खेल समाचार

आस्ट्रेलियन ओपन से हटे मरे

लंदन। तीन बार के ग्रैंड स्लैम विजेता ब्रिटेन के एंडी मरे ने आस्ट्रेलियन ओपन से हटने का फैसला किया है। आठ फरवरी से शुरू होने जा रहे साल के पहले ग्रैंड-स्लैम आस्ट्रेलियन ओपन के लिए मरे को वाइल्ड कार्ड दिया गया था। लेकिन टूर्नामेंट के लिए रवाना होने से पहले ही वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे और उन्होंने क्वारंटीन में रहने के बजाय अपने घर पर ही पृथकवास पर रहने का फैसला था। लेकिन वह अभी तक इससे उबर नहीं पाए हैं।

मरे ने कहा, आस्ट्रेलियन ओपन में हिस्सा नहीं ले पाने की खबर को साझा करने से मैं बहुत दुखी हूं। हम टेनिस ऑस्ट्रेलिया के साथ लगातार संपर्क में थे और कोशिश कर रहे थे कि क्वारंटाइन के लिए कुछ हल निकाला जाए, लेकिन हम ऐसा कर पाने में सफल नहीं रहे। मैं सभी लोगों का उनके प्रयास के लिए शुक्रिया अदा करता हूं।

आस्ट्रेलियाई ओपन के लिए खिलाड़ियों और उनके सहयोगी स्टाफ के लिए आस्ट्रेलिया पहुंचने पर 14 दिन पर पृथकवास पर रहना अनिवार्य है। पांच बार के उपविजेता मरे को आस्ट्रेलियन ओपन-2019 के पहले राउंड में पांच सेटों तक चले मुकाबले में स्पेन के रोबरटो बटिस्टा अगुट से हार का सामना करना पड़ा था।

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कोविड-19 अपडेटस | लाइफ स्टाइल

Corona से सिकुड़ रहे इंसानों के दिमाग के कई हिस्से, नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने किया खुलासा

नई दिल्ली। Coronavirus Damage Brain : दुनिया में कोहराम मचा रही कोरोना वायरस की महामारी अब और जटिल होती जा रही है। कोरोना की पहली से भी ज्यादा खतरनाक उसकी दूसरी लहर रही। कोविड-19 वायरस फेफड़ों और दिल पर तो असर करता ही है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक नई स्टडी के बाद नया खुलासा किया है जिसके अनुसार, कोरोना वायरस दिमाग पर भी बहुत बुरा आघात करता है। कोविड लोगों पर सिर्फ तनाव ही नहीं छोड़ रहा, बल्कि दिमाग के कई हिस्सों को सिकुड़ भी रहा हैं।

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कम बीमारी के बावजूद दिमाग पर गहरा असर
वैज्ञानिकों ने पहली बार कोविड-19 से पहले और बाद में दिमाग के स्कैन को स्टडी करने पर पाया कि, थोड़ी गंभीर बीमारी होने पर भी दिमाग पर गहरा असर देखा गया। हारवर्ड मेडिकल स्कूल की फिजिशन डॉ. अदिति नेरूरकर के मुताबिक, ब्रिटेन के वैज्ञानिकों की एक टीम ने यह स्टडी कर पता लगाया है कि कोरोना के बाद लिंबिक कॉर्टेक्स, हिपोकैंपस और टेंपोरल लोब सिकुड़ते पाए गए। दिमाग के इन हिस्सों से गंध/स्वाद, याद्दाश्त और भावनाएं नियंत्रित होती हैं। जबकि ये बदलाव ऐसे लोगों में सामने आए जिन्हें बीमारी कम थी और उन्हें अस्पताल में भी एडमिट नहीं होना पड़ा था।

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40 हजार लोगों का किया ब्रेन स्कैन
ब्रिटेन बायोबैंक ने संक्रमण की शुरुआत में 40 हजार लोगों का ब्रेन स्कैन किया था। 2021 में इनमें से 782 को दोबारा बुलाया गया। इन लोगों में से 394 कोरोना पॉजिटिव रह चुके थे। इनके दिमाग की बनावट और काम करने की प्रक्रियाओं को स्कैन किया गया तो नतीजों में दिमाग के कुछ हिस्से सिकुड़े पाए गए।

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डेल्टा प्लस वेरिएंट कितना खतरनाक, डॉक्टर्स के पास नहीं कोई जानकारी!
वहीं दूसरी और अब कोरोना का डेल्टा प्लस वेरिएंट कितना खतरनाक होगा, इस बारे में डॉक्टर्स को भी कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। एम्स के डॉक्टर के अनुसार, डेल्टा प्लस में अतिरिक्त म्यूटेंट K417N है, जो डेल्टा (B.1.617.2) को डेल्टा प्लस में बदल देता है। उन्होंने कहा कि ऐसी अटकलें हैं कि यह म्यूटेंट अधिक संक्रामक है और यह अल्फा संस्करण की तुलना में 35-60 फीसदी ज्यादा संक्रामक है। हालांकि, भारत में इसकी संख्या बहुत कम है।

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