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Antiga test match: वेस्टइंडीज ने दूसरी पारी में बनाए 258 रन, श्रीलंका को मिला 377 रनों का लक्ष्य

एंटीगा। वेस्टइंडीज ने सर विवियन रिचडर्स स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन दूसरी पारी में चार विकेट पर 280 रन बनाकर पारी घोषित की कप्तान क्रैग ब्रैथवेट (85), Jason Holder (नाबाद 71) और काइल मायर्स (55) की शानदार पारियों से West Indies ने दूसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन दूसरी पारी में चार विकेट पर 280 रन बनाकर पारी घोषित की और Sri Lanka को 377 रनों का लक्ष्य दिया। Sri Lanka ने पहली पारी में 258 रन बनाए और विंडीज को 96 रनों की बढ़त हासिल हुई।

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लक्ष्य का पीछा करने उतरी Sri Lanka की टीम ने दिन का खेल खत्म होने तक बिना विकेट खोए 29 रन बना लिए हैं और उसे अभी कुल 348 रन और बनाने हैं। स्टंप्स तक लाहिरू तिरिमाने 29 गेंदों पर तीन चौकों की मदद से 17 रन और Captain Dimuth Karunaratne 26 गेंदों पर एक चौके के सहारे 11 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं।

इससे पहले, चौथे दिन Sri Lanka ने पहली पारी में आठ विकेट पर 250 रन से आगे खेलना शुरू किया। पाथुम निसंका ने 49 और लसित एम्बुलडेनिया ने खाता खोले बिना अपनी पारी को आगे बढ़ाया।

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निसंका ने अपना अर्धशतक पूरा किया लेकिन इसके बाद वह ज्यादा देर अपनी पारी को आगे नहीं बढ़ा सके और अपना विकेट गंवा बैठे। निसंका ने 131 गेंदों पर चार चौकों की मदद से 51 रन बनाए।

निसंका के आउट होने के तुरंत बाद विश्वा फर्नाडो भी आउट हो गए और Sri Lanka की पहली पारी जल्द ही सिमट गई। एम्बुलडेनिया पांच रन बनाकर नाबाद रहे। Sri Lanka को पहली पारी में ढेर करने के बाद उतरी विंडीज की पारी में ब्रैथवेट ने 196 गेंदों पर चार चौकों के सहारे 85 रन, होल्डर ने 88 गेंदों पर सात चौकों की मदद से नाबाद 71 और मायेर्स ने 76 गेंदों पर आठ चौकों के सहारे 55 रन बनाए जबकि जोशुआ डी सिल्वा 20 रन बनाकर नाबाद रहे। श्रीलंका की ओर से सुरंगा लकमल ने दो विकेट और दुशमंता चमीरा ने दो विकेट लिया।

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बेबाक विचार | डा .वैदिक कॉलम

यह कैसा धर्मांतरण है ?

Conversion

उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते ने धर्मांतरण के एक बहुत ही घटिया षड़यंत्र को धर दबोचा है। ये षड़यंत्रकारी कई गरीब, अपंग, लाचार और मोहताज़ लोगों को मुसलमान बनाने का ठेका लिये हुए थे। इन मजहब के दो ठेकेदारों— उमर गौतम और जहांगीर आलम कासमी— को गिरफ्तार किए जाने के बाद पता चला है कि उन्होंने एक हजार लोगों को मुसलमान बनाया है।कैसे बनाया है ? उन्हें कुरान शरीफ के उत्तम उपदेशों को समझा कर नहीं, इस्लाम के क्रांतिकारी सिद्धांतों को समझाकर नहीं और पैगंबर मोहम्मद के जीवन के प्रेरणादायक प्रसंगों को बताकर नहीं, बल्कि लालच देकर, डरा-धमकाकर, हिंदू धर्म की बुराईयां करके। नोएडा के एक मूक-बधिर आवासी स्कूल के बच्चों को फुसलाकर योजनाबद्ध ढंग से उनका धर्मांतरण करवाया गया और उनकी शादी मुस्लिम लड़कियों से करवा दी गई।

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यह काम सिर्फ दिल्ली और नोएडा में ही नहीं हुआ, महाराष्ट्र, केरल, आंध्र, हरियाणा और उत्तरप्रदेश में भी इस षड़यंत्र के तार फैले हुए हैं। इस घटिया काम की जांच में यह पाया गया कि उन्हें भरपूर पैसा भी मिलता रहा। इस पैसे के स्त्रोत आईएसआईएस और कुछ अन्य विदेशी एजेन्सियां भी रही हैं। इस राष्ट्रविरोधी काम को अंजाम देने का खास जिम्मा उठा रखा था, उमर गौतम ने। इसका असली नाम श्यामप्रकाश सिंह गौतम था। इसने एक मुसलमान लड़की से शादी की और कुछ वर्ष पहले मुसलमान बनने पर धर्मांतरण का काम जोर-शोर से शुरु कर दिया।

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Religious Conversion For Five Lakh - मात्र पांच लाख रुपए के लिए हिंदू से बन  गया ईसाई | Patrika News

गौतम से कोई पूछे कि तुम खुद मुसलमानों क्यों बने थे? क्या इस्लाम की अच्छाइयों या पैगंबर के जीवन से प्रेरणा लेकर तुम मुसलमान बने थे ? जितने लोगों को तुमने मुसलमान बनाया है, क्या वे इस्लाम के सिद्धांतों को समझते हैं और क्या वे अपने जीवन में उनका पालन करते हैं ? यदि कोई व्यक्ति किसी मजहब के सिद्धांतों को समझ कर अपना धर्म-परिवर्तन करता है तो उसका यह अधिकार है। ऐसा करने से उसे कोई रोक नहीं सकता लेकिन जोर-जबर्दस्ती, लालच और वासना के कारण जो धर्मांतरण होता है, वह निकृष्ट कोटि का अधर्म है।

खुद कुरान शरीफ के अध्याय 2 और आयत 256 में कहा गया है कि ‘‘मजहब में जबर्दस्ती का कोई स्थान नहीं है।’’ जो धर्मांतरण गौतम और कासमी करते रहे हैं, क्या वह इस कसौटी पर खरा उतरता है? महर्षि दयानंद, स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी ने भी ईसाई पादरियों द्वारा किए जा रहे धर्म-परिवर्तन का कड़ा विरोध किया था। वास्तव में यह धर्मांतरण नहीं, धर्म का कलंकरण है। भारत के कई राज्यों ने ऐसे अनैतिक धर्मांतरण के विरुद्ध कठोर कानून बना रखे हैं।

ऐसे ही कानून के तहत उक्त लोगों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है। वास्तव में ऐसे धर्मांतरण में धर्म कम, राजनीति ज्यादा होती है। अंग्रेज ने अपनी राजनीतिक सत्ता मजबूत करने के लिए जैसे ईसाइयत को साधन बनाया था और तुर्कों व मुगलों ने इस्लाम का इस्तेमाल किया था, वैसे ही आजकल कई छुटभय्ये अपनी तुच्छ स्वार्थ-सिद्धि के लिए मजहब का इस्तेमाल करते रहते हैं।

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