Lovlina Borgohain's Journey : ओलंपिक से पहले मां की सर्जरी के कारण ट्रेनिंग से दूर रही, फिर भी धाकड़ लवलीना अब है पदक के पास
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लवलीना बोरगोहेन : ओलंपिक से पहले मां की सर्जरी के कारण ट्रेनिंग से दूर रही, फिर भी धाकड़ लवलीना अब है पदक के पास

Lovlina Borgohain's Journey

टोक्यो ओलंपिक का टूर्नामेंट चल रहे है। जिसमें भारत के कई एथलीट ने भाग लिया है। लेकिन गर्व की बात यह है कि इस बार महिलाओं ने ओलंपिक ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। आज सुबह ही लवलीना ने बॉक्सिंग में सेमीफाइनल में पहुंची है। निएन-चिन चेन नाम की जिस खिलाड़ी के ख़िलाफ़ लवलीना ने जीत पक्की की है। वो पूर्व विश्व चैम्पियन हैं और अब तक के कई मुक़ाबलों में लवलीना उनसे हारती आई हैं। ( Lovlina Borgohain’s Journey ) और आज लवलीना ने निएन-चिन चेन को हराकर एक मेडल पक्का किया है।लेकिन हमारी धाकड़ बॉक्सिंग लवलीना यहां तक कैसे पहुंची..आइये जानते है..

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पूर्वोत्तर राज्य असम से ओलंपिक खेलों तक जाने वाली लवलीना बोरगोहेन पहली महिला बॉक्सर हैं।  लवलीना 69 किलोग्राम वेल्टरवेट वर्ग में खेलती हैं। ( Lovlina Borgohain’s Journey ) भारत के छोटे गाँवों और कस्बों से आने वाले कई दूसरे अन्य खिलाड़ियों की तरह ही 23 साल की लवलीना भी आई है। लवलीना ने भी शुरुआत में कई आर्थिक समस्याओं का सामना किया और उन्हें हराकर ओलंपिक का रास्ता तय किया। लवलीना को माइक टाइसन का स्टाइल बेहद पसंद है तो मोहम्मद अली को भी लवलीना उतना ही पसंद करती है। लेकिन इन सबसे अलग लवलीना को अपनी अलग पहचान पर ध्यान था।

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किकबॉक्सिंग से बॉक्सर बनने का सफ़र

लवलीना बॉरगोहेन का जन्म  2 अक्तूबर 1997 को हुआ था। लवलीना के माता और पिता का नाम टिकेन और मामोनी बॉरगोहेन था। लवलीना के पिता टिकेन एक छोटे व्यापारी थे और अपनी बेटी की महत्वआकांक्षाओं और सपनों को पूरा करने के लिए पिता ने आर्थिक रूप से खूब संघर्ष करना पड़ा। लवलीना कुल तीन बहनें थीं तो समाज से कई बातें सुनने को मिलतीं थीं। पर इस सबको नज़रअंदाज़ कर दोनों बड़ी जुड़वां बहनें लिचा और लीमा किकबॉक्सिंग करने लगीं तो लवलीना भी किकबॉक्सिंग में जुट गईं। लवलीना की बहनें किकबॉक्सिंग में नेशनल चैंपियन बनीं लेकिन लवलीना ने अपने लिए कुछ और ही सोच रखा था। अपने सपने को पूरा करने के लिए लवलीना आगे बढ़ी। इसमें लवलीना का साथ घर वालों दिया। एक बार लवलीना के पिता अपने बच्चों के लिए घर में मिठाई लेकर आए तो मिठाई से लिपटे कागज में लवलीना को मोहम्मद अली की फ़ोटो दिखी। ( Lovlina Borgohain’s Journey ) उसी वक्त लवलीना के पिता से उनका परिचय सुना तो पिता ने मोहम्मद अली की दास्तां बेटी को सुनाई और फिर शुरू हुआ बॉक्सिंग का सफ़र।

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कम खिलाड़ी होने के कारण प्रैक्टिस में होती है समस्या ( Lovlina Borgohain’s Journey )

प्राइमरी स्कूल में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के ट्रायल हुए तो कोच पादुम बोरो की जौहरी नज़र लवलीना पर गई और 2012 से शुरू हो गया बॉक्सिंग का सफ़र। पाँच साल के अंदर अपनी मेहनत के कारण  वे एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य तक पहुँच गई थीं। लवलीना को भारत में एक अलग तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है। लवलीना के क्षेत्र में ना के बराबर महिला खिलाड़ी है। इस कारण लवलीना को प्रैक्टिस के लिए स्पारिंग पार्टनर (मुक्केबाज़ साथी) नहीं मिलते जिनके साथ वो प्रैक्टिस कर सकें। ( Lovlina Borgohain’s Journey ) कई बार उन्हें ऐसे खिलाड़ियों के साथ प्रैक्टिस करनी पड़ती है जो 69 किलोग्राम वर्ग से नहीं होते.

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ओलंपिक से पहले मां की सर्जरी और कोरोना महामारी

ओलंपिक में जाने से पहले के कुछ महीने लवलीना के लिए बेहद मुश्किल भरे थे।जहाँ हर एथलीट अपने गेम की ट्रेनिंग कर रहा था तो लवलीना पूरी प्रैक्टिस भी नहीं कर पायी थी। क्योंकि लवलीना की माँ का किडनी ट्रांसप्लांट होना था और वे माँ के साथ थीं। बॉक्सिंग से दूर। घर में टेंशन के माहोल के चलते लवलीना सही से प्रैक्टिस भी कर पायी थी। मां की सेहत का भी ध्यान रखना पड़ता था। इसके बाद भी लवलीना की दिक्कते बढ़ती गई। फिर आ गया कोरोना वायरस। कोचिंग स्टाफ़ के कुछ लोग संक्रमित थे। ( Lovlina Borgohain’s Journey ) तब उन्होंने वीडियो के ज़रिए ट्रेनिंग जारी रखी। अपने कमरे में ही लंबे समय तक ट्रनिंग की।

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2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स की आधिकारिक सूचना नहीं दी गई ( Lovlina Borgohain’s Journey )

लवलीना के करियर में बड़ा उछाल आया जब उन्हें 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए चुना गया। हालांकि तब इसे लेकर विवाद ज़रूर हुआ था कि लवलीना को इस बारे में कथित तौर पर आधिकारिक सूचना नहीं दी गई और अख़बारों से उन्हें पता चला। कॉमनवेल्थ में वो मेडल नहीं जीत पाईं लेकिन यहाँ से उन्होंने अपने खेल के तकनीकी ही नहीं मानसिक और मनोवैज्ञानिक पक्ष पर भी काम करना शुरू किया। परिणाम सबके सामने था। ( Lovlina Borgohain’s Journey )  2018 और 2019 में उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो बार कांस्य पदक जीता। कुछ दिन पहले मणिपुर की मीराबाई ने भारत को सिल्वर दिलाया था तो अब पूर्वोत्तर की ही लवलीना पदक के क़रीब हैं।

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असम में लवलीना का उत्साह

असम में लवलीना को लेकर उत्साह इतना है कि असम के मुख्यमंत्री और विपक्षी दलों के विधायक दोनों एकसाथ लवलीना के समर्थन में कुछ दिन पहले साइकिल रैली पर निकले थे। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के एक वीडियो में लवलीना ने बोला था कि उन्हें कम से कम दो बार तो ओलंपिक खेलना है और फिर प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग करनी है। ( Lovlina Borgohain’s Journey ) यानी अभी कम से कम एक और ओलंपिक का सफ़र और मेडल का सपना बाकी है।

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