खेल समाचार

भारतीय पुरुष-महिला हॉकी टीमें 2021 के लिए तैयार

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के टोक्यो ओलंपिक 2021 की नयी तारीखों की घोषणा के बाद भारतीय पुरुष औऱ महिला हॉकी टीमों का कहना है कि वे ओलंपिक के लिए तैयार है और उस पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

आईओसी ने टोक्यो ओलंपिक 2021 की नयी तारीखों की सोमवार को घोषणा की थी। ओलंपिक का आयोजन 23 जुलाई से आठ अगस्त 2021 तक होगा। इन खेलों का आयोजन इस वर्ष 24 जुलाई से होना था लेकिन कोरोना वायरस के खतरे के कारण इन्हे स्थगित कर दिया गया था।

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हॉकी इंडिया के अध्यक्ष मोहम्मद मुश्ताक अहमद ने कहा, “ओलंपिक की तारीखों की घोषणा होने से हमें तैयारी और योजना बनाने में आसानी होगी। हम ओलंपिक के लिए क्वालीफाई पहले से ही कर चुके हैं ऐसे में यह हमारे लिए आसान होगा। हम भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) और खेल मंत्रालय के साथ मिलकर कार्य़ कर रहे हैं जिससे पुरुष तथा महिला टीमों का प्रदर्शन बेहतर हो सके।”

मुश्ताक अहमद ने कहा, “अभी के हालात में हम इस बारे में नहीं बता सकते कि टीम किस टूर्नामेंट में खेलेगी। हालांकि पुरुष और महिला दोनों टीमें बेंगलुरु में सुरक्षित हैं और उनके साथ कोच तथा सहायक स्टाफ भी वहां है। हालात सुधरने पर टीमें ट्रेनिंग शुरु करेंगी।” भारतीय पुरुष टीम के कोच ग्राहम रीड ने कहा, “ओलंपिक खेलों की नयी तारीख सामने आना बेहतर है। इससे पहले अगले साल होने वाले ओलंपिक की तैयारियां करने में मदद मिलेगी।

यह कठिन दौर गुजरने के बाद हमें जल्द ही मैदान पर उतरने की उम्मीद है।” महिला टीम की कोच शुअर्ड मरिने ने कहा, “यह अच्छा है कि हमें पता चल गया कि ओलंपिक कब शुरु होंगे और इसको लेकर अपनी तैयारियां शुरु कर सकते हैं। इस वक्त हम सभी एक ही शिविर में है और ओलंपिक की नयी तारीखें हमारे लिए अच्छी खबर है। हम मानसिक और शारीरिक तौर पर मजबूत हो रहे हैं और जल्द ही मैदान पर वापसी करना चाहते हैं।”

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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राजनीति

महाराष्ट्र में चुनाव की क्या जल्दी है?

देश में कोरोना वायरस से सर्वाधिक संक्रमित राज्य महाराष्ट्र है। देश में मिले तीन करोड़ संक्रमितों में से अकेले महाराष्ट्र में 60 लाख के करीब संक्रमित मिले हैं और देश में चार लाख के करीब हुई मौतों में से एक लाख 18 हजार मौतें महाराष्ट्र में हुई हैं। फिर भी महाराष्ट्र में स्थानीय निकायों के कुछ उपचुनावों की घोषणा हो गई है। सोचें, स्थानीय निकायों के चुनाव के बगैर क्या बिगड़ा जा रहा है? महाराष्ट्र के राज्य चुनाव आयोग ने धुले, नंदूरबार, वाशिम, अकोला और नागपुर जिला परिषद के चुनावों की घोषणा की है और साथ ही 33 पंचायत समितियों के चुनाव का भी ऐलान कर दिया है। आयोग के मुताबिक 19 जुलाई को मतदान होगा और 20 जुलाई को वोटों की गिनती होगी।

सोचें, बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव छह महीने टाल गिए हैं और पुराने प्रतिनिधियों को भी विस्तार दे दिया गया है। कर्नाटक में भी स्थानीय निकाय चुनाव टल गए हैं और ओड़िशा में भी चुनाव टलने वाले हैं। इन तीनों राज्यों में निकायों का कार्यकाल पूरा हो गया है और अभी चुनाव होने वाले थे। इसके उलट महाराष्ट्र में उपचुनाव होना है, जिसके नहीं होने से निकायों के कामकाज पर कोई खास असर नहीं होना है। फिर भी प्रदेश चुनाव अधिकारी के कार्यालय ने चुनाव कार्यक्रमों का ऐलान कर दिया। ध्यान रहे अब भी महाराष्ट्र में आठ से नौ हजार केसेज रोज आ रहे हैं और सैकड़ों लोग मर रहे हैं। फिर भी हैरानी की बात यह है कि प्रदेश की किसी भी पार्टी ने कोरोना महामारी की वजह से चुनाव टालने की मांग नहीं की है, बल्कि पार्टियां इस आधार पर चुनाव का विरोध कर रही हैं कि जब तक ओबीसी आरक्षण बहाल नहीं होता है तब तक चुनाव नहीं होने देंगे।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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