nayaindia Neeraj Chopra Story : गरीब किसान का बेटा लाया GOLD.....
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गरीब किसान का बेटा लाया GOLD, कभी भाला खरीदने के नहीं थे पैसे, YouTube से सीखा और रच दिया इतिहास – जानिए पूरा सफर

Neeraj Chopra Story :

Neeraj Chopra Story : भारत के इतिहास में आज का दिन लम्बे समय तक याद रखा जायेगा। और इसकी वजह हैं जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra wins Gold). जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics 2020) में गोल्ड मेडल जीतकर 140 करोड़ हिंदुस्तानियों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है. नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra Tokyo Olympics 2020) भारत के पहले एथलीट हैं जिन्होंने एथेलेटिक्स में भारत को पहली बार मेडल दिलाने का कारनामा किया है. नीरज ने ओलंपिक मेडल जीतने का ट्रेलर क्वालिफिकेशन राउंड में ही कर दिया था. जब उन्होंने अपने पहली कोशिश में ही 86.65 मीटर दूर भाला फेंक नंबर 1 पोजिशन के साथ फाइनल के लिए क्वालिफाई किया था. फाइनल में नीरज चोपड़ा एक बार फिर कमाल कर गए और उन्होंने मेडल के साथ करोड़ों खेल प्रेमियों का दिल भी जीत लिया. हर एथलीट की तरह नीरज चोपड़ा को भी ओलंपिक मेडल जीतने के लिए कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. एक गरीब किसान परिवार का ये बेटा कैसे टोक्यो में मेडल जीतने के काबिल बना, जानिए पूरी कहानी….

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नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra Gold Medal) की सफलता की कहानी वजन घटाने से शुरू होती है. 10-11 साल की उम्र में नीरज चोपड़ा का वजन काफी ज्यादा था. पिता और चाचा ने नीरज का वजन घटाने के लिए उन्हें पानीपत के शिवाजी स्टेडियम भेजा, जहां उन्हें कई खेल खिलवाए गए. नीरज चोपड़ा का वजन काफी ज्यादा था इसलिए वो ना तो तेज दौड़ पाते थे, ना ही लंबी छलांग और ऊंची छलांग लगाने का उनके अंदर दम था. एक दिन नीरज ने अपने दोस्तों के साथ घूमते हुए स्टेडियम में कुछ सीनियर खिलाड़ियों को भाला फेंकते देखा. नीरज ने भी मजाक-मजाक में भाला उठा लिया और इसे पूरी ताकत के साथ थ्रो किया. नीरज का जेवलिन थ्रो देखकर सभी दंग रह गए. 11 साल की उम्र में ही नीरज चोपड़ा ने भाले को 25 मीटर से ज्यादा दूर फेंक दिया. उसी दिन सभी को समझ आ गया कि नीरज चोपड़ा इसी खेल के लिए बना है. खुद नीरज चोपड़ा इस खेल से इतनी मोहब्बत कर बैठे कि वो रोजाना 7-8 घंटे भाला फेंकने की प्रैक्टिस करने लगे.

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गरीब किसान परिवार ने बनाया नीरज को चैंपियन

नीरज चोपड़ा ने भाला तो उठा लिया लेकिन अब उनके सामने सबसे बड़ी समस्या थी गरीबी. नीरज चोपड़ा एक किसान परिवार से हैं जिसकी आर्थिक स्थिति सही नहीं थी. नीरज चोपड़ा संयुक्त परिवार में रहते थे जिसमें कुल 17 सदस्य हैं. 17 सदस्यों का ये परिवार इतना गरीब था कि वो नीरज चोपड़ा को 7 हजार का भाला भी बमुश्किल दिला पाए. वैसे जेवलिन थ्रो के भाले की कीमत उस वक्त डेढ़ लाख रुपये थी. नीरज के हाथ में सस्ता भाला था लेकिन इसके बावजूद उनका हौसला बुलंद था. नीरज चोपड़ा ने भाला फेंकने की प्रैक्टिस शुरू की और वो घंटों इसका अभ्यास करने लगे.

नीरज चोपड़ा ने You Tube को बनाया कोच

नीरज चोपड़ा ने ऐसे भी दिन देखे जब उनके पास कोई कोच नहीं था लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. नीरज चोपड़ा बचपन से ही कभी हार ना मानने वाले शख्स थे. नीरज चोपड़ा ने You Tube पर वीडियो देख भाला फेंकने की ट्रेन्ंग ली. वो रोज वीडियो देखते और उसे मैदान में दोहराने की कोशिश करते. देखते ही देखते नीरज चोपड़ा यमुनानगर में ट्रेनिंग करने लगे जहां उनके करियर को पंख लगने शुरू हुए.

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वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में बजा नीरज चोपड़ा का डंका

नीरज चोपड़ा ने साल 2013 में वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में हिस्सा लिया. यूक्रेन में हुई इस प्रतियोगिता में नीरज चोपड़ा का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा. वो 19वें स्थान पर रहे और महज 66.75 मीटर दूर ही भाला फेंक सके. लेकिन 2 साल बाद वुहान में हुई एशियन चैंपियनशिप में नीरज ने 70.50 मीटर दूर भाला फेंक 9वां स्थान हासिल किया. साल 2016 में हुए साउथ एशियन गेम्स में नीरज चोपड़ा ने 82.23 मीटर दूर भाला फेंक गोल्ड मेडल हासिल किया. इसी साल नीरज चोपड़ा ने वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में 86.48 मीटर दूर भाला फेंक वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया. नीरज चोपड़ा गोल्ड जीते और लोग उनका नाम जानने लगे. 2017 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज चोपड़ा ने 86.47 मीटर दूर भाला फेंक देश के लिए गोल्ड मेडल जीता और 2018 में चोपड़ा ने एशियन गेम्स में 88.06 मीटर दूर भाला फेंक एक बार फिर गोल्ड जीता. ओलंपिक तक पहुंचने के लिए नीरज ने कई खतरनाक चोट और यहां तक कि कोविड-19 का सामना भी किया लेकिन इसके बावजूद इस एथलीट ने ओलंपिक में मेडल जीत देश का मान और सम्मान बढ़ाया.

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