• [WRITTEN BY : Edit Team] PUBLISH DATE: ; 30 August, 2019 06:38 AM | Total Read Count 187
  • Tweet
मंदी से मुक्ति नहीं

हाल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कई उपायों की घोषणा की। लेकिन इससे जानकार ज्यादा उत्साहित नहीं हैं। इसलिए कि राय यह बनी है कि अर्थव्यवस्था में आई मौजूदा गिरावट ढांचागत है। यह लंबे समय से इकट्ठा होते गए कारणों के कारण सामने आई है। नोटबंदी और जीएसटी पर खराब ढंग से अमल ने गिरावट को तेज कर दिया। अब इस आम राय की पुष्टि गोल्डमैन सैक्स ने भी की है। इस एजेंसी के विश्लेषकों के मुताबिक मंदी की ओर जाती भारतीय अर्थव्यस्था को उभारने के लिए सरकार की कोशिशें फिलहाल कामयाब होती नहीं दिखतीं। बल्कि अर्थव्यस्था में आगे आने वाले महीनों में सुस्ती जारी रहेगी। कंपनी दो विशेषोज्ञों द्वारा तैयार रिपोर्ट के मुताबिक आगे आने वाले महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था में सुस्ती बनी रहेगी। ये रिपोर्ट ‘इंडिया इकोनॉमिक स्लोडाउन’ नाम से प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक आर्थिक सुस्ती की शुरुआत जनवरी 2018 में हुई।

आईएलएंडएफएस में परेशानी इस सुस्ती का ही नतीजा था, जिसकी नींव 2017-18 की तीसरी तिमाही में जीएसटी की शुरुआत के साथ ही डाल दी गई थी। बीते 18 महीनों से यह सुस्ती जारी है और 2006 के बाद यह सबसे लंबी अवधि है। गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बिक्री में गिरावट सुस्ती के पीछे जिम्मेदार अकेला कारण नहीं है। बल्कि कर संग्रह और उपभोक्ता वस्तुओं की बिक्री में लगातार कमी आदि भी अर्थव्यवस्था में सुस्ती के पीछे काफी हद तक जिम्मेदार हैं। सुस्ती के पीछे ऑटोमोबाइल क्षेत्र 17 फीसदी तक जिम्मेदार है। जबकि बैंक कृषि कर्ज, वाहनों की बिक्री, ग्रामीण क्षेत्र में मेहनताना, तेल की खपत, कृषि निर्यात, खाद की बिक्री, रेल/हवाई यात्रियों की संख्या, घर के लिए कर्ज और इलेक्ट्रॉनिक निर्यात की इसमें पीछे 36 फीसदी भूमिका है। खाद की बिक्री और रेल यात्री परिवहन में गिरावट अकेले दो ऐसे संकेतक हैं, जिनमें बीते साल के आखिर में गिरावट शुरू हुई। वहीं कृषि कर्ज, ग्रामीण क्षेत्र में मेहनताना, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्यात जैसे संकेतक 2017 में ही गिरने शुरू हो गए थे। गौल्डमैन सैक्स के विशेषज्ञों के मुताबिक अर्थव्यवस्था की सुस्ती के पीछे 2017 में लागू किया गया वस्तु एंव सेवा कर भी जिम्मेदार हो सकता है। नकदी का संकट जीएसटी रिफंड की व्यवस्था में परेशानियों का ही परिणाम था। उसकी वजह से एमएसएमई क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ। तो कुल निष्कर्ष यह है कि ये सुस्ती अभी लंबे समय तक रहने वाली है। 

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

Categories