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‘रेल दो नहीं तो जेल दो’ आंदोलन जारी

रांची। वर्ष 2004 में रेल और कोयला मंत्रालय ने तय किया कि धनबाद-चंद्रपुरा रेलखंड पर परिचालन खतरनाक है, क्योंकि वो पूरा क्षेत्र भूमिगत आग की चपेट में है, लेकिन इस बात पर 2017 में जाकर अमल हो पाया, यानी पूरे 13 साल तक लाखों लोग अपनी जान पर खेलकर इस मार्ग पर सफर करते रहे। जून 2017 में इस रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह बंद करके लाखों रेलयात्रियों को भेडि.या टाइप प्राइवेट बस ऑपरेटर्स के भरोसे छोड़ दिया गया है। चलिए माना कि यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से ये जरूरी था, लेकिन इन तमाम गरीब और जरूरतमंद यात्रियों का क्या होगा, जो सिर्फ रेल के भरोसे ही अपने घर परिवार से दूर रोजी-रोटी की तलाश में रहते हैं। उन नौकरीपेशा लोगों और विद्यार्थियों का क्या होगा जो ट्रेनों के भरोसे ही थे। रेलवे को चाहिए कि वो वैकल्पिक रेलमार्ग से बंद हुई ट्रेनों का परिचालन करे और नई रेललाइन का निर्माण पूरा होने तक इस 34 किलोमीटर के मार्ग पर यात्रियों के लिए उतने ही किराए में कनेक्टिंग बसों का परिचालन शुरू करे। रेलमंत्री सुरेश प्रभु गरीब और जरूरतमंद लोगों की लाइफलाइन को इस तरह मत रोकिए। झारखंड में धनबाद-चंद्रपुरा डीसी रेललाइन को बंद हुए पूरे एक माह हो गए हैं। कतरास की आम जनता हर दिन रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचकर डीसी रेल को फिर से चालू कराने के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। इसी क्रम में रेल दो, नहीं तो जेल दो’ सत्याग्रह के साथ लोगों का आंदोलन जारी है। बहरहाल इस एक महीने में रेलवे की राइट्स एजेंसी द्वारा न तो अबतक नई रेललाइन बनाने को लेकर सर्वे हुआ है और न ही वैकल्पिक रूट से बंद 19 जोड़ी ट्रेन चालू हो पाई है। डीसी रेललाइन चालू करने की मांग को लेकर पिछले एक माह से लोग धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। अनशन के बाद कतरास के स्थानीय लोग, व्यापारी और छात्र-छात्राएं हर दिन कतरास स्टेशन प्लेटफॉर्म पर इकठ्ठा होकर डीसी रेललाइन चालू करने की मांग कर रहे है। इतना ही नहीं अपनी मांग को लेकर पटरी के आगे खड़े होकर हर दिन भगवान से प्रार्थना करते हैं। वहीं बार-बार गुहार लगाए जाने के बाद भी अबतक लोगों की गुहार केंद्र सरकार तक नहीं पहुंच पाई है। खदान सुरक्षा महानिदेशक ’डीजीएमएस’ की रिपार्ट के आधार पर 14 किलोमीटर क्षेत्र में भूमिगत आग का खतरा बताकर रेलवे ने 15 जून से 34 किलोमीटर लंबी डीसी रेललाइन पर परिचालन बंद कर दिया है। हालांकि इसके बाद रेलवे ने इसके बाद कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की है। यहां तक कि रेललाइन को आग से बचाने के लिए बीसीसीएल, रेलवे और डीजीएमएस ने केंद्रीय खनन एवं ईधन अनुसंधान संस्थान ’सिंफर’ जैसे वैज्ञानिक संस्थान की भी मदद नहीं ली, इसपर अब सत्ता पक्ष अपनी जमीन बचाने में बेचौन है, तो वहीं विपक्षी हमलावर मुद्रा में है। इन सबसे से दूर जनता के हाथ सिर्फ निराशा और हताशा ही हाथ लग रही है। इस मामले में लोगों ने स्थानीय सांसद से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री तक से समस्या के निदान के लिए गुहार लगा चुके हैं। वहीं विपक्ष का आरोप है कि सिर्फ कोयले के लिए डीसी रेललाइन बंद किया गया है। रेलवे द्वारा बंद डीसी रेललाइन में 5 नई साइडिंग खोलने की तैयारी चल रही और कोयला ढुलाई के लिए लिंक रूट पर मालगाड़ी चलाने की अनुमति मांगी है। वहीं डीजीएमएस ने 4 लिंक रूट पर परिचालन की अनुमति दी है। 

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