• [EDITED BY : Edit Team] PUBLISH DATE: ; 02 August, 2019 05:16 AM | Total Read Count 172
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किसानी का घटता आकर्षण

यह बात नई नहीं है। लेकिन एक बार फिर इसकी पुष्टि होना देश के कृषि क्षेत्र में बढ़ते संकट की तरफ इशारा करता है। पुष्टि इस बात की हुई है कि किसान परिवारों के बच्चे खेती को छोड़कर बेहतर कमाई के लिए गैर कृषि- खासकर कन्स्ट्रक्शन क्षेत्र में मजदूरी करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। ये दीगर बात है कि खेती-किसानी छोड़ने के बावजूद उनके जीवन स्तर में कोई सुधार नहीं हुआ है। बहरहाल, चिंता की बात यह है कि कई अन्य पेशों की तरह किसान के बच्चे अपने पिता के पेशे को नहीं अपनाना चाहते। आर्थिक गतिशीलता (इकॉनोमिक मॉबिलिटी) पर किए गए एक अध्ययन से ये बातें सामने आई हैं। इस अध्ययन के मुताबिक 2005 की तुलना में 2012 में किसानों के बच्चों का खेती से अधिक मोह भंग देखा गया है।’ इंटर-जेनेरेशन मॉबिलिटी इंडेक्स ऐसा माध्यम है जिससे बच्चों के अपने पिता का पेशा अपनाने से संबंधित ट्रेंड का पता चलता है। इस इंडेक्स के मुताबिक कृषि और अन्य पेशे से जुड़े मजदूरों में यह दर 62.7 फीसदी से घटकर 58 फीसदी हुई है। खेती के मामले में यह 53.5 फीसदी से घटकर 32.4 फीसदी रह गई है। स्वतंत्रता के बाद से यह पहली बार है जब कृषि को छोड़कर गैर कृषि क्षेत्रों में जाने वाले कामगारों की संख्या अत्यधिक हो गई है। 

कृषि क्षेत्र में लगे मजदूरों का पलायन गैर कृषि क्षेत्र की ओर इसलिए बढ़ा है, क्योंकि कृषि क्षेत्र में तेजी से रोजगार के अवसर घटे हैं। अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक कृषि क्षेत्र से जुड़े युवा (किसानों के बच्चे) बेहतर नौकरी की उम्मीद में शिक्षा ले रहे हैं। इसलिए माना जाता है कि काम की गुणवत्ता के साथ-साथ रोजगार की संख्या दोनों महत्त्वपूर्ण है। जबकि खेती छोड़कर दूसरे क्षेत्र में जाने वाले नौजवानों के काम की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ है। वे निर्माण क्षेत्र में जा रहे हैं, जहां बहुत प्रतिकूल स्थितियों में उन्हें काम करना पड़ता है। नतीजतन, उनके जीवन स्तर में बेहतर बदलाव के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। एक अन्य सर्वे में बताया गया था कि 56 फीसदी किसान खेती छोड़कर अन्य पेशा अपनाना चाहते हैं, जबकि 61 फीसदी किसान बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर के लिए खेती को छोड़कर शहरों में पलायन करना चाहते हैं। जाहिर है, किसान कल्याण के सरकारी दावे खोखले साबित हुए हैं। किसानों की असल जिंदगी में उनसे कोई फर्क नहीं पड़ा है। 

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