेला विनी मंडेला का है जिनका 2 अप्रैल को दक्षिण अफ्रीका के जोहानसबर्ग में निधन हो गया।

वे 82 साल की थी। अपने देश में उनका अलग ही स्थान था और गौरो के प्रभुत्व वाले इस देश की आजादी में उन्होंने जबरदस्त योगदान दिया। अपने पति नेल्सन मंडेला के संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया। उन्होंने तो वह सब कुछ किया जो कि कस्तूरबा भी नहीं कर पायी। एक समय था जबकि उन्हें मामा मंडेला या राष्ट्रमाता कहा जाता था मगर उन्हें उनकी आदतों के कारण उनके पति नेल्सन मंडेला ने ही छोड़ दिया वह भी तब जब वे जेल से रिहा होने के बाद अपने देश का नेतृत्व करते हुए जीवन के सबसे सुखद समय से गुजर रहे थे।

वे दक्षिण अफ्रीका के महात्मा गांधी थे जिन्होंने लगातार 27 साल जेल में बिताए थे। लंबे अरसे से चली आ रही गौरों की रंगभेद की नीति के खिलाफ उन्होंने जमकर संघर्ष किया।

उन्होंने 1958 में शादी की। उनकी पत्नी का नाम विनी मंडेला था और वह उम्र में उनसे 23 साल छोटी थी। नेल्सन मंडेला को वहां की रंगभेदी सरकार ने 1963 में जेल में डाल दिया। वे अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस के नेता थे जबकि उनकी पत्नी बहुत जुझारु महिला थी। उन्होंने अपने पति के जेल में होने के बावजूद आंदोलन जारी रखा। वे पुलिस के अत्याचार की शिकार हुईं व अनेक बार उन्हें जेल में डाला गया।

खासतौर पर सच्चाई यह है कि अपने पति व पार्टी के साथ टकराव की शुरुआत तब हुई जब उनके पति जेल के बाहर आए। मंडेला ने चुनाव के बाद सरकार संभाली। उस सरकार में वह उपमंत्री बनी व उनकी पार्टी की सरकार ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच के लिए एक आयोग बनाया जिसने उन्हें दोषी पाया। वे अपनी पार्टी की महिला विंग की अध्यक्ष रहीं। उन पर चोरी, धोखाधड़ी व मानवाधिकारों के हनन सरीखे मामलों की जांच करवाई गईं। यह जांच जिस रिकॉन्सिलेशन आयोग ने की उसके प्रमुख उनके पति के करीबी व देश के जाने माने नेता डेसमंड टूटू थे। उनके पिता गोरों की सरकार में मंत्री रह चुके थे। उन्होंने अंग्रेजों के शासन में रहते हुए अपने समर्थकों से नेकलेसिन आंदोलन चलाने की अपील की थी। इसके तहत उनके समर्थक उनके विरोधियों के गले में पुराने टायर डाल कर उसमें आग लगा कर उन्हें जान से मार देते थे।

उन्होंने सार्वजनिक तौर पर इस तरीके को सही बताते हुए इसके जरिए अंग्रेजों से बदला लेने को कहा। इस दौरान उनके अंगरक्षकों ने पांच लोगों का अपहरण किया जिसमें से एक तो महज 14 साल का स्टोपी था। उन सभी लोगों पर सरकार का मुखबिर होने का आरोप लगाया गया। इन सबकी निर्ममता के साथ पिटायी की गई। इनमें से स्टोंपी बहुत घायल अवस्था में एक डाक्टर के घर पर मिला। विनी के समर्थकों ने उससे कहा कि वह पुलिस को बयान दे कि वह बच्चा जब उसके पास आया तो मर चुका था। जब वह तैयार नहीं हुआ तो अगले दिन उसे मरा हुआ पाया गया।

इस मामले की दुनिया भर में गूंज हुई। वे मंडेला फुटबाल क्लब चलाती थीं जिसमें कथित खिलाड़ी उनके विरोधियों को निपटाने का काम करते थे। वे काले लोगों के विरोधी होने पर उनका अपहरण करते, उन्हें यातनाएं देते। उन पर सरकार का मुखबिर होने का आरोप लगाते व बाद में उनकी हत्या करते। उनकी इन हरकतों से दुखी होकर नेल्सन मंडेला ने जेल से उन्हें चिट्ठी लिख कर ये क्लब बंद करके इन हरकतों से दूर रहने का अनुरोध किया था।

उन्होंने मंत्री रहते हुए धोखाधड़ी व चोरी करने के आरोपों का सामना किया। उन्होंने अज्ञात मृतकों के दाह संस्कार के नाम पर पैसा लिया। उन्हें 43 धोखाधड़ी व 25 चोरी के मामलों में सजा हुई। उन्हें अधिकतम पांच साल की सजा हुई क्योंकि जज ने कहा कि इन तमाम मामलों में लिप्त होने के बावजूद उन्होंने कोई निजी फायदा नहीं उठाया। उन्होंने अपने अंगरक्षकों और कुछ अन्य लोगों के साथ शारीरिक संबंध बनाए। उन्होंने जाने माने भारतीय लेखक वीएस नाईपाल की बेटी नादिरा नाईपॉल को दिए इंटरव्यू में कहा कि जब नेल्सन जेल में थे तब वे अपने पति के प्रति वफादार नहीं रह सकी।

उन्होंने दावा किया कि यदि उनके पति ने अश्वेतो को नीचा दिखाया और जेल मे रहते हुए ही कुछ किया। उनका एकमात्र काम तो पैसा इकट्ठा करना था। वे एक संस्था से ज्यादा कुछ नहीं थे और किसी सम्मान के योग्य नहीं थे। वे अपनी बेटियों से नहीं मिलते थे। जब उनके इस इंटरव्यू पर हंगामा हुआ तो उन्होंने बयान दिया कि वे उस लेखिका से कभी नहीं मिलीं।

बाद में नेल्सन मंडेला ने कहा कि मेरी पत्नी ने जो कुछ किया उससे मरेा सिर नीचा हुआ। मैं जेल से छूटने के बाद कभी जागते हुए अपनी पत्नी के कमरे में दाखिल नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि मैं उससे आजिज आ चुका था और उससे छुटकारा पाना चाहता था। वे जेल से 1992 में रिहा हुए। दक्षिण अफ्रीका में 1994 में हुए चुनावों के बाद वे सत्ता में आए और 1996 में उनका तलाक हो गया। विनी ने उनकी संपत्ति पर मालिकाना हक को लेकर उन पर मुकदमा कर दिया मगर तय तारीख पर सुनवाई के लिए न पहुंचने के कारण यह मुकदमा बर्खास्त कर दिया गया। उन्हें अपने पति व पार्टी की अनदेखी का विरोध का सामना करना पड़ा।

उन्होंने एक बार कहा था कि मुझे देश की प्रथम महिला बनने को शौक नहीं है और न ही मैं इसके लिए पैदा हुई हूं। मैं ऐसी महिलाओं की तरह समारोहों में बुके नहीं पकड़ना चाहती। मैं किसी का आभूषण नहीं बनना चाहती हूं। वे मरने तक बीमारी और मुकदमों में फंसी रहीं। उनको लेकर अफ्रीका समेत पूरी दुनिया में दो तरह की राय थी। लोग यह तय ही नहीं कर सके कि वे एक महान महिला थी या दुष्ट महिला नेता।

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