विश्व कप रद्द करना भी हो सकता है एक विकल्प: संगकारा - Naya India
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विश्व कप रद्द करना भी हो सकता है एक विकल्प: संगकारा

कोलंबो। श्रीलंकाई क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) के अध्यक्ष कुमार संगकारा ने वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण इस वर्ष टी-20 विश्व कप के आयोजन पर मंडरा रहे खतरे को लेकर कहा है कि टूर्नामेंट के आयोजन को स्थगित करने के निर्णय को लेकर अभी इंतजार करना होगा और टूर्नामेंट को इस साल रद्द करना भी एक विकल्प हो सकता है।

संगकारा ने कहा, कोरोना वायरस को लेकर फ़िलहाल स्थिति बिलकुल भी स्पष्ट नहीं है। क्या यह सार्स या मेर्स वायरस की तरह गायब हो जाएगा या फिर यह कुछ ऐसा है जो मौसम के अनुसार वापस आने वाला है।

क्या हमें कुछ समय के लिए इस वायरस के साथ जीना होगा या यह लंबे समय तक चलने वाला है। उन्होंने कहा, अगर कोरोना वायरस लंबे समय तक चलने वाला है तो जो ख़ास बदलाव अभी हमने अपने जीवन में किये हैं और बाद में वे हमारी दिनचर्या बन जायेंगे जब तक कि कोरोना के टीके का ईजाद नहीं हो जाता।

पूर्व कप्तान ने कहा, यह कुछ ऐसे सवाल हैं जिसका फिलहाल मुझे नहीं लगता कोई जवाब दे सकता है। समय के साथ हमें इसके बारे में और जानकारी मिलेगी। लेकिन विश्व कप के लिए विकल्पों में इसे इस साल रद्द किया और अगले साल के लिए स्थगित किया जाए। खिलाड़ियों और दर्शकों की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है।

उन्होंने कहा, इसके आलवा भी बहुत सवाल है जिनका शीर्ष विशेषज्ञों के पास भी कोई जवाब नहीं हैं। इस वायरस को लेकर प्रति दिन कोई नयी बात सामने आ रहे है इसलिए मुझे लगता है कि हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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