भाजपा को अपना घर बचाने की चिंता

पिछले पांच साल से भाजपा नेतृत्व अपनी विरोधी पार्टियों के साथ जो कर रही थी वहीं अब उसके साथ होने लगा है। खबर है कि महाराष्ट्र में भाजपा के विधायक टूट रहे हैं। बताया जा रहा है कि ऐन चुनाव से पहले कांग्रेस, एनसीपी और शिव सेना छोड़ कर जो नेता भाजपा में गए थे वे अब वापस लौटना चाहते हैं। ऐसे विधायकों की संख्या एक दर्जन बताई जा रही है। सोचें, अगर एक दर्जन विधायक भाजपा छोड़ते हैं और विधानसभा से भी इस्तीफा देते हैं तो इसे क्या कहेंगे- रिवर्स ऑपरेशन कमल!

भाजपा अब तक ऑपरेशन कमल के तहत विरोधी पार्टियों के विधायकों के इस्तीफे कराती रही है। कर्नाटक में इसी ऑपरेशन के तहत भाजपा ने सरकार बनाने के लिए कांग्रेस और जेडीएस के 17 विधायकों का इस्तीफा कराया। अब इनमें से 15 सीटों पर उपचुनाव हुआ है, जिसके नतीजे नौ दिसंबर को आएंगे। इस बीच खबर है कि कर्नाटक में भाजपा के अपने नाराज विधायक पार्टी छोड़ना चाहते हैं। भाजपा ने येदियुरप्पा की सरकार बनाने के लिए कांग्रेस और जेडीएस के बागियों को मंत्री बनाने का वादा किया है। इसकी वजह से उसके अपने नेता मंत्री नहीं बन पा रहे हैं। ऐसे तमाम विधायक नाराज हैं और वहां भी रिवर्स ऑपरेशन कमल हो सकता है।

मध्य प्रदेश में तो इसकी शुरुआत हुई थी पर कांग्रेस के नेता इसे कायदे से संभाल नहीं सके। मध्य प्रदेश में भाजपा की टिकट से जीते दो विधायकों ने कांग्रेस का समर्थन किया था। नारायण त्रिपाठी और शरद कोली विधानसभा से इस्तीफा देकर कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने को भी तैयार थे। बदले में नारायण त्रिपाठी को मंत्री बनाना था पर कांग्रेस ने इस ऑपरेशन को आगे नहीं बढ़ाया। हो सकता है कि महाराष्ट्र और कर्नाटक के घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश में भी इसे आगे बढ़ाया जाए।

महाराष्ट्र में यह भी खबर है कि भाजपा के कम से कम एक राज्यसभा सांसद भी पाला बदलने को तैयार हैं। अब तक भाजपा सपा, कांग्रेस, टीडीपी, इनेलो जैसी पार्टियों के राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे करा रही थी या उनको तोड़ कर अपनी पार्टी में शामिल कर रही थी। अब उसके राज्यसभा सांसद के टूटने की खबर है। सो, ऐसा लग रहा है कि भाजपा का अपना दांव ही उस पर आजमाया जाने लगा है।

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