हालेप को हराकर मुगुरुजा फाइनल में पहुंचीं - Naya India
खेल समाचार| नया इंडिया|

हालेप को हराकर मुगुरुजा फाइनल में पहुंचीं

मेलबर्न। स्पेन की गरबाइन मुगुरुजा ने वर्ल्ड नंबर-3 रोमानिया की सिमोना हालेप को हराकर साल के पहले ग्रैंड स्लैम आस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में गुरुवार को प्रवेश कर लिया। मुगुरुजा पहली बार इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची है।

दो बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन मुगुरुजा ने महिला एकल के सेमीफाइनल में हालेप को 7-6, 7-5 से हराकर खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया। मुगुरुजा ढ़ाई साल बाद किसी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची हैं।

स्पेनिश खिलाड़ी ने दो घंटे पांच मिनट में यह मुकाबला अपने नाम किया। मुगुरुजा को इस टूर्नामेंट में कोई सीड नहीं मिली थी। 2014 के बाद से यह पहली बार है जब उन्हें किसी टूर्नामेंट में सीड नहीं दिया गया है। उन्होंने 2016 में फ्रेंच ओपन और 2017 में विंबलडन का खिताब जीता था। फाइनल में अब शनिवार को वर्ल्ड नंबर-32 मुगुरुजा का सामना 14वीं सीड अमेरिका की सोफिया केनिन से होगा।

केनिन ने अपने सेमीफाइनल मुकाबले में वर्ल्ड नंबर-1 आस्ट्रेलिया की एश्लेग बार्टी को 7-6, 7-5 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। मुगुरुजा ने इस जीत के बाद कहा, “मैं यह नहीं सोच रही थी कि मैं हारूंगी। एक समय ऐसा आता है जब आपके पास मौके होते हैं। मुझे पता था कि सिमोना के खिलाफ यह एक कड़ा मुकाबला होने वाला है। लेकिन मैंने कोर्ट पर अपनी पूरी ऊर्जा के साथ खेल रही थी।”

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

});