• [EDITED BY : Edit Team] PUBLISH DATE: ; 09 July, 2019 11:26 PM | Total Read Count 163
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पुलिस व्यवस्था बदहाल है

राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आतंरिक सुरक्षा पर भी भारतीय जनता पार्टी का खास जोर रहता है। लेकिन असल में वह इन क्षेत्रों के लिए के लिए वह क्या करती है, यह दीगर सवाल है। भाजपा के राज में रक्षा बजट में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई, यह अब जग-जाहिर है। अब ताजा आंकड़ों ने आंतरिक सुरक्षा की गंभीर स्थिति का भी खुलासा किया है। देश भर में पुलिस के कुल 5.28 लाख पद रिक्त हैं। इनमें सबसे अधिक लगभग 1.29 लाख पद उत्तर प्रदेश में, बिहार में 50,000 पद और पश्चिम बंगाल में 49,000 पद खाली हैं। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सभी राज्यों के पुलिस बलों में 23,79,728 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 18,51,332 पदों को एक जनवरी 2018 तक भर लिया गया था। इस तारीख तक कुल 5,28,396 पद खाली पड़े थे। उत्तर प्रदेश में पुलिस बल में अनुमोदित पदों की संख्या 4,14,492 है। इनमें से 2,85,540 पद भरे हुए और 1,28,952 पद रिक्त हैं। बिहार में 1,28,286 स्वीकृत पदों में से 77,995 पदों पर कर्मी कार्यरत हैं। यहां 50,291 पद खाली हैं। पश्चिम बंगाल पुलिस में ऐसी स्वीकृत संख्या 1,40,904 है और यहां 48,981 रिक्त पद हैं। तेलंगाना में 30,345 रिक्त पद हैं, जबकि यहां 76,407 पद स्वीकृत हैं। दिलचस्प बात यह है कि नगालैंड पुलिस देश की एकमात्र ऐसा बल है, जहां 21,292 पदों की स्वीकृत संख्या से 941 अधिक कर्मियों को भर्ती किया गया है। अधिकारियों ने बड़ी संख्या में पद खाली होने के लिए धीमी भर्ती प्रक्रिया, रिटायरमेंट और असामयिक मृत्यु जैसे कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। मगर मृत्यु के बाद तुरंत भर्ती ना करना जाहिरा तौर पर सरकार की नाकामी है। जब तक पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी नहीं होंगे, आंतरिक सुरक्षा मुस्तैद नहीं हो सकती।

एक अच्छी बात यह है कि अब महिलाओं में पुलिस बल के प्रति आकर्षण बढ़ा है। वे काफी संख्या में पुलिस में भर्ती हो रही हैं। कॉन्स्टेबल बनने के लिए आवेदक को कम से कम 12वीं पास होना चाहिए। इसके बाद शारीरिक फिटनेस टेस्ट और एक लिखित परीक्षा होती है। शारीरिक फिटनेस की भी जरूरत होती है। इसके बाद पुलिसकर्मियों को उम्मीद कामकाज के बेहतर हालात की अपेक्षा होती है। मगर अपने देश में ऐसा नहीं है। ऊपर से काम का बोझ ज्यादा रहता है। इसकी एक वजह पुलिसकर्मियों की संख्या कम होना भी है। इस मोर्चे पर पुरानी सरकारों की तरह मौजूदा सरकार भी नाकाम रही है।

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