• [EDITED BY : H MOHAN] PUBLISH DATE: ; 16 April, 2019 07:00 PM | Total Read Count 70
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358 लौह अयस्क खदानों पर केंद्र से जवाब-तलब

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने देश में 358 से अधिक लौह अयस्क खदानों का नये सिरे से किसी मूल्यांकन के बगैर ही खदान कंपनियों को इसके आबंटन या पट्टे की बढ़ाई गयी अवधि निरस्त करने के लिये दायर याचिका पर मंगलवार को केन्द्र से जवाब मांगा। न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा की याचिका पर केन्द्र को नोटिस जारी किया। पीठ ने इस मामले में न्यायालय की मदद के लिये वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस नरसिम्हा को न्याय मित्र नियुक्त किया है।

मनोहर लाल शर्मा ने इस मामले में सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। याचिका के अनुसार इस साल फरवरी में उन्हें ज्ञात हुआ कि 288 खदानों के पट्टे की अवधि ‘‘मोटा चंदा’’ लेकर बढ़ा दी गयी है जिसकी वजह से राजस्व को चार लाख करोड़ रूपए का नुकसान हुआ है।

याचिका में दावा किया गया है कि देश में 358 लौह अयस्क खदानों में खनन के लिये कंपनियों को नये सिरे से मूल्याकंन या नीलामी की प्रक्रिया का पालन किये बगैर ही पट्टे दे दिये गये हैं या उनकी अवधि बढ़ा दी गयी है। याचिका में कानून के अनुसार इन खदानों से खनन की गयी सामग्री की बाजार कीमत वसूलने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है। इसके अलावा, इसमें इन खनिज खदानों के पट्टे की अवधि बढ़ाने और आबंटन की न्यायालय की निगरानी में जांच कराने का अनुरोध करते हुये आरोप लगाया गया है कि इस तरह के आबंटन से सार्वजनिक राजस्व को भारी हानि हुयी है। याचिका में खदान और खनिज (विकास एवं नियमन) कानून की धारा 8ए को निरस्त करने का अनुरोध किया गया है। धारा 8ए में प्रावधान है कि सभी खदानों के लिये 50 साल की अवधि का पट्टा दिया जायेगा और यह अवधि समाप्त होने पर इस कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इन खदानों की नीलामी की जानी चाहिए।

याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता को पता चला है कि खदान कंपनियों ने खदान के पट्टों की अवधि के विस्तार के लिये इस कानून के प्रावधान के तहत नीलामी की प्रक्रिया से बचने के लिये बहुत बड़ी राशि राजनीतिक चंदे के रूप में दी है जो सीबीआई से जांच का विषय है और सभी राज्यों से खदानों की सूची मंगायी जाये। याचिका के अनुसार कोयला खदानों के अलावा अन्य सभी खनिज खदानों के पुराने पट्टों की अवधि बगैर किसी शुल्क या नये मूल्यांकन के पांच से 20 साल तक के लिये बढ़ा दी गयी है जबकि नयी खदानों की नीलामी की गयी जिनकी रायल्टी के अलावा 80 से 110 फीसदी तक प्रीमियम पर नीलामी हुयी है। इस याचिका में कानून मंत्रालय, खदान एवं खनिज मंत्रालय तथा केन्द्रीय जांच ब्यूरो के साथ ओडीशा और कर्नाटक सरकार को प्रतिवादी बनाया गया है।

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