Lovlina Borgohain ने पदक पक्का किया, SURMENELI Busenaz से मुकाबला
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कोरोना को हराकर आईं लवलीना बोर्गोहेन ने टोक्यो में भारत के लिए पदक पक्का किया, अब विश्व चैम्पियन SURMENELI Busenaz से मुकाबला

Both sisters in the service of the country

टोक्यो | टोक्यो ओलंपिक 2020 के सेमिफाइनल में लवलीना बोरगोहेन ( Lovlina Borgohain ) का मुकाबला सेमीफाइनल ( Tokyo Olympic 2020 ) में विश्व चैम्प्यिन बुसेनाज़ सुरमेनेली से होगा। मैरी कॉम और विजेंदर सिंह ( MC Mary Kom and Vijender Singh ) एकमात्र भारतीय मुक्केबाज हैं जिन्होंने पहले भारत के लिए ओलंपिक पदक जीता है। अब उसका मुकाबला सुरमेनेली बुसेनाज़ी SURMENELI Busenaz से होगा जो विश्व की नम्बर एक मुक्केबाज है। बुसेनाजी अब तक ओलंपिक में अपने दोनों मुकाबले एकतरफा जीते हैं। पिछले साल कोरोना वायरस से पीड़ित होने के बावजूद लवलीना का हौसला नहीं डिगा और उसने अपने आपको ओलंपिक के लिए तैयार किया। Lovlina Borgohain SURMENELI Busenaz match.

भारतीय मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने क्वार्टर फाइनल में चीनी ताइपे की पूर्व विश्व चैंपियन चेन निएन-चिन को हराकर टोक्यो ओलंपिक 2020 में महिलाओं के 69 किग्रा वर्ग में पदक सुनिश्चित कर लिया है। लवलीना बोर्गोहेन सेमीफाइनल में शीर्ष वरीयता प्राप्त तुर्की की बुसेनाज़ सुरमेनेली से भिड़ेंगी और फाइनल में जाने की कोशिश करेंगी। सेमिफाइनल में हारने वाले को भी कांस्य पदक मिलता है। लवलीना एमसी मैरी कॉम (लंदन 2012 में कांस्य) के बाद ओलंपिक पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बनेगी।

यह है अगली प्रतिद्वंद्वी
टर्की की SURMENELI Busenaz अब लवलीना के सामने अगली चुनौती है। तीन दिन बाद होने वाले इस मुकाबले में यदि लवलीना अपने आपको साबित कर देती है तो वह भारत के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा देगी। सुरमेनेली विश्व की नम्बर एक मुक्केबाज है और वह 23 वर्ष की है। 172 सेमी की उंचाई वाली से लवलीना पांच सेमी लम्बी है। इस लम्बाई का फायदा उन्हें मिल सकता है। यदि वह सेफ खेलती हैं तो भी निश्चित तौर पर पॉइंट स्कोर करेंगी।

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23 वर्षीय लवलीना ने रेड कॉर्नर से लड़ते हुए रयोगोकू कोकुगिकन एरिना में 4:1 के विभाजन के फैसले से अपनी बाउट एकतरफा जीती। प्रतिद्वंद्वी को उसने 2018 विश्व चैंपियनशिप सेमीफाइनल सहित तीन प्रयासों में पहले कभी नहीं हराया था। परन्तु लवलीना बोर्गोहिन ने आक्रामक शुरुआत की। भारतीय ने पहले राउंड की शुरुआत में कुछ बॉडी वार किए। जैब और हुक कॉम्बो छोड़ दिया, लेकिन चेन निएन-चिन ने अंत में जवाब दिया। परन्तु वह जीतने में नाकाम रही।

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ऐसे चला मुकाबला
जजों ने लवलीना बोर्गोहेन के पक्ष में शुरुआती दौर में 3:2 का फैसला सुनाया। चीनी ताइपे की मुक्केबाज ने दूसरे दौर में बढ़त हासिल करने के लिए और अधिक आक्रामक चालों की कोशिश की, लवलीना बोर्गोहेन ने अपनी दूरी बनाए रखने के लिए अपनी ऊंचाई का अच्छी तरह से इस्तेमाल किया और उपयुक्त क्षणों में कुछ प्रभावी स्कोरिंग पंचों में फंस गए।

यह जजों के एंड-ऑफ-राउंड स्कोरकार्ड में भारतीय के लिए क्लीन स्वीप था। चेन को स्क्रिप्ट को पलटने के लिए तीसरे दौर की जबरदस्त जरूरत के साथ, लवलीना बोर्गोहेन अपने गेमप्लान पर टिकी रही और चेन के हताश हमलों को नकारने पर ध्यान केंद्रित किया और अपनी जीत और पदक सुनिश्चित किया। भारोत्तोलन में मीराबाई चानू के रजत के बाद यह टोक्यो में भारत का दूसरा पदक होगा। लवलीना ने राउंड ऑफ 16 में जर्मनी की नादिन एपेट्ज को हराया था।

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मिठाई के अखबार ने बदली जिंदगी

मूलत असम के गोलाघाट की रहने वाली है लवलीना। भारत के छोटे गाँवों-कस्बों से आने वाले कई दूसरे खिलाड़ियों की तरह ही 23 साल की लवलीना ने भी आर्थिक दिक्कतों के बावजूद ओलंपिक का रास्ता तय किया है। बचपन का एक किस्सा बताते हुए लवलीना की माता ममोनी बोरगोहेन ने बताया कि ‘एक बार लवलीना के पिता उनके लिए मिठाई लाए थे। मिठाई जिस अखबार में लपेटकर लाई गई थी लवलीना उसे पढ़ने लग गई। वहां उसने मुक्केबाज मोहम्मद अली के बारे में पढ़ा। तबसे लवलीना उनकी फैन हो गई और आदर्श मानते हुए बॉक्सिंग में कॅरियर बनाने की दिशा में तय कर लिया।

माता-पिता का नाम टिकेन और मामोनी बोरगोहेन है। पिता एक लघु-स्तरीय व्यापारी हैं। उन्हें अपनी बेटी की आकांक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक रूप से संघर्ष करना पड़ा। बड़ी जुड़वाँ बहनें लिचा और लीमा ने भी राष्ट्रीय पर किकबॉक्सिंग में भाग लिया किंतु उसे आगे जारी नहीं रख सकी। पहले बोरगोहेन ने भी करियर एक किक बॉक्सर के तौर पर शुरू किया था। परन्तु बाद में मौका मिलने पर मुक्केबाज़ी में परिवर्तित कर लिया। भारतीय खेल प्राधिकरण ने उनके हाई स्कूल बर्पथर हाई स्कूल में ट्रायल करवाया। जहाँ लवलीन ने भाग लिया। प्रसिद्ध कोच पदम बोरो ने उनके प्रतिभा को पहचाना और उनका चयन किया। बाद में उन्हें कोच शिव सिंह द्वारा प्रशिक्षण मिला।

कोरोना को हराकर आईं लवलीना Lovlina Borgohain SURMENELI Busenaz

  • बोरगोहेन के करियर का सबसे बड़ा अवसर तब आया। जब उन्हें 2018 के राष्ट्रमंडल में वेल्टरवेट मुक्केबाज़ी श्रेणी में भाग लेने के लिए चुना गया था। हालांकि क्वार्टरफाइनल में वह ब्रिटेन की सैंडी रयान एस हार गई थी।
  • इसी वर्ष फरवरी में हुए अंतराष्ट्रीय मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में लवलीना ने वेल्टरवेट श्रेणी में स्वर्ण जीता।
  • नवंबर 2017 में वियतनाम में हुए एशियाई मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में भी उन्होंने कांस्य पदक जीता।
  • जून 2017 में ही अस्थाना में आयोजित प्रेसिडेंट्स कप में कांस्य पदक अर्जित किया।
  • जून 2018 में बोरगोहेन ने मंगोलिया में उलानबातर में रजत पदक जीता।

  • सितम्बर 2018 में पोलैंड में 13वीं अन्तराष्ट्रीय सिलेसियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक अपने नाम किया।
  • इन्होंने नई दिल्ली में आयोजित ए०इ०बी०ए० महिला विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहाँ इन्होंने 23 नवंबर 2018 को वेल्टरवेट (69 कि०ग्रा०) श्रेणी के अंतर्गत कांस्य पदक जीता।
  • बोरगोहेन 3-13 अक्टूबर, उलन-उड़े, रूस, बिना किसी ट्रायल के, अपने दूसरे विश्व महिला मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप के लिए चुनी गई। हालांकि वह सेमी-फाइनल में 69 किलोग्राम श्रेणी में 2-3 से चीन की यांग लिउ से हार गई। उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।
  • मार्च 2020 में एशिया/ओसनिया ओलंपिक क्वालीफ़ायर मुक्केबाज़ी टूर्नामेंट 2020 में बोरगोहेन ने मुफतुनाखोंन मेलिएवा पर 5-0 से जीत के साथ 69 कि०ग्रा० में अपनी ओलंपिक बर्थ सुनिश्चित की। इसके साथ ही वह असम की अब तक की पहली महिला-खिलाड़ी बनी जिसने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया हो।
  • अक्टूबर 2020 में बोरगोहेन कोरोना-वायरस पॉजिटिव हो गई और अस्पताल में भरती हो गई और क्वारंटाइन होना पड़ा। जिसके कारण वह राष्ट्रिय ब्मुक्केबज़ टीम के साथ इटली यात्रा से चूक गई थी।

By Pradeep Singh

Experienced Journalist with a demonstrated history of working in the newspapers industry. Skilled in News Writing, Editing. Strong media and communication professional. Many Time Awarded by good journalism. Also Have Two Journalism Fellowship. Currently working with Naya India.

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