कनाडा में मुकेश शर्मा से मिलना

विवेक सक्सेना
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बेटे ने बताया कि मुकेश शर्मा का फोन आया था वे एक घंटे के अंदर घर आ रहे हैं। बाहर बारिश हो रही थी। मुकेश शर्मा से अपने संबंध दशकों पुराने हैं। कभी वे अपने दो अन्य दोस्तों सुनील सेठी व विजय क्वात्रा के साथ दिल्ली में मिला करते थे। वहां अच्छा खासा अपना कंप्यूटर काम काम था। भाभीजी भी इसी लाइन की थी। फिर पता चला कि वे सपरिवार अपनी छोटी बच्ची अवनि के साथ कनाड़ा आ गए हैं। शुरू में वेंकूवर में रहे। कुछ लोगों की सलाह मान कर अपना रेस्टोरेंट खोला। बताते हैं कि वे धोखाधड़ी के शिकार हो गए। उनके सामने गलत बैलेंस शीट पेश करके फायदा होने का झूठा दावा किया गया। 

साल भर के अंदर डेढ़ लाख डॉलर का नुकसान उठाने के बाद उन्होंने अपना धंधा बंद कर दिया और फिर नौकरी की तलाश की। शुरू में उन्हें किसी ने सिक्योरिटी का काम करने की सलाह दी। उनके आश्चर्य जताने पर वह व्यक्ति उन्हें एचडीएफसी बैंक लेकर गया और वहां सिक्योरिटी में तैनात सरदारजी ने बात की और पूछा कि तुम पंजाब में क्या करते थे। उसने कहा कि वहां मैं बैंक में मैनेजर था। पूछने पर उसने बताया कि यह तो बड़े मजे का काम है। एक अन्य सिक्योरिटी वाले ने भी जब इसकी ताकीद की तो उन्होंने पूछा कि अगर डाका पड़ जाए या बदमाश आ जाएं तो तुम क्या करोगे। उसने छूटते ही कहा कि मैं भाग जाऊंगा। तुम भी यहीं करना। 

बाद में उन्होंने सिक्योरिटी का पाठ्यक्रम करने की कोशिश की। वह करने के कुछ समय बाद निजी कंपनी में नौकरी की और उसके बाद उनकी कनाडा के कंप्यूटर विभाग में नौकरी लग गई वे अब वहां कस्टम निरीक्षण का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि हमें यह सिखाया जाता है कि जब हम किसी की तलाशी लें या जांच पड़ताल करें तो उससे इतने प्यार से बात करें कि उसे हमारे बरताव से जरा भी परेशानी न हो।

मुकेश शर्मा की पत्नी वहां के एक विश्वविद्यालय में कंप्यूटर इंजीनियरिंग पढ़ाती हैं। उन्होंने अपना घर भी ले लिया है जो कि उनके मुताबिक बहुत सुंदर जगह पर है। उन्होंने अपने यहां आने के लिए आमंत्रित किया। चूंकि वेंकूवर से करीब तीन सौ किलोमीटर दूर इस स्थान पर काफी बर्फ पड़ती है व सड़कों पर बर्फ जम जाने के कारण ड्राइविंग व रास्ता काफी खराब हो जाता है। अतः मैंने मौसम ठीक हो जाने पर आने का वादा किया। मुकेश में कुछ भी नहीं बदला है वह बड़े प्यार से मिला। हमारे पैर छुए। वह मेरे लिए एक काफी गर्म स्वेटर खरीद कर लाया था। साथ में वह एक चर्चित दुकान से खाने की चीजें भी भी ले आया था ताकि हमें कुछ नमकीन लेने के लिए न जाना पड़े। बिटिया अवनि भी काफी मिलनसार थी। पत्नी ने चाय बनाई और हम लोग बातों में व्यस्त हो गए। उसने कुछ बहुत अहम जानकारी दी। 

मुकेश ने बताया कि यहां के सरी इलाके में निर्माण कार्य में सरदारों का ही एकाधिकार है। उसने बताया कि एक घर बनाने में 76 तरीके के काम होते हैं। इनमें दीवार, छत बनाना, फर्श बनाने से लेकर सीवर और प्लंबिंग समेत रंगाई पुताई भी शामिल होते हैं। ज्यादातर ठेकेदार पंजाब से आए लोगों को ही काम पर रखते हैं जो कि तय दर से कम पर काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं। उसने बताया कि भारत से आए पंजाबियों की खासियत यह है कि वे एक दूसरे को चूना लगाने से बाज नहीं आते हैं और हम भारतीयों को उन्हीं से बच कर रहने की जरूरत होती है। 

जब मैंने उससे कनाड़ा में घर खरीदने के लिए मिलने वाले लोन के बारे में पूछा तो उसने बताया कि यहां ढाई से तीन प्रतिशत ब्याज पर इसके लिए कर्ज मिल जाता है। आपके क्रेडिट कार्ड के जरिए कमाई व खर्च का इतिहास पता कर लोन तय किया जाता है। पहले यहां घर सस्ते थे मगर पहले आने पर चीनी लोगों ने उनके दाम बढ़ा कर उन्हें महंगा कर दिया। वे लोग अपनी सारी संपत्ति बेच कर यहां आते हैं क्योंकि वे लोग अपना पैसा व संपत्ति अपने पास ही रखना पसंद करते हैं वे मुंहमांगे पैसे अदा कर घर खरीद रहे हैं। 

उसने बताया कि वैसे भारतीय भी कुछ कम नहीं है। पहले तो यहां आने वाले तमाम लोग घर खरीदने के नाम पर कर्ज लेकर मोटी रकम पंजाब भेज देते थे व वहां उस पैसे को बैंक में जमा करवा कर मोटी कमाई करते हैं। पहले यहां यह कानून था कि अगर कर्ज लेने वाला मर जाता था तो उसकी संपत्ति उसके बच्चों के नाम हो जाती थी। मगर सरकार ने बाद में कानून में बदलाव करके यह तय किया कि भविष्य में उसके उत्तराधिकारी ही कर्ज चुकाएंगे। उसने बताया कि यहां 65 साल में रिटायर होते हैं व रिटायर होने पर पेंशन के अलावा बुजर्गों को सामाजिक सुरक्षा के रूप में भी पैसा मिलता है। यहे कारण है कि बूढ़े होने पर भी लोग काफी घूमते फिरते हैं। उन्होंने मोटर चालित नावें रखी हुई हैं। 18 साल के बाद आमतौर पर बच्चे मां-बाप के साथ नहीं रहते हैं। अगर रहते भी हैं तो वे अपना किराया अदा करते हैं। 

सरकार नागरिकों को उनके बच्चों के हिसाब से आर्थिक मदद करती है ताकि वे लोग मां-बाप की आय कम होने पर भी अच्छा जीवन स्तर जी सकें। हर बच्चे के लिए 12वीं तक शिक्षा मुफ्त में है जबकि उसके बाद शिक्षा काफी महंगी है। यहां यह माना जाता है कि पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती है। अतः बुजुर्ग लोग उच्च शिक्षा लेते हुए दिख जाएंगे व पढ़ने वाले बच्चों के लिए नौकरी करना आम बात है। मुकेश का स्वेटर काफी गर्म था अतः डायरी लिखने के लिए मैंने उसे उतार दिया। मगर उसके द्वारा लाई हुई लिकर चाकलेट खाने का मजा लेते हुए उसे लिख रहा हूं। हमारी बातचीत में व्यासजी छाए रहे और उसने कई स्थानों पर मिलने वालों से उनका नाम लेने की सलाह दी।

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