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सार्वजनिक उपक्रमों को शेयर धारिता नियम का समय मिला

नई दिल्ली । सरकार ने सूचीबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र उपकमों के लिए न्यूनतम 25 प्रतिशत सार्वजनिक शेयरधारिता नियम को पूरा करने के लिए अगस्त, 2018 तक का समय दे दिया है। वित्त मंत्रालय ने इस बारे में आदेश जारी किया है। सार्वजनिक उपक्रमों को इस नियम को पूरा करने के लिए सरकार ने और समय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा थोक में शेयर बिक्री पेशकश से बचने के लिए दिया है। इसके अलावा इससे सरकार को सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपयुक्त समय के बारे में तय करने का भी अवसर मिलेगा। इनमें कई बडी सरकारी कंपनियां शामिल हैं। मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि सरकार इस को लेकर स्पष्ट है कि हिस्सेदारी बिक्री प्रतिकूल कीमतों पर न की जाए। वहीं इसके साथ ही यह भी संभावना है कि प्रतिद्वंद्वी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भी उसी दौरान अपनी शेयर बिक्री पेशकश ला सकती है।
वित्त मंत्रालय ने पिछले सप्ताह प्रतिभूति अनुबंध :नियमन: नियम, 1957 को संशोधित कर केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों :सीपीएसई: को सितंबर, 2014 से न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी नियम को पूरा करने के लिए चार साल का समय दिया है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड :सेबी: ने सभी सूचीबद्ध कंपनियों के लिए 25 प्रतिशत सार्वजनिक हिस्सेदारी को अनिवार्य कर दिया है। यह नियम सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को भी पूरा करना होगा। इसके लिए उन्हें शुरआत में तीन साल का समय दिया गया है। सितंबर, 2014 में अधिसूचित तीन साल की समयसीमा 21 अगस्त, 2017 को पूरी हो रही है। छह सार्वजनिक उपक्रमों हुडको, कोल इंडिया, हिंदुस्तान कॉपर, एसजेवीएनएलअ, एमएमटीसी और नेवेली लिग्नाइट ने अभी तक सार्वजनिक हिस्सेदारी नियम को पूरा नहीं किया है। समझा जाता है कि वित्त मंत्रालय ने सेबी पर सार्वजनिक उपक्रमों को इसके लिए और समय देने को कहा था।

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