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रंगारंग लेकिन सादगी भरे समारोह के साथ एशियाई खेलों का आगाज

जापान ने शनिवार को एशियाई खेलों के सादगीपूर्ण लेकिन रंगारंग उद्घाटन समारोह में अपनी तकनीकी और औद्योगिक ताकत के साथ-साथ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की जिसने प्रतियोगिता से पहले की अव्यवस्थाओं और लॉजिस्टिक्स समस्याओं के बीच एक उम्मीद की किरण दिखाई।

अगले 15 दिनों तक 45 देशों के करीब 11,000 खिलाड़ी 43 खेलों और 71 स्पर्धाओं में हिस्सा लेंगे। इस दौरान कुल 469 स्वर्ण पदकों के लिए मुकाबला होगा और खेलों का समापन चार अक्टूबर को होगा। बास्केटबॉल, फुटबॉल, क्रिकेट समेत कुछ अन्य खेलों की स्पर्धाएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं।

‘हार्मोनिक हार्ट बीट’ थीम के साथ जापान ने अपने इतिहास में तीसरी बार एशियाई खिलाड़ियों का स्वागत किया। इससे पहले 1958 में तोक्यो और 1994 में हिरोशिमा में एशियाई खेलों का आयोजन हुआ था।

उद्घाटन समारोह का मुख्य आकर्षण दिल के आकार का मुख्य मंच रहा जिसे ‘वन एशिया’ की थीम को दर्शाने के लिए तैयार किया गया था। यह पूरे महाद्वीप के खिलाड़ियों और लोगों के एक-दूसरे से दिल से जुड़ने का प्रतीक था।

30,000 दर्शकों की क्षमता वाले खचाखच भरे मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में आयोजित इस शानदार समारोह में आइची की औद्योगिक तकनीक और पारंपरिक कला का अनूठा मेल देखने को मिला। पारंपरिक जापानी काबुकी मंच के साथ एक विशाल रोबोटिक भुजा को झंडा लहराते हुए दिखाया गया।

दो घंटे के उद्घाटन समारोह के बीच में जापान के सम्राट नारुहितो ने 20वें एशियाई खेलों के शुरू होने की घोषणा की। इस मौके पर महारानी मासाको, एशिया की ओलंपिक परिषद के अध्यक्ष शेख जोआन बिन हमद अल थानी और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की अध्यक्ष कर्स्टी कोवेंट्री भी मौजूद रहीं।

आइची प्रांत में टोयोटा मोटर कॉरपोरेशन का मुख्यालय होने के कारण समारोह में कंपनी से जुड़ी तकनीकी उपलब्धि की झलक भी दिखाई गई। टोयोटा द्वारा तोक्यो 2020 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों के लिए विकसित कम गति वाले विशेष परिवहन वाहन ‘एपीएम’ (एक्सेसिबल पीपल मूवर) ने समारोह में प्रमुख भूमिका निभाई।

हालांकि इस बड़े बहु-खेल प्रतियोगिता की तैयारियां कई प्रशासनिक चूकों, लॉजिस्टिक समस्याओं और तंग आवास व्यवस्था से प्रभावित रहीं। इसके चलते आयोजन समिति और एशियाई ओलंपिक परिषद को लगातार सफाई देनी पड़ी।

इन अव्यवस्थाओं से जापान की छवि को भी नुकसान पहुंचा जबकि वह पहले 2002 में फीफा विश्व कप के अलावा 1964 और 2021 में ओलंपिक जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की सफल मेजबानी कर चुका है।

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स्टार निशानेबाज मनु भाकर और कबड्डी खिलाड़ी पवन सहरावत की अगुवाई में भारत ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच खिलाड़ियों की परेड में प्रवेश किया। गहरे नीली (नेवी ब्लू) साड़ी और बंदगले की औपचारिक जैकेट पहने मनु दर्शकों का अभिवादन करती नजर आईं। उन्होंने सहरावत के साथ 150 सदस्यीय भारतीय दल की अगुवाई की।

भारतीय पुरुष खिलाड़ियों ने भी गहरे नीले रंग की बंदगले की औपचारिक जैकेट और उससे मेल खाती पतलून पहनी थी।

खिलाड़ियों की परेड में एशियाई ओलंपिक परिषद की शरणार्थी टीम के दो खिलाड़ी मेजबान जापान से ठीक पहले शामिल हुए। परंपरा के अनुसार 46 दलों की परेड में जापान सबसे अंत में आया।

जापान के प्रवेश के दौरान सबसे ज्यादा उत्साह देखने को मिला। मेजबान देश इस बार 900 से अधिक खिलाड़ियों के साथ सबसे बड़ा दल उतार रहा है।

‘अवेकनिंग ऑफ द स्पेस एंड द रेजोनेंट हार्ट बीट’ नामक स्वागत कार्यक्रम के साथ समारोह की शुरुआत हुई। जापान के लोकप्रिय वायलिन वादक और संगीतकार तारो हाकासे ने खेल महोत्सव के अनुरूप जोशीली धुनें प्रस्तुत कीं। रोशनी और लेजर से पूरा स्टेडियम जगमगा उठा।

चमचमाता हुआ 10 मीटर ऊंचा झंडा प्रतियोगिता की शुरुआत का संकेत देते हुए ऊपर उठा। दिल के आकार के पंखों वाले ड्रोन स्टेडियम के चारों ओर चमकते हुए उड़ते नजर आए और पूरा परिसर उद्घाटन समारोह की थीम ‘दिल की दुनिया’ में बदल गया। इसके साथ कलाकारों ने स्वागत नृत्य भी प्रस्तुत किया।

हाकासे के वायलिन वादन के साथ नागोया और आइची के अन्य हिस्सों से आए 240 स्थानीय कलाकार मंच के नीचे से बाहर निकले। चार अलग-अलग रंगों में बंटे कलाकारों ने बार-बार एक साथ आकर और अलग होकर विभिन्न आकृतियां बनाईं जो जीवन के आपसी जुड़ाव और धड़कन को दर्शाती थीं। अंत में कलाकारों ने मिलकर ‘वेलकम’ (डब्ल्यूएईएलसीओएमई) शब्द की आकृति बनाई जो मेहमाननवाजी का संदेश था।

इसके बाद जापान का राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और राष्ट्रगान बजाया गया। इसके साथ ही खिलाड़ियों की परेड शुरू हो गई।

Pic Credit : UNI

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