रोनाल्ड कोमैन होंगे एफसी बार्सिलोना के नए मुख्य कोच - Naya India
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रोनाल्ड कोमैन होंगे एफसी बार्सिलोना के नए मुख्य कोच

मेड्रिड। नीदरलैंड्स के मौजूदा कोच रोनाल्ड कोमैन स्पेनिश क्लब एफसी बार्सिलोना के नए मुख्य कोच होंगे। बार्सिलोना के लिए खेल चुके पूर्व डिफेंडर कोमैन अब क्वीक सेटियन की जगह लेंगे, जिन्हें इसी हफ्ते उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया है।

बार्सिलोना क्लब के अध्यक्ष जोसेप मारिया बाटरेमू ने कल रात इस बात की पुष्टि की कि कोमैन अब क्लब के अगले मुख्य कोच होंगे।

बाटरेमू ने बार्सा टीवी से कहा, अगर कोई बदलाव नहीं होता है, तो हम कोमैन को अपने अगले कोच के रूप में घोषित करेंगे और वह इस टीम का नेतृत्व करेंगे। इन खिलाड़ियों को एक अलग प्रकार की परियोजना के साथ आगे बढ़ाया जाएगा, जिसका नेतृत्व एक ऐसा कोच करेगा जिसे सभी बार्का प्रशंसक जानते हैं। उन्होंने कहा, हम उन पर दांव लगा रहे हैं क्योंकि हम उन्हें बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। हम जानते हैं कि वह कैसे सोचते हैं और उनकी टीम कैसे खेलती है।

बतौर खिलाड़ी अपने फुटबाल करयिर के दौरान कोमैन बार्सिलोना के साथ चार ला लीगा खिताब जीत चुके हैं। साथ उन्होंने 1991-92 में यूरोपियन कप के फाइनल में विजयी गोल करके क्लब को प्रतियोगिता में पहली ट्रॉफी दिलाई थी। पूर्व डिफेंडर कोमैन ने बार्सिलोना के लिए 1989 से 1995 तक 350 मैच खेले।

सेटियन को बीते सप्ताह बायर्न म्यूनिख के हाथों चैम्पियंस लीग मुकाबले में 2-8 से मिली हार के बाद हटा दिया गया था। क्लब ने इस चौंकाने वाली हार के बाद निदेशकों की आपात बैठक बुलाई और सेटियन को पदमुक्त करने का फैसला किया। सेटियन इस साल 13 जनवरी को बार्सिलोना के मुख्य कोच बने थे। उनके सात महीने के कार्यकाल में टीम ने 16 मैच जीते, चार ड्रॉ खेले और पांच में उसे हार मिली।

By वेद प्रताप वैदिक

हिंदी के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले पत्रकार। हिंदी के लिए आंदोलन करने और अंग्रेजी के मठों और गढ़ों में उसे उसका सम्मान दिलाने, स्थापित करने वाले वाले अग्रणी पत्रकार। लेखन और अनुभव इतना व्यापक कि विचार की हिंदी पत्रकारिता के पर्याय बन गए। कन्नड़ भाषी एचडी देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने उन्हें भी हिंदी सिखाने की जिम्मेदारी डॉक्टर वैदिक ने निभाई। डॉक्टर वैदिक ने हिंदी को साहित्य, समाज और हिंदी पट्टी की राजनीति की भाषा से निकाल कर राजनय और कूटनीति की भाषा भी बनाई। ‘नई दुनिया’ इंदौर से पत्रकारिता की शुरुआत और फिर दिल्ली में ‘नवभारत टाइम्स’ से लेकर ‘भाषा’ के संपादक तक का बेमिसाल सफर।

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