• [EDITED BY : Avdesh] PUBLISH DATE: ; 26 December, 2018 08:41 PM | Total Read Count 337
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एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में काफी संभावनाएं

एरोनॉटिक्ल इंजीनियरिंग में आपको हवाई उड़ान, डिज़ाइन, निर्माण, स्पेस रिसर्च, डिफेंस टेक्नोलॉजी, कमर्शियल व मिलिट्री एयर-क्राफ्ट के पुर्जों के साथ-साथ, अंतरिक्ष यानों, उपग्रहों और मिसाइलों से जुड़ीं जानकारी प्रदान की जाती हैं। एरोनॉटिक्ल इंजीनियरिंग अपने आप में ही एक चुनौती पूर्ण सजग क्षेत्र है। इसने निरंतर होते विकास ने विश्व के प्रारूप को ही बदल दिया है। जिसमें  स्पेस रिसर्च, डिफेंस टेक्नोलॉजी, कमर्शियल व मिलिट्री एयर-क्राफ्ट के पुर्जों के साथ-साथ, अंतरिक्ष यानों, उपग्रहों और मिसाइलों, Jets, Autogyros और हेलीकॉप्टर, विमान डिज़ाइन करना आदि के बारे में बताया जाता हैं। करियर के लिहाज़ से एरोनॉटिक्ल इंजीनियरिंग में काफी संभावनाएँ है।

एरोनॉटिक्ल इंजीनियरिंग कोर्स

एरोनॉटिक्ल इंजीनियरिंग करियर बनाने के लिए सर्वप्रथम इंटरमीडिएट में आपके पास PCM (फ़िज़िक्स,केमस्ट्री और गणित) विषय में 50% अंक का होना अनिवार्य है।

बी.टेक./ बी.ई. – एरोनॉटिक्ल इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए आपके पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से बी.ई./ बी.टेक. में चार वर्षीय एरोनॉटिक्स में इंजीनियरिंग की डिग्री होना अनिवार्य है।

डिप्लोमा – एरोनॉटिक्ल इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए आपके पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से तीन वर्षीय डिप्लोमा होना आवश्यक है।

एम.टेक. – एरोनॉटिक्स में एम.टेक. करने के लिए उम्मीदवारों के पास एरोनॉटिक्स बी.टेक. की डिग्री होना अनिवार्य है। यदि आप एरोनॉटिक्ल इंजीनियरिंग में करियर बनाने की सोच रहे हो, तो ऊपर दिए हुए एरोनॉटिक्ल इंजीनियरिंग कोर्स  में से किसी एक को चुन कर आप अपना भविष्य बेहतर बना सकते है।

योग्यता    

उम्मीदवारों को एरोनॉटिक्स बी.टेक. में प्रवेश के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त कॉलेज से इंटरमीडिएट (10+2) PCM में 50% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।

बी.ई. में प्रवेश के लिए उम्मीदवारों को किसी भी मान्यता प्राप्त कॉलेज से इंटरमीडिएट (10+2) PCM में 50% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।

एरोनॉटिक्स में डिप्लोमा कोर्स करने के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त कॉलेज से हाईस्कूल (10th) पास करना अनिवार्य है।

एम.टेक. एरोनॉटिक्स प्रवेश के लिए उम्मीदवारों के पास किसी भी मान्यता प्राप्त कॉलेज से बी.टेक. एरोनॉटिक्स में डिग्री होना अनिवार्य हैं।

उम्र         16 वर्ष या उससे अधिक

शैक्षिक योग्यता      हाईस्कूल, इंटरमीडिएट

प्रवेश प्रक्रिया        AIAEE

नौकरी के विकल्प

एरोनॉटिक्स इंजीनियरिंग के बाद नौकरी के कई विकल्प खुल जाते है इसकी डिग्री लेने के बाद आपको सरकारी और प्राइवेट दोनों क्षेत्र में नौकरी उपलब्ध हो सकती है विदेशो  में भी एरोनॉटिक्स में नौकरी के अच्छे विकल्प है। विदेशों में भारत की तुलना एरोनॉटिक्स इंजीनियरिंग में ज्यादा सैलरी पैकेज होता है, इसलिए करियर बनाने की दृष्टि से  एरोनॉटिक्स इंजीनियरिंग एक अच्छा विकल्प हैं।

सैलरी

एरोनॉटिक्स इंजीनियर की सैलरी अन्य फ़ील्ड की तुलना में काफी अच्छी होती हैं। सरकारी इंजीनियर की सैलरी निर्धारित होती है, जबकि प्राइवेट इंजीनियर की सैलरी निर्धारित नही होती हैं। सरकारी इंजीनियर की सैलरी 20,000/- से 40,000/- प्रतिमाह तक हो सकती है। प्राइवेट इंजीनियर की सैलरी तकरीबन 50,000/- से 1,50,000/- प्रतिमाह तक हो सकती हैं। सैलरी के लिहाज़ से हम कह सकते है कि एरोनॉटिक्स इंजीनियर करियर के हिसाब से सुन-हरा अवसर हैं।

प्रमुख संस्थान

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बॉम्बे (आईआईटी बॉम्बे)

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर (आईआईटी कानपुर)

भारतीय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी खड़गपुर (आईआईटी के.जी.पी.)

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास (आईआईटी मद्रास)

पी.ई.सी. विश्वविद्यालय प्रौद्योगिकी

बंगाल इंजीनियरिंग एंड साइंस यूनिवर्सिटी

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