देश की ईंधन मांग जुलाई में 7.3 प्रतिशत बढ़ी

नई दिल्ली देश में ईंधन की मांग जुलाई में 7.3 प्रतिशत बढ़ गई। पेट्रोल और डीजल की खपत बढ़ने से कुल ईंधन मांग में इजाफा हुआ। पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के अनुसार जुलाई में ईंधन की कुल खपत 1.70 करोड़ टन रही, जो एक साल पहले इसी महीने में 1.58 करोड़ टन थी।

इससे पहले जून में ईंधन की मांग 8.6 प्रतिशत बढ़कर 1.79 करोड़ टन पर पहुंच गई। जुलाई में पेट्रोल की बिक्री 7.8 प्रतिशत बढ़कर 23 लाख टन रही, जबकि डीजल की खपत 4.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 66 लाख टन पर पहुंच गई।

इससे पिछले महीने पेट्रोल की बिक्री 15 प्रतिशत रही थी, जबकि डीजल की मांग स्थिर रही थी। राजधानी दिल्ली में 29 मई को पेट्रोल के दामों में 3.8 रुपए प्रति लीटर और डीजल कीमतों में 3.38 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि हुई जिससे पेट्रोल के दाम 78.43 रुपए प्रति लीटर तथा डीजल के 69.31 रुपए प्रति लीटर की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए। हालांकि, उसके बाद पेट्रोल, डीजल कीमतें नीचे आईं।

जुलाई के अंत तक पेट्रोल के दाम 76.31 रुपए प्रति लीटर तथा डीजल के 67.82 रुपए प्रति लीटर पर आ गए थे। कीमतों में कमी एक प्रमुख वजह है जिससे पेट्रोल व डीजल की मांग बढ़ी है। उसके बाद पेट्रोल और डीजल कीमतों में मामूली वृद्धि हुई है और अब यह क्रमश: 77.23 रुपए और 68.77 रुपए प्रति लीटर पर हैं। जुलाई महीने में विमान ईंधन एटीएफ की बिक्री 12.7 प्रतिशत बढ़कर 6,72,000 टन रही। सरकार स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए एलपीजी के उपयोग को प्रोत्साहन दी है।

गरीब महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन मुफ्त दिए जा रहे हैं। समीक्षाधीन महीने में एलपीजी या रसोई गैस की मांग छह प्रतिशत बढ़कर 20.4 लाख टन पर पहुंच गई। वहीं एलपीजी की मांग बढ़ने से मिट्टी के तेल की खपत कम हुई। जुलाई में केरोसिन की मांग 7.8 प्रतिशत घटकर 2,92,000 टन रही। नाफ्था की बिक्री जुलाई में छह प्रतिशत बढ़कर 11.4 लाख टन पर पहुंच गई, वहीं पेट्रोलियम कोक की बिक्री दो प्रतिशत की वृद्धि के साथ 22 लाख टन रही।

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